खबरीलाल टीम
बिजनौर (क्राइम और एक्सीडेंटल डेस्क): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। जिस गंगा मैया के तट पर लोग जीवन में शांति और पुण्य की आस लेकर जाते हैं, उसी गंगा की लहरों ने दो हंसते-खेलते परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। बिजनौर के मंडावर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंगा घाट पर नहाते समय दो किशोर गहरे पानी में डूब गए, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई।READ ALSO:-मेरठ में 'भरोसे का कत्ल': जिन नौकरों पर था घर का ऐतबार, वही रिश्तेदारों के साथ मिलकर कर रहे थे लाखों की चोरी; टीपीनगर पुलिस ने किया भंडाफोड़

 

इस हादसे का सबसे दुखद और विचलित कर देने वाला पहलू यह रहा कि जब ये दोनों किशोर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे, तब उनके बेबस परिजन नदी के किनारे खड़े होकर मदद के लिए चीख-पुकार मचा रहे थे। वे वहां मौजूद लोगों के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहे थे कि कोई उनके बच्चों को बचा ले, लेकिन पानी की गहराई और नदी के तेज बहाव को देखकर किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह उन्हें बचाने के लिए नदी में छलांग लगाए। आंखों के सामने अपने जिगर के टुकड़ों को डूबते देखने का जो दर्द उन परिजनों ने सहा है, उसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप उठती है।

 

क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जून महीने की भीषण गर्मी और तपिश से राहत पाने के लिए पीड़ित परिवार अपने बच्चों के साथ मंडावर क्षेत्र स्थित गंगा घाट पर स्नान करने के लिए पहुंचे थे। गंगा के इस घाट पर अक्सर आस-पास के गांवों और शहरों से लोग नहाने के लिए आते हैं।

 

बताया जा रहा है कि दोनों किशोर (जिनकी उम्र लगभग 14 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है) परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नदी के किनारे नहाने के लिए पानी में उतरे थे। शुरुआत में वे किनारे पर ही नहा रहे थे, लेकिन नहाते-नहाते वे अनजाने में उस जगह पहुंच गए जहां नदी की गहराई बहुत ज्यादा थी और पानी का बहाव भी काफी तेज था।

 

अचानक फिसला पैर और टूट गई सांसों की डोर: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नहाने के दौरान अचानक एक किशोर का पैर फिसला और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। पानी के तेज बहाव ने उसे अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया। अपने साथी को डूबता देख, दूसरे किशोर ने उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन पानी के शक्तिशाली भंवर और बहाव के आगे उसकी एक न चली। देखते ही देखते दोनों किशोर पानी के अंदर समाने लगे और अपनी जान बचाने के लिए हाथ-पैर मारने लगे।

 

आंखों के सामने उजड़ गई दुनिया: चीखते रहे बेबस माता-पिता

जब बच्चों को पानी में डूबते और छटपटाते हुए परिजनों ने देखा, तो उनके होश उड़ गए। किनारे पर खड़े माता-पिता और अन्य रिश्तेदार जोर-जोर से चीखने लगे। घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से मदद की गुहार लगाने लगे।

 

"बचाओ... कोई तो मेरे बच्चे को निकालो... वो डूब रहा है..." परिजनों की ये चीखें पूरे घाट पर गूंज रही थीं। उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों के पैर तक पकड़े कि शायद कोई गोताखोर या अच्छा तैराक नदी में कूदकर उनके बच्चों की जान बचा ले।

 

लेकिन गंगा नदी में उस समय पानी का स्तर और बहाव इतना खतरनाक था कि कोई भी अपनी जान जोखिम में डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। कुछ लोगों ने रस्सियां और कपड़े फेंककर किशोरों तक पहुंचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही मिनटों के भीतर दोनों किशोरों के सिर पानी के अंदर ओझल हो गए और गंगा की लहरें उन्हें अपने साथ बहा ले गईं। किनारे पर खड़े परिजनों की आंखों के सामने ही उनके घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए। परिजनों का रो-रोकर और बेसुध होकर बुरा हाल था।

 

स्थानीय पुलिस और गोताखोरों का रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की सूचना वहां मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम और स्थानीय मंडावर थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मंडावर पुलिस की टीम बिना समय गंवाए घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय गोताखोरों (Divers) और पीएसी (PAC) की बाढ़ राहत कंपनी को मौके पर बुला लिया।

 

घंटों चला सर्च ऑपरेशन: गोताखोरों की टीम ने मोटरबोट और रस्सियों की मदद से नदी के उस गहरे हिस्से में सर्च ऑपरेशन शुरू किया जहां किशोर डूबे थे। पानी का तेज बहाव रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधा डाल रहा था। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और नदी की गहराई को छान मारने के बाद, गोताखोरों को दोनों किशोरों के शव बरामद हुए। जब उनके शवों को पानी से बाहर निकालकर घाट पर रखा गया, तो वहां का दृश्य इतना हृदयविदारक था कि वहां मौजूद हर पुलिसकर्मी और ग्रामीण की आंखें नम हो गईं। माताओं की चीखें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।

 

प्रशासन की लापरवाही या जागरूकता की कमी?

यह कोई पहली बार नहीं है जब बिजनौर के गंगा घाटों पर इस तरह का जानलेवा हादसा हुआ है। हर साल गर्मियों के मौसम में और विशेषकर गंगा स्नान के पर्वों पर डूबने की ऐसी दर्दनाक खबरें सामने आती रहती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

 

  1. बैरिकेडिंग का अभाव (Lack of Barricading): गंगा के घाटों पर गहरे पानी वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए लाल झंडे या जंजीर (Chains) क्यों नहीं लगाई गई हैं?
  2. चेतावनी बोर्ड (Warning Boards): घाटों पर यह चेतावनी देने वाले स्पष्ट बोर्ड क्यों नहीं हैं कि "आगे गहरा पानी है, नहाना सख्त मना है"?
  3. जल पुलिस की अनुपस्थिति: ऐसे संवेदनशील घाटों पर जहां बड़ी संख्या में लोग नहाने आते हैं, वहां स्थायी रूप से 'जल पुलिस' या प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती क्यों नहीं की जाती?

 

दूसरी ओर, लोगों में भी जागरूकता की भारी कमी है। अक्सर युवा पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना स्टंट करने या तैरने के उत्साह में खतरनाक जगहों पर चले जाते हैं, जिसका खामियाजा उनके पूरे परिवार को उम्र भर के आंसुओं के रूप में चुकाना पड़ता है।

 

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, गांव में पसरा मातम

मंडावर पुलिस ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए पंचनामा भरकर दोनों किशोरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए बिजनौर जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद दुखद दुर्घटना है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

 

जैसे ही इस हादसे की खबर किशोरों के गांव और मोहल्ले में पहुंची, तो वहां मातम पसर गया। घरों में चूल्हे तक नहीं जले। जो किशोर सुबह हंसते-खेलते घर से निकले थे, उनकी मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

 

पुलिस की आम जनता से अपील (Safety Appeal)

बिजनौर पुलिस और जिला प्रशासन ने इस दर्दनाक हादसे के बाद आम जनता से एक सख्त अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि नदियों और नहरों में नहाने जाते समय विशेष सावधानी बरतें। बच्चों को किसी भी कीमत पर गहरे पानी की ओर न जाने दें और जिन घाटों पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं, वहां बिल्कुल भी स्नान न करें। पानी के साथ खिलवाड़ आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।

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