उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में प्रकृति का एक भयावह रूप देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है और उफान पर बह रही है। इस जलप्रलय के कारण बिजनौर के चांदपुर और खादर इलाकों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पानी खेत-खलियानों से लेकर सीधे लोगों के घरों तक में दाखिल हो चुका है।READ ALSO:-बिजनौर में बाढ़ का भीषण कहर: स्टेट हाईवे पर बह रहा गंगा का उफनता पानी, पुलिस चौकी डूबी; 12 गांवों का तहसील मुख्यालय से कटा संपर्क
स्टेट हाईवे तक पहुंचा बाढ़ का पानी और पुलिस चौकी जलमग्न
पहाड़ों से आ रहे पानी के सैलाब के चलते बिजनौर के चांदपुर के खादर इलाके में बाढ़ का पानी सीधे स्टेट हाईवे तक पहुंच गया है। हाईवे पर पानी भरने के कारण यातायात और आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इस आपदा का सबसे बड़ा असर कानून व्यवस्था के केंद्रों पर भी पड़ा है। चांदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में स्थिति तब और भयावह हो गई जब पांडवनगर पुलिस चौकी के अंदर भी बाढ़ का पानी घुस गया। पानी भरने के बाद इस पुलिस चौकी को तत्काल प्रभाव से खाली कराना पड़ा है। इस पुलिस चौकी के आसपास करीब 3 से 4 फीट पानी जमा हो गया है, जिसके कारण वहां भारी जलभराव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। कई फीट पानी भरने से चारों तरफ चीखपुकार और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले 11 दिनों से 12 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
बिजनौर के खादर क्षेत्र में स्थिति पिछले कई दिनों से बेहद डरावनी बनी हुई है। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर के खादर क्षेत्र में पिछले 11 दिनों से लगातार 12 गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जलीलपुर-फैलपुर मार्ग पर भी बाढ़ का पानी पूरी तरह से पहुंच चुका है। गंगा खादर क्षेत्र में जिन लोगों ने अपने डेरे या कच्चे-पक्के आशियाने बना रखे हैं, उनके घर अब चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। हालात यह हो गए हैं कि पानी से घिरे ये घर अब दूर से छोटे-छोटे 'टापू' जैसे नजर आने लगे हैं। कई गांवों में स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को कमर तक पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, इस आफत की बारिश और बाढ़ के कारण किसानों की लहलहाती फसलें भी पूरी तरह से चौपट हो चुकी हैं, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
आधा दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से टूटा संपर्क
इस भीषण बाढ़ और जलभराव के चलते ग्रामीण इलाकों का शहरी केंद्रों से संपर्क टूट गया है। थाना चांदपुर के दत्तियाना इलाके समेत कई प्रमुख गांवों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। बाढ़ की चपेट में आने वाले प्रमुख गांवों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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जलालपुर खादर गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है।
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मीरापुर सीकरी गांव का संपर्क भी बाधित हो गया है।
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रायपुर खादर इलाके में भी भारी पानी भर गया है।
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सलेमपुर गांव के रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं।
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दत्तियाना इलाका थाना चांदपुर के अंतर्गत बुरी तरह प्रभावित है।
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जमालुद्दीनपुर गांव में भी पानी का भयंकर प्रकोप है।
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फैजीपुर समेत कई अन्य गांव भी बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
इन सभी गांवों का सीधा संपर्क तहसील मुख्यालय और शहर से पूरी तरह से टूट चुका है। इन प्रभावित और जलमग्न रास्तों पर सामान्य वाहनों का चलना पूरी तरह असंभव हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए आवागमन का एकमात्र प्रमुख साधन फिलहाल केवल 'ट्रैक्टर-ट्रॉली' ही बचा है। संपर्क टूटने और रास्तों के बंद होने के कारण ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों और मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तुओं को जुटाने के लिए भी भारी मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन हुआ सक्रिय: चार राहत चौकियां और मोटरबोट तैनात
इस विकट परिस्थिति से निपटने और राहत कार्यों को तेज करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
एसडीएम प्रशांत वर्मा ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए कुल चार बाढ़ राहत चौकियों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है:
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खानपुर खादर में राहत चौकी स्थापित की गई है।
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बलिया नंगली क्षेत्र में भी चौकी बनाई गई है।
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पाडला में राहत चौकी को सक्रिय किया गया है।
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बसंतपुर में भी बाढ़ राहत चौकी बनाई गई है।
इन सभी चार चौकियों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार तुरंत राहत सामग्री व मदद पहुंचाई जा रही है। इसके साथ ही, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य अफसर मोटर बोट के सहारे लगातार बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं और जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं।
बचाव कार्य के लिए विशेष मोटरबोट्स की व्यवस्था
बाढ़ के पानी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। एसडीएम प्रशांत वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल तीन मोटरबोट की विशेष व्यवस्था की गई है। इन मोटरबोट्स में दो छोटी तीन-सीटर मोटरबोट शामिल हैं तथा एक बड़ी 25-सीटर क्षमता वाली मोटरबोट भी तैनात की गई है।
@Shakeel57767846 बिजनौर के चांदपुर और दत्तियाना इलाके में गंगा नदी की बाढ़ से हाहाकार। स्टेट हाईवे और पांडवनगर पुलिस चौकी डूबी, 12 गांवों का तहसील से संपर्क कटा। प्रशासन ने संभाला मोर्चा। pic.twitter.com/lHtf5HVWQl
— MK Vashisth (@vadhisth) August 9, 2026
प्रशासन का कहना है कि गंगा नदी के जलस्तर और बाढ़ की बदलती स्थिति पर पल-पल की नजर रखी जा रही है। यदि आने वाले समय में पानी का स्तर और अधिक बढ़ता है या किसी गांव में लोग पूरी तरह से घिर जाते हैं, तो इन मोटरबोटों का इस्तेमाल करके ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम तेजी से किया जाएगा। प्रशासन की इन तैयारियों से प्रभावित इलाकों के लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी ने आम जनजीवन को पूरी तरह से थाम दिया है।


