खबरीलाल टीम
बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. "एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा" के संकल्प को साकार करने के लिए जिलाधिकारी (DM) डॉ. विजय कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर से 'टीका मित्र वैन' (Tika Mitra Van) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक कदम: पिता की डांट नहीं सह सका 18 साल का बेटा, गुस्से में अवैध तमंचे से पेट में उतार ली गोली; जिंदगी-मौत की जंग जारी

 

यह वैन केवल एक वाहन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता जागरूकता केंद्र है, जो जनपद के सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर शहर की तंग गलियों तक जाकर लोगों को टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करेगी. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित करना है.

 

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि 'टीका मित्र वैन' कैसे काम करेगी, बच्चों के लिए कौन-कौन से टीके (Vaccines) जरूरी हैं, और स्वास्थ्य विभाग की इस मुहिम का आम जनता को कैसे लाभ मिलेगा.

 

जागरूकता का रथ: क्या है 'टीका मित्र वैन'?

टीकाकरण को लेकर आज भी समाज के कई वर्गों में भ्रांतियां और जागरूकता की कमी देखने को मिलती है. कई बार अभिभावक काम की व्यस्तता या जानकारी के अभाव में बच्चों के नियमित टीके लगवाना भूल जाते हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए 'टीका मित्र वैन' की शुरुआत की गई है.

 

जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने वैन को रवाना करते हुए कहा, "स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव रखते हैं. हमारा उद्देश्य है कि जनपद का कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे. यह वैन घर-घर जाकर यह संदेश देगी कि बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी, सुरक्षित और आसान तरीका केवल टीकाकरण ही है."

 

वैन की मुख्य विशेषताएं:

  • ऑडियो-विजुअल प्रचार: वैन में लाउडस्पीकर और प्रचार सामग्री के माध्यम से टीकाकरण के लाभ बताए जाएंगे.
  • कैलेंडर का प्रदर्शन: वैन के बाहरी हिस्से पर बच्चों के टीकाकरण का 'आयु अनुसार कैलेंडर' (Immunization Schedule) प्रदर्शित किया गया है. इससे अभिभावक आसानी से समझ सकेंगे कि किस उम्र में कौन सा टीका लगवाना है.
  • भ्रांतियों का निवारण: वैन के साथ चल रहे स्वास्थ्य कर्मी लोगों के मन में टीकों को लेकर चल रहे डर और गलतफहमियों को दूर करेंगे.

 

'5 साल, 7 बार': यह फार्मूला क्यों है जरूरी?

इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक बहुत ही सरल और स्पष्ट संदेश दिया है— "5 साल तक 7 बार टीकाकरण अनिवार्य है."

 

अक्सर देखा गया है कि माता-पिता जन्म के समय के टीके तो लगवा लेते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वे फॉलो-अप टीके (Booster Doses) लगवाना भूल जाते हैं. 'टीका मित्र वैन' इसी बात पर जोर देगी कि एक भी टीका छूटने पर बच्चे का सुरक्षा चक्र कमजोर हो सकता है.

 

टीकाकरण का महत्व: टीके बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) विकसित करते हैं. यह शरीर को भविष्य में होने वाले संक्रमणों से लड़ने के लिए तैयार करते हैं. यदि कोई बच्चा टीकाकरण से चूक जाता है, तो उसे गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती हैं या स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती हैं.

 

इन 11 जानलेवा बीमारियों से मिलेगी सुरक्षा

'टीका मित्र वैन' का मुख्य फोकस उन 11 गंभीर बीमारियों पर है, जो बच्चों के लिए बेहद घातक मानी जाती हैं. नियमित टीकाकरण से इन सभी बीमारियों की रोकथाम संभव है.
ये 11 बीमारियां हैं:

 

  1. डिप्थीरिया (Diphtheria): यह गले का एक गंभीर संक्रमण है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है.
  2. काली खांसी (Pertussis): इसे 'कुकर खांसी' भी कहा जाता है, जो बच्चों के फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती है.
  3. टेटनस (Tetanus): यह मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है और जानलेवा हो सकता है.
  4. पोलियो (Polio): यह बीमारी बच्चे को हमेशा के लिए विकलांग बना सकती है. भारत पोलियो मुक्त हो चुका है, लेकिन सुरक्षा बनाए रखने के लिए टीकाकरण जरूरी है.
  5. टीबी (Tuberculosis): यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकती है. (BCG का टीका इससे बचाता है).
  6. खसरा (Measles): यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है.
  7. रूबेला (Rubella): इसे जर्मन खसरा भी कहते हैं.
  8. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B): यह लीवर को नुकसान पहुंचाने वाला गंभीर संक्रमण है.
  9. निमोनिया (Pneumonia): न्यूमोकोकल वैक्सीन इससे बचाव करती है.
  10. मेनिन्जाइटिस (Meningitis): दिमागी बुखार, जिससे जान जाने का खतरा रहता है.
  11. गलाघोंटू: और रोटावायरस डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव शामिल है.

