खबरीलाल टीम
इतिहास गवाह है कि क्षत्रिय समाज ने हमेशा से राष्ट्र रक्षा और संस्कृति के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए और समाज को नई दिशा देने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार को बिजनौर जिले के धामपुर (Dhampur) में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया।

 

नगर के क्षत्रिय नगर स्थित 'क्षत्रिय भवन' में महाराणा प्रताप क्षत्रिय राजपूत सभा के तत्वावधान में वार्षिक कैलेंडर विमोचन समारोह आयोजित हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग, युवा और बुजुर्ग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस वर्ष का कैलेंडर मेवाड़ के महान शासक और महाराणा प्रताप के पुत्र महाराणा अमर सिंह (Maharana Amar Singh) के चित्र को समर्पित किया गया है, जो समाज के लिए स्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक हैं।READ ALSO:-Dhampur Breaking: बांग्लादेश की 'बर्बरता' पर धामपुर में 'विस्फोट'! दीपांकर शर्मा की हत्या से उबल पड़े रामभक्त; नगीना चौक पर धू-धू कर जला डॉ. यूनुस का पुतला

 

कार्यक्रम में न केवल कैलेंडर का विमोचन हुआ, बल्कि समाज को आधुनिक खेती (Modern Farming), उच्च शिक्षा (Higher Education) और संस्कारों (Values) से जोड़ने पर भी गंभीर मंथन किया गया।

 

14 साल पुरानी परंपरा: महापुरुषों को याद करने का अनूठा प्रयास

धामपुर की महाराणा प्रताप क्षत्रिय राजपूत सभा पिछले डेढ़ दशक से समाज को एकजुट करने का कार्य कर रही है। संगठन के नगराध्यक्ष यशवीर सिंह गीतम ने बताया कि यह लगातार 14वां वर्ष है जब संगठन ने वार्षिक कैलेंडर का प्रकाशन किया है।

 

  • उद्देश्य: उन्होंने बताया कि हर साल कैलेंडर पर समाज के एक अलग महापुरुष का चित्र प्रकाशित किया जाता है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के बलिदानों से परिचित कराना है।
  • महाराणा अमर सिंह ही क्यों? इस बार कैलेंडर पर महाराणा अमर सिंह का चित्र है। वक्ताओं ने याद दिलाया कि कैसे महाराणा प्रताप के बाद अमर सिंह ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा और मेवाड़ की आन-बान-शान को झुकने नहीं दिया। यह कैलेंडर साल भर हर घर में उस शौर्य की याद दिलाता रहेगा।

 

मुख्य अतिथि का मंत्र: "खेती से न मोड़ें मुंह, बनें 'एग्री-प्रेन्योर'"

समारोह के मुख्य अतिथि, उत्तराखंड राज्य औषधीय पादप बोर्ड (देहरादून) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. नृपेंद्र चौहान ने समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नया दृष्टिकोण पेश किया।

 

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "क्षत्रिय समाज का जुड़ाव हमेशा से जमीन और खेती से रहा है। लेकिन आज की युवा पीढ़ी खेती से दूर भाग रही है, जो चिंता का विषय है। हमें खेती छोड़नी नहीं है, बल्कि खेती करने का तरीका बदलना है।"

 

डॉ. चौहान के प्रमुख सुझाव:

  1. औषधीय खेती (Medicinal Farming): उन्होंने परंपरागत फसलों (गेहूं-गन्ना) के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती करने पर जोर दिया, जिसमें मुनाफा कई गुना ज्यादा है।
  2. तकनीक का प्रयोग: उन्होंने कहा कि बदलते दौर में आधुनिक तकनीकों (Modern Technology) का प्रयोग करें। ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस और जैविक खेती को अपनाकर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
  3. जड़ों से जुड़ाव: उन्होंने आह्रान किया कि समाज के लोग अपनी जड़ों को न भूलें और खेती को एक व्यवसाय (Business) की तरह देखें।

 

विशिष्ट अतिथियों का आह्वान: "शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी"

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एच.के. सिंह और मधी क्षेत्र क्षत्रिय राजपूत सभा (गाजियाबाद) के अध्यक्ष रामौतार सिंह ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया।

 

  • संगठित समाज, सशक्त समाज: डॉ. एच.के. सिंह ने कहा कि आज के दौर में बिखरना नहीं, बल्कि निखरना जरूरी है। समाज के लोगों को छोटे-मोटे मतभेद भुलाकर संगठित रहना होगा। एकता में ही शक्ति है।
  • शिक्षा और संस्कार: रामौतार सिंह ने शिक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा, "हमें अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बनाना है, उच्च शिक्षा दिलानी है। लेकिन इसके साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का पाठ पढ़ाना भी हमारी जिम्मेदारी है। बिना संस्कारों के शिक्षा अधूरी है।"

 

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को महापुरुषों की कहानियां सुनाएं और उन्हें समाज सेवा के लिए प्रेरित करें।

 

बाल कलाकारों ने बांधा समां: "चेतक की वीरता देख, दुश्मन भी घबराया"

गंभीर चर्चाओं के बीच, नन्हे-मुन्ने बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को देशभक्ति और जोश से भर दिया।

 

  • क्षत्रिय समाज के बाल कलाकार अथर्व गहलौत और अरनब चौहान ने मंच संभाला।
  • जब उन्होंने महाराणा प्रताप के शौर्य और उनके प्रिय घोड़े चेतक की वीरता पर आधारित गीत गाए, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
  • इन बच्चों की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया और यह साबित कर दिया कि समाज की नई पौध अपनी संस्कृति से जुड़ी हुई है।

 

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति (Who's Who)

कार्यक्रम का सफल और ओजस्वी संचालन रविंद्र राजपूत पप्पू ने किया। उन्होंने अपनी शेरो-शायरी और सटीक टिप्पणियों से कार्यक्रम में ऊर्जा बनाए रखी।
इस अवसर पर समाज के कई प्रतिष्ठित लोग मौजूद रहे, जिन्होंने कैलेंडर विमोचन में भाग लिया:

 

  • जयवीर सिंह सिसौदिया (जिलाध्यक्ष)
  • ठाकुर अभय कुमार सिंह
  • नरेश वत्स
  • डॉ. एन.पी. सिंह
  • हरिराज सिंह
  • मातृशक्ति: लक्ष्मी देवी, सुनीता चौहान, पूनम चौहान, बबीता।
  • युवा शक्ति: सुमित राजपूत, विवेक राजपूत, अभय प्रताप सिंह, दुष्यंत राणा।
  • अन्य गणमान्य: अजय कुमार, राकेश चौहान, निर्दोष कुमार, देवेंद्र सिंह, आनंद कुमार वत्स, अरविंद कुमार, संदीप गहलौत, सुधीर कुमार, अशोक कुमार, लोकेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, भूषण सिंह राणा, विजय चौधरी, डॉ. कमलेश कुमार, सुरेंद्रपाल सिंह, चमन सिंह, राजपाल सिंह, भूपाल सिंह, सुशील कुमार, सतीश चौहान।

 

एक नई शुरुआत

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। धामपुर में आयोजित यह समारोह केवल एक कैलेंडर विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाला एक 'मंथन शिविर' बन गया। खेती को आधुनिक बनाने और बच्चों को संस्कारवान बनाने का जो संकल्प यहाँ लिया गया, वह निश्चित रूप से क्षत्रिय समाज को प्रगति के पथ पर ले जाएगा।
 
रिपोर्टिंग: अनिल कुमार शर्मा, खबरीलाल विशेष संवाददाता स्थान: धामपुर, बिजनौर (यूपी) तारीख: 25 दिसंबर 2025
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