खबरीलाल टीम
रिपोर्ट: क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन डेस्क, शकील अहमद ब्यूरो चीफ बिजनौर (उत्तर प्रदेश) दिनांक: 23 दिसंबर 2025
 
बिजनौर: उत्तर प्रदेश में सरकारी मशीनरी में दीमक की तरह लगे भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति एक बार फिर एक्शन में दिखाई दी है। बिजनौर जिले में एंटी करप्शन टीम (Anti-Corruption Team) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सदर तहसील में तैनात एक लेखपाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।READ ALSO:-खाकी पर गहरा दाग: बिजनौर में 4 जिंदगियां निगलने वाले 'खूनी डंपर' को पुलिस ने ही छिपाया, CCTV ने उधेड़ी वर्दी वालों की पोल

 

आरोपी लेखपाल का नाम रविंद्र शर्मा बताया जा रहा है, जो मात्र 5,000 रुपये की रिश्वत के लिए अपनी नौकरी और इज्जत दोनों दांव पर लगा बैठा। एंटी करप्शन टीम की इस छापेमारी से पूरी तहसील में हड़कंप मच गया। दिनदहाड़े हुई इस कार्रवाई को देख अन्य कर्मचारियों और दलालों के पसीने छूट गए। टीम आरोपी को गिरफ्तार कर सीधा शहर कोतवाली लेकर पहुंची, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

क्या है पूरा मामला? (घटनाक्रम)

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सदर तहसील में तैनात लेखपाल रविंद्र शर्मा के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से शिकायतें मिल रही थीं। एक पीड़ित (शिकायतकर्ता) ने एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचित किया था कि लेखपाल उससे काम के बदले में अवैध रूप से पैसों की मांग कर रहा है। पीड़ित ने बताया कि वह बार-बार तहसील के चक्कर काट रहा था, लेकिन लेखपाल बिना 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) लिए फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं था।

 

तंग आकर पीड़ित ने फैसला किया कि वह घूसखोरी के सामने झुकेगा नहीं, बल्कि कानून का सहारा लेगा। उसने एंटी करप्शन विभाग (मुरादाबाद/बरेली यूनिट) से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई। शिकायत की पुष्टि करने के बाद, एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक 'जाल' (Trap) बिछाया।

 

ऐसे बुना गया गिरफ्तारी का जाल: नोटों पर लगा था केमिकल

मंगलवार को योजना के मुताबिक, एंटी करप्शन टीम सादे कपड़ों में तहसील परिसर के आसपास तैनात हो गई। टीम ने शिकायतकर्ता को केमिकल (फिनोल्फ्थलीन पाउडर) लगे हुए 5000 रुपये के नोट दिए और उसे लेखपाल के पास भेजा।

 

जैसे ही लेखपाल रविंद्र शर्मा ने पीड़ित से वह 5000 रुपये हाथ में लिए, तभी वहां पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने इशारा मिलते ही धावा बोल दिया। टीम ने लेखपाल को मौके पर ही दबोच लिया। जब लेखपाल के हाथों को पानी से धुलवाया गया, तो केमिकल के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का पक्का सबूत था कि उसने रिश्वत के नोटों को हाथ लगाया था। सबूत सामने आते ही लेखपाल के होश फाख्ता हो गए और वह टीम के सामने गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी।

 

तहसील में मचा हड़कंप, भाग खड़े हुए दलाल

सदर तहसील, जो बिजनौर का एक व्यस्त प्रशासनिक केंद्र है, वहां अचानक हुई इस कार्रवाई से अफरातफरी मच गई। जैसे ही एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल को पकड़ा, वहां मौजूद वकीलों, अन्य लेखपालों और फरियादियों की भीड़ जमा हो गई।

 

चश्मदीदों के मुताबिक, कार्रवाई इतनी तेज थी कि लेखपाल को संभलने का मौका ही नहीं मिला। एंटी करप्शन टीम उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर सायरन बजाते हुए थाना शहर कोतवाली ले गई। खबर फैलते ही तहसील परिसर में सक्रिय रहने वाले दलाल और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त अन्य कर्मचारी मौके से खिसकते नजर आए।

