लखनऊ/नई दिल्ली (23 अगस्त 2026): उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में इस वक्त मानसून अपने सबसे रौद्र रूप में है। यूपी के 60 जिलों में पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुककर और मूसलाधार बारिश ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। नदियां उफान पर हैं, शहर समंदर बन चुके हैं और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने तबाही का खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अस्पताल, मंदिर, घाट और बाजार सब कुछ जलमग्न हो गया है। दूसरी ओर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशवासियों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दिनों में यूपी-बिहार समेत 20 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।READ ALSO:-बिजनौर की स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार: एनीमिया मुक्त भारत में लहराया परचम, डीएम ने खींचा विकास का नया खाका
यूपी में जल प्रलय: मेरठ से बहराइच तक बिगड़े हालात
शनिवार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ, संभल, बाराबंकी, प्रयागराज, शामली और बरेली सहित कई जिलों में भीषण बारिश दर्ज की गई। शामली और बरेली में बारिश का आलम यह था कि सड़कें पूरी तरह से तालाब में तब्दील हो गईं। लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो गया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इस जलभराव का सीधा असर पड़ा है। मेरठ और बहराइच में स्थिति सबसे ज्यादा भयावह दिखी:
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बहराइच: यहां मात्र दो घंटे की तूफानी बारिश के बाद मेडिकल कॉलेज में बाढ़ का पानी घुस गया। सबसे खौफनाक नजारा तब दिखा जब घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर की एक मुख्य सड़क पर मगरमच्छ आ गया, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई। पिछले 24 घंटे में यहां सबसे ज्यादा 79.4 मिमी बारिश दर्ज की गई।
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मेरठ: यहां भी भारी बारिश (67.8 मिमी) के कारण LLRM मेडिकल कॉलेज में भीषण जलभराव हो गया। मरीज, उनके तीमारदार और अस्पताल का स्टाफ घुटनों तक भरे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर दिखे।
वाराणसी और प्रयागराज में धर्मस्थलों पर जल-कहर
पवित्र नगरी वाराणसी में गंगा नदी खतरे के निशान को पार करने को आतुर है। वाराणसी के सभी 84 ऐतिहासिक घाट पूरी तरह से गंगा के पानी में डूब चुके हैं।
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प्रसिद्ध अस्सी घाट, जहां आम दिनों में दुकानें और पर्यटकों की भीड़ होती थी, वहां अब नावें चल रही हैं।
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दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध 'गंगा आरती' अब घाट की सीढ़ियों के बजाय छतों पर कराई जा रही है।
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नवनिर्मित नमो घाट भी पूरी तरह जलमग्न हो गया है। वरुणा नदी का उफान कॉलोनियों तक पहुंच गया है, जिससे लगभग 20,000 लोगों पर बाढ़ का सीधा खतरा मंडरा रहा है और लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
प्रयागराज में भी गंगा और यमुना का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 37-38 सेंटीमीटर बढ़ गया है। संगम किनारे स्थित बड़े हनुमान मंदिर की दो सीढ़ियों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।
एक नज़र में: उफनती नदियां और खतरे के निशान
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जिला
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उफनती नदी का नाम
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बाढ़ का प्रभाव
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बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा
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घाघरा (सरयू)
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खतरे के निशान से ऊपर, भारी तबाही
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बदायूं और बलिया
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गंगा
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जलस्तर में भारी वृद्धि, तटबंधों पर दबाव
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लखीमपुर खीरी
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शारदा
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निचले इलाकों में पानी घुसा
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प्रयागराज
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टोंस, गंगा, यमुना
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संगम क्षेत्र जलमग्न, कॉलोनियों में अलर्ट
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सोनभद्र
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सोन
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तेज बहाव से कटान शुरू
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चित्रकूट
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मंदाकिनी
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बाजार तक पहुंचा पानी, सड़कों पर नावें
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नोट: प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे गंभीर हालात हैं और एक लाख से ज्यादा की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित है। मऊ में बाढ़ के कारण 200 से ज्यादा पशुओं के चारे का भारी संकट पैदा हो गया है, जिसके लिए किसान नावों से चारा ढोने को मजबूर हैं।
Mausam Alert (23 अगस्त): 20 राज्यों में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं। 23 अगस्त 2026 से मानसूनी बादल पूरे देश में और अधिक सक्रिय होने जा रहे हैं।
"देश के बड़े हिस्से में भारी बारिश की संभावना है। 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल आशंका है। लोगों को खुले स्थानों से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है।" - IMD बुलेटिन
उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, पंजाब): 23 अगस्त को मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रहेगा। दिल्ली-NCR, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 23 से 25 अगस्त के बीच व्यापक स्तर पर बारिश होगी। उत्तराखंड में 28 अगस्त तक लगातार बारिश, आंधी और बिजली चमकने का रेड अलर्ट है।
मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़): मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मानसूनी बादल जमकर बरसने वाले हैं। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 23 से 26 अगस्त तक व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट है। छत्तीसगढ़ में 23 अगस्त को 'बहुत भारी बारिश' की चेतावनी जारी की गई है। विदर्भ क्षेत्र में भी झमाझम बारिश होगी।
बिहार में 'डबल अटैक' और पूर्वी भारत का हाल: बिहार में 23 अगस्त को हालात बेहद गंभीर रह सकते हैं। मौसम विभाग ने राज्य में 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी के साथ 'गंभीर स्तर' की आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी है। 24 से 27 अगस्त के बीच भारी बारिश होगी। इसके अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड में 28 अगस्त तक मूसलाधार बारिश और वज्रपात की चेतावनी है।
पूर्वोत्तर भारत की स्थिति: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 23 से 28 अगस्त तक लगातार भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की प्रबल संभावना है।
दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में समुद्री तूफान का अलर्ट
कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पूरे हफ्ते बारिश का दौर जारी रहेगा। केरल, माहे, लक्षद्वीप और कर्नाटक (तटीय व आंतरिक) में 23 से 28 अगस्त के बीच झमाझम बारिश होगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराइकल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाओं और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब रहेगा। मन्नार की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में हवा की गति 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। केरल, लक्षद्वीप, सोमालिया और ओमान तट के साथ-साथ अरब सागर के बड़े हिस्से में मछुआरों को 26 अगस्त तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
प्रशासनिक अपील: बाढ़ और खराब मौसम के इस दौर में सभी नागरिकों से अपील है कि वे नदी, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल न खड़े हों। आपातकालीन स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का ही उपयोग करें।