बिजनौर: उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जांच और राजनीतिक रसूख का जब आमना-सामना होता है, तो कई बार हालात बेकाबू हो जाते हैं। बिजनौर जिले में ठीक ऐसा ही एक खौफनाक और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला, जब एक सरकारी जांच सीधे तौर पर सड़क छाप लड़ाई और वर्चस्व की जंग में तब्दील हो गई।Read also:-अप्रैल की शुरुआत में मौसम का तांडव: 11 राज्यों में तूफानी बारिश और 70 किमी/घंटे की आंधी का हाई अलर्ट, ईरान से उठे पश्चिमी विक्षोभ ने बिगाड़ा मिजाज
चांदपुर रोड पर स्थित एक आरा मशीन (Sawmill) की जांच के दौरान एक पूर्व सांसद और आरा मशीन के मालिकों (तालिब बंधुओं) के बीच जो खूनी संघर्ष और हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, उसने पुलिस और प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। इस घटना में न केवल सत्ता की हनक और गुंडागर्दी के आरोप लगे हैं, बल्कि एक सुरक्षाकर्मी (Gunner) से सरकारी हथियार छीनने की कोशिश जैसी संगीन वारदात भी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह कानून को ताक पर रखकर सरेआम धक्का-मुक्की और हाथापाई की जा रही है।

आइए, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या थी, एडीएम न्यायिक (ADM Judicial) के सामने यह बवाल कैसे भड़का, और पुलिस अब इस पूरे मामले में क्या कानूनी कार्रवाई कर रही है।
विवाद की शुरुआत: एडीएम (न्यायिक) की जांच और पूर्व सांसद की एंट्री
बिजनौर शहर से सटे चांदपुर रोड इलाके में तालिब बंधुओं की एक पुरानी और चर्चित आरा मशीन है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस आरा मशीन के संचालन, लाइसेंस और लकड़ियों के स्टॉक को लेकर लंबे समय से कुछ शिकायतें मिल रही थीं।
सरकारी जांच का घटनाक्रम: इसी मामले की हकीकत जानने और कानूनी दस्तावेजों की पड़ताल करने के लिए जिले के एडीएम न्यायिक (ADM Judicial) की टीम वन विभाग और स्थानीय पुलिस बल के साथ आरा मशीन पर पहुंची थी। यह एक पूर्ण रूप से सरकारी और प्रशासनिक कार्यवाही थी।
थाना कोतवाली शहर क्षेत्रान्तर्गत एक प्लाईवुड फैक्ट्री के निरीक्षण के दौरान पूर्व सांसद के साथ कुछ व्यक्तियों द्वारा कहासुनी/विवाद किये जाने की घटना में की जा रही पुलिस कार्यवाही के संबंध में पुलिस अधीक्षक,बिजनौर सर की बाइट । #UPPolice@dgpup@adgzonebareilly@digmoradabad pic.twitter.com/lNVqrQ94Zo
— Bijnor Police (@bijnorpolice) April 1, 2026
लेकिन इस जांच टीम के साथ ही मौके पर जिले के एक कद्दावर भाजपा नेता और पूर्व सांसद भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। एक प्रशासनिक जांच में किसी राजनेता की दखलअंदाजी ने आरा मशीन के मालिकों (तालिब बंधुओं) को खासा नाराज कर दिया।
कहासुनी से भड़की चिंगारी:
जैसे ही एडीएम न्यायिक की टीम ने जांच शुरू की, पूर्व सांसद और तालिब बंधुओं के बीच किसी बात को लेकर बहस छिड़ गई। तालिब बंधुओं का तर्क था कि जब प्रशासन अपना काम कर रहा है, तो इसमें किसी बाहरी व्यक्ति या राजनेता का क्या काम? इसी बात पर दोनों पक्षों में तनातनी शुरू हो गई और देखते ही देखते यह बहस एक तीखी नोकझोंक में बदल गई।
सड़क पर महासंग्राम: धक्का-मुक्की, हाथापाई और जान की बाजी
वायरल वीडियो और चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, यह नोकझोंक चंद मिनटों में ही हिंसक झड़प का रूप ले चुकी थी। दोनों पक्ष—पूर्व सांसद के समर्थक और आरा मशीन के कर्मचारी—आमने-सामने आ गए। गालियों की बौछार के बीच भारी धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई।
गाड़ी के आगे लेटने का ड्रामा: जब स्थिति बिगड़ने लगी और एडीएम सहित अन्य अधिकारियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो मामला और भड़क गया। अपनी आरा मशीन पर हो रही इस कार्रवाई और पूर्व सांसद के रवैये से आक्रोशित होकर तालिब बंधुओं में से एक व्यक्ति सीधे पूर्व सांसद के काफिले की गाड़ी के आगे आकर सड़क पर लेट गया। उसका मकसद गाड़ी को रोकना और अपना विरोध दर्ज कराना था। इस अप्रत्याशित कदम से वहां भारी अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों को उसे गाड़ी के आगे से जबरन हटाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सबसे संगीन आरोप: गनर से असलाह छीनने का प्रयास
इस पूरे बवाल का सबसे खौफनाक और दुस्साहसिक पहलू तब सामने आया, जब हाथापाई के दौरान एक बड़ा अपराध करने की कोशिश की गई। पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब पूर्व सांसद के सुरक्षाकर्मी (गनर) ने भीड़ को हटाने और अपने वीआईपी (VIP) को सुरक्षित निकालने की कोशिश की, तो तालिब बंधुओं और उनके साथियों ने कथित तौर पर गनर के साथ बदसलूकी की।
आरोप है कि इस दौरान भीड़ में से किसी ने गनर की सरकारी कार्बाइन (असलाह) छीनने का सीधा प्रयास किया। भारत के कानून (IPC/BNS) के तहत किसी भी ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी या सुरक्षा गार्ड से उसका सरकारी हथियार छीनना एक गैर-जमानती और बेहद गंभीर अपराध (डकैती और राजकार्य में बाधा की श्रेणी) माना जाता है। इस घटना से वहां मौजूद अधिकारियों के भी होश उड़ गए। किसी तरह भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और गनर को सुरक्षित करते हुए दोनों गुटों को अलग किया।
थाने पहुंचा विवाद: 'हम पर चाकू से जानलेवा हमला हुआ'