 

लेखपाल रविंद्र शर्मा: रक्षक ही बना भक्षक
रविंद्र शर्मा बिजनौर सदर तहसील में तैनात था। लेखपाल (पटवारी) का पद ग्रामीण राजस्व व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जमीन की पैमाइश, आय-जाति प्रमाण पत्र की रिपोर्ट, वरासत दर्ज करना और आपदा राहत जैसे कार्यों के लिए आम जनता पूरी तरह लेखपाल पर निर्भर होती है।

 

आरोप है कि रविंद्र शर्मा इसी मजबूरी का फायदा उठा रहा था। 5000 रुपये की यह रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी, इसका खुलासा अभी आधिकारिक रूप से एफआईआर की कॉपी आने के बाद ही होगा, लेकिन अमूमन ऐसे मामलों में जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) या पैमाइश के नाम पर ही धनउगाही की जाती है।

 

कोतवाली में पूछताछ: अब होगी जेल

गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी लेखपाल को लेकर बिजनौर शहर कोतवाली पहुंची। वहां उससे घंटों पूछताछ की गई। एंटी करप्शन टीम की तहरीर पर लेखपाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं (धारा 7 और 13) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

 

कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस अपराध में जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है और दोषी पाए जाने पर लंबी जेल की सजा और नौकरी से बर्खास्तगी तय है। अब लेखपाल को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से उसे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजा जाएगा।

 

भ्रष्टाचार पर यूपी सरकार का 'प्रहार'

यह घटना कोई अकेली नहीं है। पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में कई जिलों में लेखपाल, कानूनगो और पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है।

 

एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि:

"कोई भी सरकारी कर्मचारी यदि काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो जनता डरे नहीं। सीधे हमारे हेल्पलाइन नंबर या ऑफिस में संपर्क करें। हम नाम गोपनीय रखेंगे और भ्रष्टाचारी को सलाखों के पीछे भेजेंगे।"

 

आम जनता के लिए सबक और सलाह

बिजनौर की यह घटना आम जनता के लिए एक संदेश भी है। अक्सर लोग काम जल्दी कराने के चक्कर में रिश्वत देने को तैयार हो जाते हैं, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों का मनोबल बढ़ता है।
अगर आपसे कोई रिश्वत मांगे तो क्या करें?

 

  1. पैसे न दें: सबसे पहले रिश्वत देने से मना करें।
  2. रिकॉर्डिंग करें: अगर संभव हो तो बातचीत की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग कर लें।
  3. संपर्क करें: उत्तर प्रदेश एंटी करप्शन ब्यूरो या विजीलेंस डिपार्टमेंट से संपर्क करें। आप 1064 (एंटी करप्शन हेल्पलाइन) पर कॉल कर सकते हैं।

 

तहसील प्रशासन में सन्नाटा, जांच के आदेश संभव

रविंद्र शर्मा की गिरफ्तारी के बाद बिजनौर सदर तहसील के अन्य कर्मचारियों में खौफ का माहौल है। एसडीएम (SDM) और तहसीलदार स्तर पर भी इस घटना से हड़कंप है। माना जा रहा है कि जिला अधिकारी (DM) बिजनौर जल्द ही रविंद्र शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) करने का आदेश जारी करेंगे और उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी बैठाएंगे।

 

कानून के हाथ लंबे हैं

5000 रुपये की चंद रकम ने एक सरकारी कर्मचारी का पूरा करियर बर्बाद कर दिया। लेखपाल रविंद्र शर्मा अब हवालात की हवा खा रहे हैं। यह कार्रवाई उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी कुर्सी की ताकत का इस्तेमाल आम जनता को लूटने के लिए करते हैं। बिजनौर एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई की स्थानीय लोग सराहना कर रहे हैं।
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