खबरीलाल टीम
लखनऊ: मशहूर यूट्यूबर एल्विश यादव और पंजाबी गायक फाजिलपुरिया को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा झटका दिया है। सांपों के जहर के अवैध उपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में, ईडी ने गुरुग्राम स्थित PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) की विशेष अदालत में दोनों के खिलाफ विस्तृत आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है।READ ALSO:-दीपावली पर ग्रीन पटाखें फोड़ सकेंगे Delhi-NCR वाले, सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त इजाजत

 

ईडी ने इस मामले में पहले ही ₹55 लाख रुपये की कीमत की संपत्ति जब्त कर ली थी। अब आरोप पत्र दाखिल होने के बाद, अदालत जल्द ही एल्विश यादव और फाजिलपुरिया को तलब कर सकती है, जिससे उनकी कानूनी परेशानियां काफी बढ़ गई हैं।

 

'32 बोर' गाना बना मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया!
यह पूरा मामला एल्विश यादव और फाजिलपुरिया द्वारा एक साथ शूट किए गए गाने '32 बोर' में कथित तौर पर साँपों के अवैध इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।

 

आय और संपत्ति की जब्ती का गणित
ईडी ने गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी और पाया कि अवैध गतिविधियों से अर्जित आय को सफेद करने की कोशिश की गई थी।
  • गाने से कमाई: ईडी की जाँच में खुलासा हुआ कि फाजिलपुरिया के इस गाने से यू-ट्यूब के माध्यम से ₹52 लाख रुपये की कमाई हुई थी। ईडी इस आय को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 'अपराध की आय' मानती है।
  • बिजनौर में जमीन जब्त: फाजिलपुरिया ने इसी आय का इस्तेमाल करते हुए बिजनौर जिले में ₹50 लाख में एक 3 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी, जिसे ईडी ने जब्त कर लिया।
  • बैंक खाते फ्रीज: इसके अलावा, दोनों के बैंक खातों में जमा करीब ₹3 लाख रुपये और गाने को शूट करने वाली चंडीगढ़ की कंपनी स्काई डिजिटल के बैंक खाते में जमा करीब ₹2 लाख रुपये भी जब्त किए गए थे। आरोप पत्र में स्काई डिजिटल को भी दोषी बनाया गया है।

 

ईडी के इस कदम से स्पष्ट है कि अब सिर्फ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम ही नहीं, बल्कि आर्थिक अपराध के तहत भी दोनों पर शिकंजा कसा जाएगा।

 

बहुचर्चित 'कोबरा कांड' से जुड़ा है मामला
यूट्यूबर एल्विश यादव पहले से ही नोएडा के बहुचर्चित कोबरा कांड में मुख्य आरोपी हैं।

 

कोबरा कांड क्या था?
  • शिकायत: पूर्व सांसद मेनका गांधी की संस्था पीपुल्स फॉर एनिमल्स की शिकायत पर 2 नवंबर 2023 को नोएडा में एल्विश यादव समेत छह लोगों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
  • गंभीर आरोप: एल्विश पर आरोप था कि वह एक संगठित गिरोह बनाकर सांप का जहर और जिंदा सांपों को नोएडा व एनसीआर के फार्म हाउस, क्लबों, रिसॉर्ट्स आदि में होने वाली रेव पार्टियों में उपलब्ध कराता था।
  • पुरानी गिरफ्तारी: पुलिस जांच में एल्विश की संलिप्तता की पुष्टि होने पर नोएडा पुलिस ने उसे 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। इस मामले से जुड़े आर्थिक पहलू पर ही ईडी ने अलग से मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।

 

आगे क्या होगा? कानूनी प्रक्रिया
  1. समन्स जारी: PMLA की विशेष अदालत ईडी के आरोप पत्र का संज्ञान लेगी, जिसके बाद दोनों आरोपियों (एल्विश यादव और फाजिलपुरिया) को अदालत में पेश होने के लिए समन्स जारी किया जाएगा।
  2. सुनवाई: दोनों को अदालत के समक्ष अपने बचाव का पक्ष रखना होगा। PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध अत्यंत गंभीर माना जाता है।
  3. संपत्ति की स्थिति: जब्त की गई संपत्तियों की अंतिम कुर्की (Confiscation) का फैसला भी अदालत ही करेगी।

 

ईडी का यह कड़ा कदम संकेत देता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से होने वाली आय और उस आय के स्रोत की वैधता पर सरकारी एजेंसियों की पैनी नज़र बनी हुई है।
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