उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले के चहुंमुखी विकास और सरकारी योजनाओं को आम जनमानस तक सुगमता से पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं और जन-कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए 18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।READ ALSO:-रक्षाबंधन 2026: यूपी की महिलाओं को योगी सरकार का शानदार तोहफा, 27 से 29 अगस्त तक रोडवेज बसों में सफर होगा बिल्कुल 'फ्री'
यह बैठक 'जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति' यानी दिशा (DISHA - District Development Coordination and Monitoring Committee) की होगी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहेंगे और जनता से जुड़े मुद्दों पर गहन मंथन किया जाएगा।
बैठक का समय, स्थान और मुख्य नेतृत्व
जिलाधिकारी (DM) और इस दिशा समिति की सदस्य सचिव श्रीमती जसजीत कौर ने 16 अगस्त को इस बैठक की आधिकारिक जानकारी साझा की।
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बैठक की तारीख: 18 अगस्त 2026
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समय: सुबह 11:00 बजे (पूर्वाह्न)
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स्थान: विकास भवन सभागार, बिजनौर
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अध्यक्षता: माननीय सांसद (नगीना लोकसभा क्षेत्र) एडवोकेट चंद्रशेखर
इस बैठक का नेतृत्व नगीना से सांसद चंद्रशेखर करेंगे। एक युवा और मुखर जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक से जिले की जनता और प्रशासनिक खेमे में काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट की बारीकी से जांच की जाएगी।
क्या होती है 'दिशा' (DISHA) समिति और यह क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
आम जनता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर 'दिशा' समिति क्या है और इसकी बैठक जिले के लिए इतनी अहम क्यों मानी जाती है।
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 में 'दिशा' (जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति) का गठन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ धरातल पर बैठे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
दिशा समिति के मुख्य कार्य:
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योजनाओं की मॉनिटरिंग: जिले में चल रही सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) की प्रगति की समीक्षा करना।
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जवाबदेही तय करना: बजट का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, और यदि कोई कार्य अधूरा है तो इसके लिए संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करना।
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समन्वय (Coordination) बनाना: जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक) और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर जिले की समस्याओं का त्वरित समाधान खोजना।
इस समिति का अध्यक्ष आमतौर पर जिले का सबसे वरिष्ठ या प्रमुख लोकसभा सांसद होता है, जबकि जिलाधिकारी (DM) इसके सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
बैठक का संभावित एजेंडा: किन योजनाओं पर होगी पैनी नज़र?
18 अगस्त को विकास भवन में होने वाली इस मैराथन बैठक में जिले के विकास से जुड़ी कई अहम परियोजनाओं की फाइलें खुलेंगी। अधिकारियों को अपने-अपने विभागों का पूरा रिपोर्ट कार्ड लेकर आना होगा। उम्मीद है कि निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा:
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क्र.सं.
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योजना/विभाग का नाम
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समीक्षा का मुख्य बिंदु (संभावित)
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1.
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जल जीवन मिशन (हर घर जल)
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ग्रामीण इलाकों में पानी की टंकियों का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने की स्थिति।
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2.
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प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण/शहरी)
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लाभार्थियों को किस्त मिलने में हो रही देरी और नए आवासों के निर्माण की प्रगति।
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3.
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मनरेगा (MGNREGA)
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ग्रामीण रोजगार सृजन, मस्टर रोल की पारदर्शिता और लंबित भुगतानों की स्थिति।
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4.
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स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग
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जिला अस्पताल और CHC/PHC पर दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति और आयुष्मान भारत योजना।
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5.
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पीडब्ल्यूडी (PWD) एवं सड़क निर्माण
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गड्ढामुक्त सड़कें, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और निर्माणाधीन पुलों का स्टेटस।
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6.
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कृषि एवं बिजली विभाग
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किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और खाद-बीज की उपलब्धता।
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नगीना सांसद चंद्रशेखर की अध्यक्षता के मायने
नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए एडवोकेट चंद्रशेखर अपनी बेबाक कार्यशैली और जनता के मुद्दों को आक्रामकता से उठाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी अध्यक्षता में होने वाली इस दिशा बैठक में अधिकारियों से सीधे और कड़े सवाल पूछे जाने की पूरी संभावना है।
सांसद का फोकस मुख्य रूप से ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, दलित-वंचित समाज तक सरकारी योजनाओं की पहुंच, युवाओं के लिए रोजगार के साधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर रह सकता है। यह बैठक अधिकारियों के लिए भी एक तरह का 'लिटमस टेस्ट' होगी, जहां उन्हें विकास कार्यों में हो रही किसी भी देरी का स्पष्ट कारण बताना होगा।
डीएम जसजीत कौर के अधिकारियों को सख्त निर्देश
बैठक को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। जिलाधिकारी जसजीत कौर, जो अपने कड़े प्रशासनिक फैसलों और अनुशासन के लिए पहचानी जाती हैं, ने सभी संबंधित विभागों के प्रमुखों (जैसे- CDO, CMO, DPRO, PWD एक्सईएन आदि) को सख्त हिदायत दी है।
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पूरी तैयारी के साथ आएं: डीएम ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी बिना अद्यतन (Updated) आंकड़ों के बैठक में न आए।
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अनुपस्थिति पर होगी कार्रवाई: बैठक में किसी भी विभाग के प्रमुख की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा और बिना पूर्व सूचना के गैर-हाजिर रहने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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जमीनी रिपोर्ट पेश करें: कागजी आंकड़ों के बजाय धरातल पर हुए वास्तविक कार्यों की प्रगति रिपोर्ट (फोटोग्राफ्स सहित) पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनता को क्या हैं उम्मीदें?
बिजनौर एक कृषि प्रधान जिला है। यहां की एक बड़ी आबादी गन्ने की खेती और किसानी पर निर्भर है। ऐसे में बिजनौर और नगीना क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि इस दिशा बैठक के माध्यम से उनके रोजमर्रा के मुद्दों—जैसे खराब सड़कें, जलभराव की समस्या, बिजली कटौती, और सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं—का कोई ठोस समाधान निकलेगा।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का यह संयुक्त मंच जिले के रुके हुए विकास कार्यों को एक 'बूस्टर डोज' दे सकता है। अब सभी की निगाहें 18 अगस्त की सुबह 11 बजे विकास भवन पर टिकी हैं, जहां बिजनौर के कल को संवारने की रूपरेखा तय की जाएगी।


