शामली (उत्तर प्रदेश):
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शामली जिला बुधवार की शाम उस वक्त गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा, जब मशहूर हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की सरेआम और बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई। जिम से वर्कआउट करके बाहर निकलते ही घात लगाए बैठे चार अज्ञात हमलावरों ने अंकित पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। यह हत्याकांड इतना खौफनाक था कि बदमाशों ने सिंगर को संभलने का एक मौका तक नहीं दिया। मौके से पुलिस को 20 से ज्यादा खाली खोखे (कारतूस के खोल) बरामद हुए हैं। इस दुस्साहसिक वारदात ने न सिर्फ पश्चिमी यूपी बल्कि पूरे हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के संगीत जगत को हिला कर रख दिया है।
आखिरी वीडियो का वो खौफनाक सच: 'मर्डर मार दे सड़क के ऊपर'
अंकित बालियान की हत्या से जुड़ी एक ऐसी बात सामने आई है, जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। अंकित अक्सर अपने गानों में 'गन कल्चर' (हथियारों की संस्कृति) और गैंगस्टर्स की जीवनशैली को महिमामंडित करते थे। यह एक बेहद डरावना संयोग है कि हत्या से महज कुछ घंटे पहले ही अंकित ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील (वीडियो) पोस्ट की थी। इस वीडियो में वो जो गाना गा रहे थे, उसके बोल थे- "मर्डर मार दे सड़क के ऊपर..."
किसे पता था कि उनके द्वारा गाए गए ये बोल चंद घंटों बाद उन्हीं की जिंदगी का खौफनाक सच बन जाएंगे। शामली की एक भीड़भाड़ वाली सड़क पर बिल्कुल उसी तर्ज पर उनका मर्डर कर दिया गया, जिसका जिक्र वे अपने आखिरी वीडियो में कर रहे थे। अंकित मूल रूप से शामली के बंतीखेड़ा गांव के रहने वाले थे, लेकिन अपने संगीत करियर और अन्य कामकाज के सिलसिले में वह हरियाणा के सोनीपत में निवास करते थे।

भोलू शाहपुरिया ने ली हत्या की जिम्मेदारी: क्या है गैंगवार का एंगल?
इस हत्याकांड में एक बड़ा और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले एक कुख्यात बदमाश भोलू शाहपुरिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हत्या की जिम्मेदारी ले ली। भोलू शाहपुरिया का नाम सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भोलू शाहपुरिया और अंकित बालियान के बीच ऐसी क्या दुश्मनी थी, जिसका अंजाम इतना भयानक हुआ? क्या यह हथियारों के महिमामंडन से जुड़ी किसी वर्चस्व की जंग का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई गहरी व्यक्तिगत या जमीनी रंजिश है? सोनीपत से शामली तक तार कैसे जुड़े, पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। फिलहाल पुलिस की कई टीमें भोलू शाहपुरिया और उन चार अज्ञात शूटरों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
मां की चीखें और 5 घंटे तक सड़क पर बवाल
अंकित बालियान की सरेआम हत्या की खबर जैसे ही उनके गांव बंतीखेड़ा और आसपास के इलाकों में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और परिजन घटनास्थल पर जमा हो गए। सबसे ज्यादा हृदयविदारक दृश्य वह था जब अंकित की बुजुर्ग मां अपने जवान बेटे के खून से लथपथ शव को गोद में रखकर बीच सड़क पर विलाप कर रही थी। मां की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
गुस्साए परिजनों और स्थानीय जाट समुदाय के लोगों ने हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर शव को सड़क पर रख दिया और भयंकर जाम लगा दिया। करीब 5 घंटे तक शामली की सड़कों पर भारी बवाल और प्रदर्शन चलता रहा। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और भारी मशक्कत के बाद परिजनों को न्याय का आश्वासन देकर शांत कराया। इसके बाद ही पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज सकी।
अखिलेश यादव का योगी सरकार पर सीधा और तीखा प्रहार
इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भी भूचाल ला दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव ने लिखा- "उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को शून्य करते हुए जिस प्रकार शामली में लोकप्रिय गायक अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर बेरहमी से हत्या की गई है, उससे पूरे क्षेत्र में भय व्याप्त हो गया है। मृतक की दुखी मां के द्वारा अपने बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर ही शोकाकुल होने का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है।"
अखिलेश ने आगे जाट समुदाय की नाराजगी का जिक्र करते हुए कहा- "जाट समाज ने हमलावरों की गिरफ़्तारी को लेकर सड़क पर ही अपनी मांग बुलंद की है। यूपी का समस्त जाट समुदाय इसे अपने ऊपर प्रहार मानकर आक्रोशित है। इस हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से भी किये जाने की मांग उठ रही है। यह घटना बेहद निंदनीय है।"
अखिलेश यादव के इस बयान ने मामले को पूरी तरह से एक बड़ा राजनीतिक रंग दे दिया है। विपक्ष अब सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है, और यह पूछा जा रहा है कि दिनदहाड़े 20 राउंड गोलियां चलने के बावजूद पुलिस का खौफ अपराधियों में क्यों नहीं है?
पुलिस की कार्रवाई और उठते सवाल
दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड ने शामली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस इलाके में यह वारदात हुई, वहां से अभी तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सीसीटीवी फुटेज नहीं लगा है, जिससे हत्यारों की पहचान आसानी से की जा सके।
शामली के पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में कई विशेष टीमों (SOG और क्राइम ब्रांच) का गठन कर दिया गया है। पुलिस फिलहाल दो मुख्य बिंदुओं पर जांच कर रही है:
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भोलू शाहपुरिया के दावे की प्रामाणिकता और उसका आपराधिक इतिहास।
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अखिलेश यादव द्वारा उठाई गई राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की आशंका।
पुलिस ने सोनीपत पुलिस से भी संपर्क साधा है ताकि हरियाणा से जुड़े तारों को सुलझाया जा सके। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सरेआम हुई इस घटना ने पश्चिमी यूपी में एक बार फिर से खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।
गन कल्चर का काला सच
अंकित बालियान हत्याकांड सिर्फ एक क्राइम न्यूज़ नहीं है, बल्कि यह उस 'गन कल्चर' का भी एक काला सच है जो आज के दौर में युवाओं और कलाकारों के बीच तेजी से फैल रहा है। गानों में हथियारों और मर्डर की बातें करना और असल जिंदगी में उसी का शिकार हो जाना, समाज के लिए एक बेहद गंभीर और डरावना संदेश छोड़ जाता है। फिलहाल, पूरे उत्तर प्रदेश और हरियाणा की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यूपी पुलिस कब तक अंकित के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाकर पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाती है।