खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिजनौर जेल में बंदी की मौत के बाद दूसरे दिन भी इलाके में तनाव का माहौल है। रविवार को बिजनौर जिला कारागार (District Jail Bijnor) में 30 वर्षीय बंदी दीपक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में एक पेड़ से लटका मिला। जैसे ही यह खबर मृतक के परिजनों और ग्रामीणों तक पहुंची, उन्होंने जेल प्रशासन पर हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए भारी हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर शहर के प्रमुख चौराहों तक लोगों का भारी जमावड़ा और पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक देखने को मिली है। इस घटना ने एक बार फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों के अधिकारों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-मेरठ: 'जनविश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत', SP सिटी के दफ्तर में लगी फरियादियों की कतार; हर शिकायत पर 'ऑन द स्पॉट' एक्शन के निर्देश

 

संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव: आखिर कैसे हुई बिजनौर जेल में बंदी की मौत?

जानकारी के अनुसार, मृतक दीपक (पुत्र चंद्रपाल) बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर उर्फ आदोपुर का निवासी था। पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक दीपक शहर कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर था और उस पर लूट व डकैती के प्रयास के कई मुकदमे दर्ज थे। 18 फरवरी 2025 से वह एक लूट के मामले में बिजनौर जेल में निरुद्ध था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहा था और जेल अस्पताल में भर्ती था।

 

रविवार की दोपहर अचानक उसका शव जेल अस्पताल के ठीक पीछे एक आम के पेड़ से रस्सी के फंदे पर लटका मिला। जेल प्रशासन ने दावा किया कि दीपक ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। आनन-फानन में शव को नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

 

पोस्टमार्टम हाउस पर भारी बवाल और पुलिस से धक्का-मुक्की

दीपक की मौत की सूचना जैसे ही उसके गांव आदोपुर पहुंची, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और आक्रोशित परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। वहां उन्होंने जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों की मांग थी कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। इसी दौरान भीड़ ने शव को पोस्टमार्टम हाउस से बाहर निकालने की कोशिश की, जिसे लेकर पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि कई थानों की फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा।

 

सड़क पर लेटी महिलाएं, डीआईजी की गाड़ी को घेरा

हंगामा केवल पोस्टमार्टम हाउस तक ही सीमित नहीं रहा। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शहर के जजी चौक (Jaji Chowk) पर पहुंचकर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे डीआईजी बरेली (DIG Bareilly) अजय साहनी की गाड़ी को प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया। मृतक के परिवार की महिलाएं न्याय की गुहार लगाते हुए डीआईजी की गाड़ी के सामने सड़क पर लेट गईं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए। [

 

जमानत मंजूर होने के बाद क्यों करेगा आत्महत्या?

परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस व्यक्ति की जमानत मंजूर हो चुकी थी और जिसे अगले दिन जेल से बाहर आना था, वह आत्महत्या क्यों करेगा? मृतक दीपक के ताऊ और रिटायर्ड इंस्पेक्टर दिलेराम सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जेल के अंदर इतनी कड़ी सुरक्षा और तलाशी के बावजूद रस्सी कैसे पहुंच गई, जिससे फंदा बनाया गया?

 

वहीं मृतक के जीजा प्रमोद कुमार ने मीडिया को बताया कि एक दिन पहले ही उन्होंने दीपक से जेल में मुलाकात की थी और उसे बताया था कि उसकी जमानत हो गई है। प्रमोद के अनुसार, "जब भी हम दीपक से मिलने जाते थे, वह अक्सर जेल के अंदर कुछ लड़कों का नाम बताता था जो उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करते थे। हमने इसकी शिकायत जेल प्रशासन से भी की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।" परिजनों ने मांग की है कि घटना से 10 घंटे पहले और 10 घंटे बाद की सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) उन्हें दिखाई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों व कैदियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। 

 

प्रशासन का स्पष्टीकरण और जेल कर्मचारियों पर कार्रवाई

हालात को काबू करने के लिए एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, सीओ सिटी संग्राम सिंह और शहर कोतवाल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर डटे हुए हैं। बाद में एसडीएम सदर रितु रानी ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया।

 

एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि, "जेल से आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद मजिस्ट्रेट, पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है और सभी अहम साक्ष्य जुटा लिए गए हैं। पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा और वीडियोग्राफी के साथ कराया जाएगा।" पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। उधर, यह भी खबर सामने आ रही है कि लापरवाही बरतने वाले जेल कर्मचारियों के निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 

 

बिजनौर जेल में बंदी की मौत का यह मामला अब एक गंभीर तूल पकड़ चुका है। एक तरफ पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, तो दूसरी तरफ परिजनों के पास हत्या का आरोप लगाने के ठोस कारण हैं। मृतक की जमानत का मंजूर होना और जेल के अंदर रस्सी मिलने जैसे सवाल पुलिस की थ्योरी को कमजोर कर रहे हैं। फिलहाल, सोमवार को भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज की जांच पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाता है या नहीं।

 

बिजनौर जिला जेल में 30 वर्षीय कैदी दीपक की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए भारी हंगामा किया है। दीपक का शव जेल परिसर में पेड़ से लटका मिला था। परिजनों का कहना है कि दीपक की जमानत मंजूर हो चुकी थी और जेल के अंदर कुछ कैदी उसे प्रताड़ित कर रहे थे। पुलिस और ग्रामीणों के बीच भारी नोकझोंक हुई और डीआईजी की गाड़ी भी रोकी गई। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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