उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में युवाओं की नसों में 'सफेद जहर' घोलने वाले एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना कोतवाली शहर पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर छापेमारी करते हुए दो सगी बहनों को भारी मात्रा में स्मैक (Smack) और ड्रग्स बेचकर कमाई गई हजारों रुपये की नगदी के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से इलाके के नशा माफियाओं में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-महा-गिरावट: 5 दिन में औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव, चांदी ₹11,250 और सोना ₹2,106 टूटा; जानें क्या है पीएम मोदी की अपील का राज?
उत्तर प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस'
उत्तर प्रदेश को अपराध और नशामुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) विजन के तहत पुलिस प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में बिजनौर पुलिस ने समाज को खोखला कर रहे ड्रग माफियाओं पर करारा प्रहार किया है। अमूमन नशे के कारोबार में बड़े-बड़े माफियाओं का नाम सामने आता है, लेकिन बिजनौर पुलिस की इस ताजा कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि इस काले धंधे में अब महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं। पुलिस की गिरफ्त में आई दोनों सगी बहनें लंबे समय से स्मैक की पुड़िया बनाकर युवाओं तक पहुंचा रही थीं।
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— Bijnor Police (@bijnorpolice) June 7, 2026
थाना कोतवाली शहर पुलिस द्वारा 50.35 ग्राम स्मैक डली के रुप में व 61.19 ग्राम स्मैक की बिट/पुडिया मय कागज व कुल बरामद नगदी 88,950/- रुपये सहित 02 अभियुक्ताओं को गिरफ्तार किया गया ।#UPPolice pic.twitter.com/9Z19wYezjY
यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस पूरे सिंडिकेट पर एक बड़ी चोट है जो छोटे शहरों के मोहल्लों में बैठकर नशे का जाल बुन रहा था। 7 जून 2026 को बिजनौर की कोतवाली शहर पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई को जनपद में नशे के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
मुखबिर की सटीक सूचना और पुलिस का अचानक एक्शन
अपराध की दुनिया को खत्म करने के लिए पुलिस का सूचना तंत्र (Informer Network) सबसे मजबूत हथियार होता है। रविवार, 07 जून 2026 को थाना कोतवाली शहर पुलिस को अपने एक 'मुखबिर खास' (Special Informer) से यह गुप्त सूचना मिली कि शहर के मोहल्ला मिर्दगान में दो महिलाएं भारी मात्रा में स्मैक की खेप के साथ मौजूद हैं और उसे ग्राहकों को बेचने की फिराक में हैं।
चूंकि मामला महिला तस्करों से जुड़ा था और ड्रग्स जैसी संवेदनशील चीज की बरामदगी होनी थी, इसलिए पुलिस ने बिना समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम में महिला पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से शामिल किया गया। पूरी प्लानिंग के साथ पुलिस टीम ने मोहल्ला मिर्दगान बी-10 के पास जाल बिछाया और अचानक छापेमारी की। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के चलते महिला तस्करों को भागने या माल को छिपाने का जरा भी मौका नहीं मिला और वे रंगे हाथों धरी गईं।
कौन हैं ये तस्कर? (नशे के धंधे में उतरीं सगी बहनें)
पुलिस की पूछताछ और दस्तावेजों के अनुसार, गिरफ्तार की गई दोनों तस्कर सगी बहनें हैं। अक्सर यह देखा जाता है कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए ड्रग माफिया महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि महिलाओं पर आसानी से शक नहीं किया जाता।
गिरफ्तार अभियुक्ताओं का पूरा विवरण:
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रहनुमा उर्फ नूरी (पुत्री फरीद)
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तब्बसूम (पुत्री फरीद)
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निवासी: मौहल्ला मिर्दगान बी-10, थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर।
ये दोनों बहनें काफी समय से इस इलाके में सक्रिय थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुट गई है कि ये महिलाएं इतनी बड़ी मात्रा में स्मैक कहाँ से लाती थीं और इनके पीछे कौन सा बड़ा मास्टरमाइंड काम कर रहा है।
बरामदगी का पूरा गणित: लाखों की स्मैक और हजारों का कैश
छापेमारी के दौरान जब महिला पुलिसकर्मियों ने इन दोनों बहनों की तलाशी ली, तो उनके पास से जो माल बरामद हुआ, उसने पुलिस के भी कान खड़े कर दिए। बरामद की गई स्मैक को बेहद चालाकी से डली (Lump) और छोटी-छोटी पुड़ियों (Bits) में बांटकर रखा गया था ताकि उसे ग्राहकों (मुख्य रूप से युवाओं) को आसानी से बेचा जा सके।
पुलिस द्वारा की गई बरामदगी का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
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स्मैक (डली के रूप में): 50.35 ग्राम
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स्मैक (पुड़िया/बिट मय कागज): 61.19 ग्राम
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कुल मादक पदार्थ का वजन: 111.54 ग्राम
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अंतरराष्ट्रीय/बाजार में अनुमानित कीमत: लगभग ₹1.50 लाख (एक लाख पचास हजार रुपये)
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बरामद नगद धनराशि: ₹88,950/- (अट्ठासी हजार नौ सौ पचास रुपये)
