खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और सड़क परिवहन के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को संगम नगरी प्रयागराज से जोड़ने वाले प्रदेश के सबसे लंबे और बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे पर मुफ्त सफर का दौर अब समाप्त होने वाला है। अभी तक यह अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे अपने ट्रायल रन (Trial Run) के चरण में था, जिसके चलते वाहन चालकों से किसी भी प्रकार का कोई टोल टैक्स नहीं लिया जा रहा था। लेकिन अब यूपीडा (UPEIDA) ने पूरी तैयारी कर ली है। 14 और 15 जून की आधी रात से इस एक्सप्रेसवे पर व्यावसायिक रूप से टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं और टोल प्लाजा पर नई रेट लिस्ट भी चस्पा कर दी गई है।READ ALSO:-संभल के 'शिक्षा के मंदिर' में मजहबी तालीम का भंडाफोड़: पीएम श्री विद्यालय में बच्चों को पहनाया हिजाब, प्रधानाध्यापक समेत 3 शिक्षक सस्पेंड, FIR दर्ज!

 

यदि आप भी आने वाले दिनों में गंगा एक्सप्रेसवे से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा, कौन से वाहन इस पर चल सकेंगे और किन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं।

 

12 जिलों की भाग्य रेखा: मेरठ से प्रयागराज तक का सुहाना सफर

गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाली एक जीवन रेखा है। 594 किलोमीटर लंबा यह विशाल एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी के मेरठ जिले के बिजौली गांव से शुरू होता है और पूर्वी यूपी में प्रयागराज जिले के जुदापुर दांदू गांव तक जाता है।

 Photo Credit; ETV Bharat

एक्सप्रेसवे के रूट में आने वाले जिले:

  • मेरठ
  • हापुड़
  • बुलंदशहर
  • अमरोहा
  • संभल
  • बदायूं
  • शाहजहांपुर
  • हरदोई
  • उन्नाव
  • रायबरेली
  • प्रतापगढ़
  • प्रयागराज

 

समय की भारी बचत: इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले मेरठ से प्रयागराज की दूरी तय करने में यात्रियों को जाम और खराब रास्तों के कारण लगभग 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ समय लगता था। लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे ने इस दूरी को समेट कर आधा कर दिया है। अब यह सफर मात्र 5 से 6 घंटे में बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सकेगा। इसके लिए वाहनों की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।

 

कैसे काम करेगा 'क्लोज्ड टोल सिस्टम' और एआई कैमरे?

यूपीडा (UPEIDA) ने गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए "क्लोज्ड टोल सिस्टम" (Closed Toll System) को लागू किया है। पुराने टोल सिस्टम में आपको एक निश्चित जगह पर फिक्स टोल देना होता था, चाहे आप एक्सप्रेसवे का पूरा इस्तेमाल करें या बीच में ही उतर जाएं। लेकिन क्लोज्ड टोल सिस्टम का सीधा सा अर्थ है: "जितनी दूरी, उतना ही टोल"

 

एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करते समय आपके वाहन की एंट्री दर्ज हो जाएगी और जब आप अपने गंतव्य वाले रैंप या प्लाजा से बाहर निकलेंगे, तो केवल उसी तय की गई दूरी के आधार पर टोल काटा जाएगा।

 

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग: पूरे एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक AI कैमरों से लैस किया गया है। ये कैमरे चलते हुए वाहनों की नंबर प्लेट और FASTag को स्कैन करने में सक्षम हैं।
  • बिना रुके सफर: टोल का भुगतान 100% FASTag के माध्यम से ऑटोमैटिक तरीके से होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या से बचने के लिए बैकअप सर्वर और मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी वाहन चालक को टोल प्लाजा पर रुकना न पड़े और ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे।
  • प्लाजा की संख्या: यात्रा को सुगम बनाने के लिए पूरे 594 किलोमीटर के रूट पर 2 मुख्य (Main) टोल प्लाजा और अलग-अलग जगहों पर एंट्री/एग्जिट के लिए 14 से 19 रैंप टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं।

 

अपनी जेब का रखें हिसाब: क्या हैं नई टोल दरें?

