खबरीलाल टीम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में क्रिकेट अब सिर्फ जुनून नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने वाला एक शक्तिशाली 'रोजगार इंजन' बन गया है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के अनुसार, क्रिकेट से जुड़े क्षेत्रों में हर साल करीब 25,000 नए रोजगार पैदा हो रहे हैं। अंपायरिंग, कोचिंग, स्कोरिंग, ग्राउंड मेंटेनेंस और अकादमियों से लेकर फ्रैंचाइजी तक, हर तरफ अवसरों का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है, जो खासकर युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।READ ALSO:-MCX Silver Price: आज 28 अक्टूबर को चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, MCX पर ₹1.45 लाख के स्तर पर फिसली

 

 कोचिंग से लेकर अंपायरिंग तक बंपर बूम

यूपीसीए के आँकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में राज्य में 500 से अधिक क्रिकेट अकादमियां सफलतापूर्वक चल रही हैं, जिनमें 10,000 से अधिक कोच और ट्रेनर कार्यरत हैं।
  • विशेष कोर्स: लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में अंपायर और स्कोरर के लिए विशेष कोर्स आयोजित किए जा रहे हैं, जिन्हें पूरा करने वाले युवाओं को तुरंत नौकरी मिल रही है।
  • ग्रामीण बदलाव: एलडीए कोचिंग सेंटर के संचालक गोपाल सिंह बताते हैं कि अब गांव के लड़के सिर्फ खेलने तक सीमित नहीं हैं, वे कोच बनकर हजारों रुपये कमा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में फ्रैंचाइजी अकादमियां तेज़ी से खुल रही हैं, जो स्थानीय युवाओं को ग्राउंडकीपर, फिजियोथेरेपिस्ट और इवेंट मैनेजर जैसे रोल में रोजगार दे रही हैं।

 

महिला सशक्तिकरण: बेटियाँ भी बना रहीं करियर

यह रोजगार बूम सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है। महिलाएं भी क्रिकेट सेक्टर में शानदार करियर बना रही हैं।
  • उदाहरण: हाल ही में लखनऊ की कोमल होरा और मान्या मिश्रा ने लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन की अंपायरिंग परीक्षा पास कर यह गौरव प्राप्त किया। इससे पहले सताक्षी भी UPCA की अंपायर बन चुकी हैं। लखनऊ के पुराने अंपायर राशिद के अनुसार, UPCA इन पेशेवर क्रिकेटरों के लिए बेहतर मेहनताने का भी इंतजाम कर रहा है।

2030 तक 1 लाख नौकरियों का लक्ष्य

BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल ने इस भविष्य की ओर इशारा करते हुए एक बड़ा लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की नई खेल नीति में क्रिकेट को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे नए स्टेडियम और अकादमियों के लिए फंडिंग बढ़ाई जा रही है।
              "2030 तक क्रिकेट से जुड़े क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होंगे। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि राज्य की जीडीपी में भी योगदान बढ़ेगा।" – राजीव                  शुक्ल, बीसीसीआई उपाध्यक्ष

 

उन्होंने कहा कि क्रिकेट अब एक उद्योग बन गया है, और स्किल ट्रेनिंग देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। सरकार और यूपीसीए मिलकर बीसीसीआई स्तर की अंपायरिंग ट्रेनिंग और कोचों के लिए सर्टिफिकेशन प्रोग्राम चला रहे हैं, जिससे ये नौकरियां स्थायी और सम्मानजनक बन रही हैं।

 

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में क्रिकेट न केवल खेल संस्कृति को मजबूत कर रहा है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक उज्ज्वल और आत्मनिर्भर करियर का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।
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