पुलिस के अनुसार, यह 88,950 रुपये की बड़ी नगदी इन महिलाओं ने हाल ही में स्मैक की पुड़िया बेचकर इकट्ठी की थी। इतनी बड़ी मात्रा में कैश का मिलना इस बात का प्रमाण है कि इनका नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था और प्रतिदिन कितने युवाओं को यह जहर परोसा जा रहा था।
कानूनी शिकंजा: एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत सख्त एफआईआर
स्मैक, हेरोइन और कोकीन जैसे मादक पदार्थों की तस्करी करना भारतीय कानून के तहत एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। बिजनौर पुलिस ने इस मामले में कोई कोताही नहीं बरती है। दोनों गिरफ्तार बहनों (रहनुमा और तब्बसूम) के खिलाफ थाना कोतवाली शहर में सख्त धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है:
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मुकदमा अपराध संख्या (FIR No.): 435/2026
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लगाई गई धाराएं: 8/21 एनडीपीएस एक्ट (स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम - Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act)
क्या होता है NDPS एक्ट? एनडीपीएस एक्ट भारत में मादक पदार्थों के उत्पादन, निर्माण, खेती, कब्जे, बिक्री, खरीद, परिवहन और उपभोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है। धारा 21 विशेष रूप से निर्मित मादक पदार्थों (जैसे स्मैक/हेरोइन) के उल्लंघन से संबंधित है। बरामदगी की मात्रा के आधार पर इसमें 10 से 20 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस अब इन दोनों बहनों को अदालत में पेश कर जेल भेजने की अग्रिम विधिक कार्यवाही कर रही है।
महिला तस्करों का 'मोडस ऑपरेंडी' (काम करने का तरीका)
पुलिस सूत्रों और अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, महिला तस्करों का काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर होता है।
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लिंग का फायदा: अक्सर चेकिंग के दौरान पुलिस पुरुषों की गहन तलाशी लेती है, लेकिन महिलाओं को संदेह का लाभ मिल जाता है। इसी का फायदा उठाकर ये बहनें माल की डिलीवरी करती थीं।
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पुड़िया सिस्टम: बड़े माल को एक साथ बेचने के बजाय, ये लोग 1-1 ग्राम या उससे भी कम की छोटी 'पुड़िया' (कागज में लिपटी हुई) बनाते हैं। एक पुड़िया 500 से 1000 रुपये तक में बिकती है। इसे स्कूल/कॉलेज जाने वाले छात्रों और रिक्शा चालकों या मजदूरों को आसानी से बेच दिया जाता है।
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सुरक्षित ठिकाना: मोहल्ले के बीचों-बीच घनी आबादी में घर होने के कारण किसी बाहरी व्यक्ति का शक इन पर नहीं जाता था।
समाज के लिए एक चेतावनी: युवाओं को खोखला कर रहा है यह 'सफेद जहर'
स्मैक (जिसे ब्राउन शुगर या हेरोइन का अशुद्ध रूप भी कहा जाता है) आज के समय में समाज के लिए एक बड़ा नासूर बन चुका है। इसकी लत इतनी भयानक होती है कि युवा इसके लिए चोरी, डकैती और यहाँ तक कि हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से भी नहीं हिचकिचाते। बिजनौर पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी माता-पिता के लिए भी एक संदेश है कि वे अपने बच्चों की दिनचर्या और उनकी संगति पर कड़ी नजर रखें। पुलिस का मानना है कि जब तक मांग (Demand) खत्म नहीं होगी, तब तक आपूर्ति (Supply) को पूरी तरह से रोकना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
सफल धरपकड़ करने वाली जांबाज पुलिस टीम
इस पूरे ऑपरेशन को बिना किसी चूक के सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली थाना कोतवाली शहर की पुलिस टीम विशेष प्रशंसा की हकदार है। टीम के त्वरित एक्शन से ही अपराधियों को भागने का मौका नहीं मिला। इस टीम में निम्नलिखित पुलिस अधिकारी और जवान शामिल रहे:
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उ०नि० (Sub-Inspector) श्री अंकुर पाल
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म०उ०नि० (Lady Sub-Inspector) ममता
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कांस्टेबल (1198) संदीप
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कांस्टेबल (1084) मोहित
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कांस्टेबल (2070) मोहित
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महिला कांस्टेबल (471) करिश्मा
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महिला कांस्टेबल (1068) सरिता
बिजनौर जनपद में कोतवाली शहर पुलिस द्वारा 1.50 लाख रुपये की स्मैक और 88 हजार से अधिक की नगदी के साथ दो महिला तस्करों की गिरफ्तारी एक बड़ी उपलब्धि है। यह घटना दर्शाती है कि नशे का कारोबार अब केवल सुनसान इलाकों या अंधेरी गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिहायशी मोहल्लों और घरों के भीतर तक अपनी जड़ें जमा चुका है। पुलिस की यह सर्जिकल स्ट्राइक न केवल तस्करों की कमर तोड़ेगी, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों को भी बर्बाद होने से बचाएगी जिनके बच्चे अनजाने में इस नशे की दलदल में धंसते जा रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की आगे की रिमांड और पूछताछ में इस काले धंधे के और कौन-कौन से सफेदपोश चेहरे बेनकाब होते हैं।