खबरीलाल टीम
मेरठ (एजुकेशन डेस्क - खबरीलाल विशेष): दुनिया भर में जिस तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए अब स्कूली शिक्षा में भी बड़े बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी कड़ी में, मेरठ को शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दिखाने के उद्देश्य से आर्मी पब्लिक स्कूल (APS), मेरठ कैंट ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक पहल की।
 
​विद्यालय प्रांगण में 'कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' विषय पर एक भव्य जिला स्तरीय विचार-विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य एजेंडा केवल तकनीक पर बात करना नहीं था, बल्कि शिक्षकों को उस 'जादुई छड़ी' से लैस करना था, जिससे वे कक्षा में बैठे हर एक बच्चे को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।

​क्या है 'कम्प्यूटेशनल थिंकिंग' और क्यों है इसकी जरूरत?

​अक्सर अभिभावकों के मन में सवाल उठता है कि छोटे बच्चों को अभी से AI या कम्प्यूटेशनल थिंकिंग क्यों पढ़ाई जाए? कार्यशाला में इस मिथक को तोड़ा गया।
 
​विशेषज्ञों ने बताया कि 'कम्प्यूटेशनल थिंकिंग' का मतलब बच्चों को कोडिंग मशीन बनाना नहीं है, बल्कि यह एक सोचने का तरीका (Thought Process) है। इसके जरिए बच्चे किसी भी बड़ी और जटिल समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर उसका तार्किक समाधान (Logical Solution) निकालना सीखते हैं। वहीं, 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के व्यावहारिक समावेशन से बच्चे न केवल तकनीक का सही और जिम्मेदार उपयोग सीखते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) भी कई गुना बढ़ जाती है।

​दिग्गज शिक्षाविदों का जमावड़ा: "बदलते वक्त के साथ बदलना जरूरी"

​इस जिला स्तरीय महा-कार्यशाला में सीबीएसई (CBSE) और उच्च शिक्षा से जुड़े कई दिग्गज शिक्षाविदों ने शिरकत की।
 
  • मुख्य अतिथि का संबोधन: कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री सुधांशु शेखर (CBSE जिला समन्वयक एवं प्रधानाचार्य, के.एल. इंटरनेशनल स्कूल, मेरठ) उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों के साथ सीधा संवाद करते हुए कहा कि, "हम आज के बच्चों को उन नौकरियों के लिए तैयार कर रहे हैं, जो शायद अभी अस्तित्व में ही नहीं हैं। ऐसे में तेजी से बदलते शैक्षिक और तकनीकी परिवेश में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग ही वह हथियार है, जो छात्रों को हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगा।"
  • अतिथि वक्ता व निर्णायक मंडल: इस कार्यक्रम में श्री नवीन शर्मा (प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं विषय विशेषज्ञ), श्री संदीप कुमार गुप्ता (BIMT कॉलेज, मेरठ) और सुश्री प्रीति मल्होत्रा (प्रधानाचार्य, द आर्यन्स) ने अतिथि वक्ता और निर्णायक के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई।
  • विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति: कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए डॉ. आरिफ मोहम्मद सत्तार (एसोसिएट प्रोफेसर, दीवान वी.एस. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) और सुश्री संगीता कश्यप (प्रधानाचार्य, राधा गोविंद पब्लिक स्कूल) भी मौजूद रहे।
पैनल में शामिल सभी विशिष्ट वक्ताओं ने एक सुर में इस बात पर बल दिया कि AI को एक अलग और बोझिल विषय के रूप में पढ़ाने के बजाय, इसे गणित, विज्ञान और भाषाओं जैसे नियमित विषयों में आयु-उपयुक्त (Age-appropriate) तरीकों से शामिल किया जाना चाहिए।
 

​11 स्कूलों के बीच कड़ी टक्कर, नवाचार (Innovation) का हुआ प्रदर्शन

​कार्यशाला का सबसे रोमांचक हिस्सा वह रहा, जब मेरठ जिले के 11 प्रतिष्ठित विद्यालयों के शिक्षकों ने अपने 'केस पेपर' (Case Papers) और कक्षा में किए जा रहे नए प्रयोगों (Innovative Educational Practices) का प्रेजेंटेशन दिया।
 
​इस दौरान 40 से अधिक शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने दिखाया कि कैसे वे खेल-खेल में और साधारण तरीकों से बच्चों को AI और लॉजिकल थिंकिंग सिखा रहे हैं। इन प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि मेरठ के शिक्षक अब पारम्परिक चॉक-डस्टर की पढ़ाई से आगे बढ़कर ग्लोबल स्तर की शिक्षा देने के लिए तैयार हैं।
 

निर्णायक मंडल द्वारा विजेताओं की घोषणा:

सभी प्रस्तुतियों के गहन मूल्यांकन के बाद, निर्णायक मंडल ने सबसे उत्कृष्ट, व्यावहारिक और रचनात्मक केस पेपर का चयन किया। विजेताओं की सूची इस प्रकार रही:
 
  1. प्रथम स्थान: आर्मी पब्लिक स्कूल (APS), मेरठ कैंट
  2. द्वितीय स्थान: इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल
  3. ​ तृतीय स्थान: राधा गोविंद पब्लिक स्कूल

सफल आयोजन के पीछे कुशल नेतृत्व

​इस पूरी जिला स्तरीय पहल को धरातल पर उतारने का श्रेय डॉ. (श्रीमती) रीता गुप्ता, प्रधानाचार्य, आर्मी पब्लिक स्कूल (मेरठ कैंट) के कुशल नेतृत्व को जाता है। उन्होंने अपने संबोधन में प्रतिभागी शिक्षकों में जोश भरते हुए कहा,
 
"मुख्यधारा की शिक्षा में तकनीक का एकीकरण अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी आवश्यकता है। हमें शिक्षकों को सशक्त बनाना होगा ताकि वे अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) के माध्यम से छात्रों के भविष्य को संवार सकें।"
 
​इस महा-आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या सुश्री शृष्टि स्नेहा राय, कार्यक्रम प्रभारी सुश्री युक्ति, सुश्री प्रेरणा शर्मा और श्री नितिन शुक्ला का बेहद अहम और सराहनीय सहयोग रहा। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी और ऊर्जावान संचालन सुश्री पायल अबरोल द्वारा किया गया, जिन्होंने दर्शकों और श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।
 

​एक नए युग की शुरुआत

​आर्मी पब्लिक स्कूल, मेरठ कैंट में आयोजित यह कार्यशाला महज एक इवेंट नहीं, बल्कि मेरठ के शैक्षिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस कार्यक्रम ने शिक्षकों के लिए श्रेष्ठ प्रथाओं (Best Practices) के आदान-प्रदान का एक मजबूत मंच तैयार किया है। इससे यह साफ संदेश जाता है कि शिक्षकों को आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल से लैस किए बिना हम 21वीं सदी के स्मार्ट भारत की कल्पना नहीं कर सकते।
 
​आने वाले समय में, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही वह धुरी होंगे जिस पर हमारी समकालीन स्कूली शिक्षा का पूरा ढांचा घूमेगा।
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