 

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (DIO) डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया, "हमारी अपील है कि अभिभावक इन बीमारियों की गंभीरता को समझें. ये बीमारियां न केवल बच्चे को कष्ट देती हैं बल्कि परिवार पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी डालती हैं. दो बूंद दवा और एक छोटा सा टीका आपके बच्चे को जीवनदान दे सकता है."

 

निःशुल्क सुविधा और MCP कार्ड की अहमियत

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे नियमित टीकाकरण सत्रों (Routine Immunization Sessions) में ये सभी टीके पूर्णतः निःशुल्क (Free of Cost) लगाए जाते हैं. यह सुविधा जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और गांव स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित सत्रों में उपलब्ध है.

 

मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड (MCP Card): डीएम ने अभिभावकों से एक विशेष आग्रह किया है. उन्होंने कहा, "टीकाकरण के बाद एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कर्मी से 'मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड' (MCP Card) जरूर मांगें और उसे संभाल कर रखें. यह कार्ड आपके बच्चे के स्वास्थ्य का पासपोर्ट है. इसमें बच्चे के अगले टीके की तारीख और अब तक लगे टीकों का पूरा रिकॉर्ड होता है."

 

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी की अपील: "जागरूक बनें, जिम्मेदारी निभाएं"

वैन रवानगी के दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने जनसामान्य से भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि 0 से 5 वर्ष की आयु बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है. इस दौरान उनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए उन्हें बाहरी सुरक्षा (Vaccines) की सख्त जरूरत होती है.

 

डॉ. गौतम ने कहा, "टीका मित्र वैन आपके दरवाजे तक दस्तक दे रही है. अगर आपके घर में या आस-पड़ोस में कोई ऐसा बच्चा है जिसका टीकाकरण अधूरा है, तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इसमें आपकी पूरी मदद करेंगी."

 

टीकाकरण में कोताही के परिणाम

विशेषज्ञों के अनुसार, जो बच्चे बिना टीकाकरण के रह जाते हैं, वे न केवल खुद जोखिम में होते हैं बल्कि समुदाय के अन्य बच्चों के लिए भी खतरा बन सकते हैं.

 

  • बीमारी का प्रसार: बिना टीका लगा बच्चा वायरस का वाहक (Carrier) बन सकता है.
  • इलाज का खर्च: इन बीमारियों के इलाज का खर्च टीकाकरण की तुलना में बहुत अधिक होता है.
  • शैक्षिक नुकसान: बार-बार बीमार पड़ने से बच्चे की पढ़ाई और विकास बाधित होता है.

 

प्रशासन की तैयारी और भविष्य की योजना

'टीका मित्र वैन' के संचालन के लिए एक विस्तृत रूट चार्ट (Route Chart) तैयार किया गया है. यह वैन उन क्षेत्रों में प्राथमिकता से जाएगी जिन्हें 'हाई रिस्क एरिया' (High Risk Areas) माना जाता है या जहां टीकाकरण का प्रतिशत (Immunization Coverage) कम है. इसमें ईंट-भट्ठे, निर्माण स्थल, और दूरदराज के गांव शामिल हैं.

 

स्वास्थ्य विभाग की टीमें वैन के साथ-साथ चलेंगी और मौके पर ही छूटे हुए बच्चों की सूची (Due List) तैयार करेंगी ताकि अगले सत्र में उन्हें टीका लगाया जा सके.

 

जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग की यह पहल 'टीका मित्र वैन' निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है. लेकिन, यह अभियान तभी सफल होगा जब जनता इसमें भागीदारी निभाएगी. सरकार संसाधन उपलब्ध करा सकती है, वैन चला सकती है, लेकिन बच्चे को टीकाकरण केंद्र तक ले जाने की जिम्मेदारी माता-पिता की है.

 

आइए संकल्प लें कि हम अपने बच्चों को इन 11 जानलेवा बीमारियों से बचाएंगे और उन्हें एक स्वस्थ बचपन का उपहार देंगे. याद रखें, "टीकाकरण है सुरक्षा का वादा, स्वस्थ बच्चा, सशक्त इरादा."

 

जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट से 'टीका मित्र वैन' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह वैन शहर और गांवों में घूमकर लोगों को बताएगी कि 0 से 5 साल तक के बच्चों का 7 बार टीकाकरण क्यों जरूरी है. यह अभियान बच्चों को पोलियो, खसरा, टीबी और निमोनिया जैसी 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए चलाया जा रहा है. सभी सरकारी केंद्रों पर यह टीकाकरण मुफ्त उपलब्ध है.
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