सड़क पर हुए इस भारी ड्रामे के बाद मामला शांत नहीं हुआ, बल्कि कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया। घटनास्थल से पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पूर्व सांसद का काफिला तो वहां से निकल गया, लेकिन तालिब बंधु सीधे अपने समर्थकों के साथ संबंधित थाने पहुंच गए।
कारोबारी पक्ष के गंभीर आरोप: थाने में पहुंचकर तालिब बंधुओं ने पुलिस को एक लिखित तहरीर दी है, जिसमें उन्होंने पूर्व सांसद और उनके गुर्गों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
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उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना व्यापार कर रहे थे, लेकिन जांच के नाम पर पूर्व सांसद ने वहां आकर गुंडागर्दी की।
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अपनी शिकायत में कारोबारी ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने सांसद के दखल का विरोध किया, तो उनके समर्थकों ने चाकू से उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें उन्हें चोटें भी आई हैं।
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उन्होंने प्रशासन पर भी एकतरफा कार्रवाई करने और रसूखदार लोगों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा (Police Investigation)
बिजनौर पुलिस के सामने अब एक दोहरी और बेहद संवेदनशील चुनौती खड़ी है। एक तरफ सत्ता पक्ष के एक पूर्व सांसद की प्रतिष्ठा और उनके गनर से असलाह छीनने जैसा संगीन मामला है, तो दूसरी तरफ एक व्यापारी पर सरेआम चाकू से हमले का आरोप है।
मामले में पुलिस का आधिकारिक रुख:
स्थानीय थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने 'खबरीलाल' को बताया कि स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रण में ले लिया गया है और शांति व्यवस्था कायम है।
"दोनों पक्षों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हमें कारोबारी पक्ष से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें चाकू से हमले की बात कही गई है। वहीं, गाड़ी के आगे लेटने और गनर से असलाह छीनने के प्रयास की घटना को भी पुलिस ने गंभीरता से लिया है।"
पुलिस वर्तमान में इन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है:
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वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच: घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए तमाम वीडियो को खंगाला जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि हमला पहले किसने किया और गनर की बंदूक पर हाथ किसने डाला।
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चश्मदीदों के बयान: एडीएम न्यायिक और वहां मौजूद वन विभाग की टीम के आधिकारिक बयान दर्ज किए जा रहे हैं, क्योंकि वे इस पूरी घटना के निष्पक्ष गवाह हैं।
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मेडिकल परीक्षण: जिन लोगों को चोटें आई हैं (विशेषकर जिन्होंने चाकू लगने का दावा किया है), उनका सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है ताकि चोट की प्रकृति का पता चल सके।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते यक्ष प्रश्न (Big Questions Raised)
बिजनौर के चांदपुर रोड पर घटी यह घटना केवल एक झड़प नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की कार्यप्रणाली पर कई गहरे सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब जनता जानना चाहती है:
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सवाल नंबर 1: जब एडीएम न्यायिक स्तर का एक वरिष्ठ अधिकारी किसी आरा मशीन की 'सरकारी जांच' के लिए गया था, तो वहां एक पूर्व सांसद और उनके समर्थकों का क्या काम था? क्या राजनेताओं के दबाव में प्रशासनिक जांचें की जा रही हैं?
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सवाल नंबर 2: अगर कारोबारी ने गनर से असलाह छीनने जैसा दुस्साहस किया, तो एडीएम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद मौके पर ही उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
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सवाल नंबर 3: क्या आरा मशीन के लाइसेंस और लकड़ियों के व्यापार में कोई ऐसा बड़ा 'आर्थिक खेल' (Syndicate) चल रहा है, जिसके कारण राजनेता और कारोबारी इस तरह खुलेआम सड़कों पर भिड़ रहे हैं?
कानून का राज या रसूख की धौंस?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य दावा 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance Policy) और 'कानून का राज' स्थापित करना है। लेकिन बिजनौर की यह घटना इस दावे की जमीनी हकीकत को आईना दिखाती है। दिनदहाड़े एक प्रशासनिक अधिकारी के सामने गाली-गलौज, हाथापाई, और सुरक्षाकर्मी का हथियार छीनने की कोशिश यह दर्शाती है कि लोगों में कानून का खौफ कम हो रहा है।
अब बिजनौर की जनता और व्यापारी वर्ग की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। पुलिस को यह साबित करना होगा कि कानून सबके लिए बराबर है—चाहे वह कोई रसूखदार पूर्व सांसद हो या फिर कोई दुस्साहसी आरा मशीन संचालक। वायरल वीडियो और गवाहों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में प्रशासनिक जांच के दौरान ऐसी गुंडागर्दी की पुनरावृत्ति न हो सके।
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