यूपीडा द्वारा निर्धारित की गई नई टोल दरें वाहन के प्रकार और उनके आकार के आधार पर तय की गई हैं। यह टोल प्रति किलोमीटर के हिसाब से वसूला जाएगा। नीचे दी गई तालिका में दरों का पूरा विवरण दिया गया है:
 
वाहन की श्रेणी
टोल दर (प्रति किलोमीटर)
मेरठ से प्रयागराज तक का अनुमानित टोल (एकतरफा)
हल्के वाहन (कार, जीप, वैन आदि)
₹2.55
₹1,514 से ₹1,515
भारी वाहन (बस और ट्रक)
₹8.15
₹4,840 से ₹4,870
ओवरसाइज वाहन (बड़े ट्राले आदि)
₹16.05
₹9,535 से ₹9,563

 

टोल दरों में हालिया बदलाव: आपको बता दें कि टोल की इन दरों को लेकर पिछले कुछ महीनों में काफी मंथन हुआ है। शुरुआत में 29 अप्रैल को हल्के वाहनों (कार/जीप) के लिए पूरे सफर का टोल ₹1,800 तय किया गया था। हालांकि, जनता की सहूलियत को देखते हुए 30 अप्रैल को इसे संशोधित कर ₹1,765 किया गया था। अब जो अंतिम दरें लागू की जा रही हैं, वे और भी किफायती हैं, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली है।
वापसी पर मिलेगी बंपर छूट: जानें कैसे बचाएं पैसे

 

नियमित यात्रियों और किसी काम से जाकर तुरंत लौटने वालों के लिए यूपीडा ने एक शानदार छूट का प्रावधान किया है:

 

  • 24 घंटे के अंदर वापसी: यदि आप एक्सप्रेसवे के जरिए यात्रा करते हैं और 24 घंटे के भीतर उसी रूट से वापस लौटते हैं, तो आपको वापसी के टोल टैक्स में 20% की भारी छूट दी जाएगी।
  • उदाहरण: यदि आप कार से मेरठ से प्रयागराज जाते हैं और 24 घंटे में वापस आते हैं, तो एकतरफा 1515 रुपये के हिसाब से यह 3030 रुपये नहीं, बल्कि छूट के बाद लगभग ₹2,727 से ₹3,030 (राउंड ट्रिप कैलकुलेशन के आधार पर) के आसपास ही बैठेगा। यह व्यवस्था व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।

 

इन 5 कड़े नियमों का उल्लंघन पड़ सकता है भारी

एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे। ऐसे में सुरक्षा सर्वोपरि है। यूपीडा ने कुछ बेहद सख्त नियम बनाए हैं, जिनकी अनदेखी करने पर आपकी जेब ढीली हो सकती है:

 

  1. प्रतिबंधित वाहन: गंगा एक्सप्रेसवे पर किसी भी प्रकार के दोपहिया (Bike/Scooter), तिपहिया (Auto, E-rickshaw, Tempo) और ट्रैक्टर का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। धीमी गति वाले ये वाहन तेज रफ्तार कारों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
  2. भारी जुर्माना: यदि कोई भी दोपहिया, तिपहिया या ट्रैक्टर चालक एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरते या प्रवेश करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹20,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। जगह-जगह तैनात पेट्रोलिंग टीमें और एआई कैमरे ऐसे वाहनों की निगरानी करेंगे।
  3. NHAI पास नहीं चलेगा: ध्यान रहे, यदि आपके पास नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का ₹3,000 वाला सालाना टोल पास है, तो वह यहां काम नहीं करेगा।
  4. यूपीडा का अलग पास: चूंकि गंगा एक्सप्रेसवे पूरी तरह से उत्तर प्रदेश यूपीडा (UPEIDA) के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए जो लोग रोजाना इस पर सफर करना चाहते हैं, उन्हें यूपीडा की वेबसाइट या टोल प्लाजा से अलग 'मासिक पास' (Monthly Pass) बनवाना होगा।
  5. ओवरस्पीडिंग चालान: 120 किमी/घंटा की सीमा से अधिक तेज गाड़ी चलाने पर ऑटोमैटिक स्पीड कैमरों द्वारा ई-चालान सीधे आपके मोबाइल पर भेज दिया जाएगा।

 

यात्रा से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर है। यह न केवल सफर को आसान बनाएगा, बल्कि समय और ईंधन दोनों की बचत करेगा। यात्रा शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके वाहन का FASTag पूरी तरह से रिचार्ज हो और सही तरीके से विंडशील्ड पर लगा हो। चूंकि सर्वर और कैमरे काफी एडवांस हैं, इसलिए ब्लैकलिस्टेड या कम बैलेंस वाले FASTag वाहनों को प्रवेश में असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। अपनी लेन का पालन करें, सीट बेल्ट जरूर लगाएं और एक सुरक्षित तथा सुखद यात्रा का आनंद लें।
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