26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की उनकी ही मंगेतर सिया गोयल द्वारा रची गई हत्या की साजिश ने भारत में पुरुषों के अधिकारों, न्याय और सुरक्षा पर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है। राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को विचलित करने वाला बताते हुए पुरुषों के लिए एक समर्पित आयोग की पुरजोर वकालत की है।
पुणे: अपराध की दुनिया में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो न केवल रोंगटे खड़े कर देती हैं, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा और कानूनी व्यवस्था पर कई गंभीर सवालिया निशान भी लगा देती हैं। महाराष्ट्र के पुणे शहर में हाल ही में सामने आए चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड (Ketan Agarwal Murder Case) ने ठीक ऐसा ही किया है। इस खौफनाक वारदात ने देश में एक नई और बेहद जरूरी बहस को जन्म दे दिया है—बहस पुरुषों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' (National Commission for Men) के गठन की।
इस सनसनीखेज मामले में 26 साल के युवा रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में जो सबसे खौफनाक सच सामने आया, वह यह था कि इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता कोई और नहीं, बल्कि केतन की अपनी मंगेतर सिया गोयल (Siya Goyal) थी। पुलिस ने सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। इस विश्वासघात ने समाज में एक गहरा सदमा छोड़ा है, और अब इस मुद्दे की गूंज देश की संसद तक पहुँच गई है।
सांसद अशोक कुमार मित्तल ने उठाई 'पुरुष आयोग' की मांग
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने इस जघन्य हत्याकांड पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस घटना को बेहद अमानवीय और विचलित करने वाला करार दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने देश में पुरुषों के खिलाफ होने वाले अपराधों और झूठे मुकदमों से निपटने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचे—'राष्ट्रीय पुरुष आयोग'—के गठन की अपनी पुरानी मांग को फिर से हवा दे दी है।
शनिवार को सांसद मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 की राज्यसभा की कार्यवाही का है, जब उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 'पुरुष आयोग' बनाने के लिए एक 'प्राइवेट मेंबर बिल' (Private Member Bill) पेश किया था।
सांसद मित्तल ने एक्स पर लिखा:
"पुणे का केतन अग्रवाल मामला बहुत परेशान और व्यथित करने वाला है। केतन और उनके परिवार को पूरी तरह से निष्पक्ष, बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए, और सबसे बढ़कर, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मैंने इसी उद्देश्य से संसद में ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल’ पेश किया था। हर पीड़ित को न्याय, संस्थागत मदद और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। केतन का मामला हमें यह याद दिलाता है कि पुरुष भी हिंसक अपराधों और साजिशों के पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें भी संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा और एक ऐसा निष्पक्ष मंच मिलना चाहिए जहां उनकी बात बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनी जा सके। लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना, न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।"
विश्वासघात की खौफनाक दास्तान: आखिर क्या है केतन अग्रवाल मर्डर केस?
पुणे के रहने वाले केतन अग्रवाल एक उभरते हुए युवा उद्यमी थे, जो रियल एस्टेट के कारोबार में अपना नाम बना रहे थे। परिवार ने बड़े अरमानों से उनकी सगाई सिया गोयल नाम की युवती से की थी। दोनों के परिवार भविष्य के सपने बुन रहे थे। लेकिन सिया गोयल के दिमाग में कुछ और ही खौफनाक साजिश चल रही थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, सिया गोयल का चेतन नाम के एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। सिया केतन के साथ शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहती थी, लेकिन परिवार के दबाव या अन्य कारणों से उसने एक ऐसा खौफनाक रास्ता चुना जिसने सबको सन्न कर दिया। सिया ने अपने प्रेमी चेतन के साथ मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और बड़ी ही बेरहमी से उसे मौत के घाट उतार दिया।
जब पुलिस ने मामले की परतें उधेड़नी शुरू कीं, तो सिया के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन और बयानों में भारी विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ करने पर सिया टूट गई और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। एक मंगेतर द्वारा रची गई इस खौफनाक साजिश ने समाज में रिश्तों की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है।
Pune Ketan Agarwal case is deeply disturbing. Ketan and his family deserve a fair, thorough, and impartial investigation, and above all, justice.
— Ashok Kumar Mittal (@DrAshokKMittal) July 3, 2026
I introduced the National Commission for Men Bill in Parliament. Every victim deserves justice, support, and equal protection under… pic.twitter.com/M6ENpG1T7F
'प्राइवेट मेंबर बिल' क्या है और इसका क्या महत्व है?
सांसद अशोक कुमार मित्तल (जो पहले आम आदमी पार्टी में थे और अप्रैल में भाजपा में शामिल हुए) द्वारा पेश किए गए प्राइवेट मेंबर बिल की चर्चा अब हर जगह हो रही है। लेकिन आम जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर
'प्राइवेट मेंबर बिल' होता क्या है?
भारतीय संसदीय व्यवस्था में, जब कोई ऐसा संसद सदस्य जो मंत्री नहीं है (चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का), कोई विधेयक (Bill) संसद में पेश करता है, तो उसे 'प्राइवेट मेंबर बिल' (गैर-सरकारी सदस्य विधेयक) कहा जाता है।
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पास होने की संभावना: संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के पास होने की संभावना तकनीकी रूप से बहुत कम होती है। अक्सर ये बिल वोटिंग के चरण तक पहुँचने से पहले ही वापस ले लिए जाते हैं या खारिज हो जाते हैं।
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ऐतिहासिक तथ्य: अगर हम भारतीय संसद के इतिहास पर नजर डालें, तो आजादी के बाद से अब तक सिर्फ 14 प्राइवेट बिल ही दोनों सदनों से पास होकर कानून का रूप ले पाए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साल 1970 के बाद से आज तक कोई भी ऐसा बिल संसद के दोनों सदनों से पूर्ण रूप से पास नहीं हो सका है।
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बिल का असली उद्देश्य: भले ही ये बिल आसानी से पास नहीं होते, लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य सरकार और पूरे देश का ध्यान किसी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दे की तरफ खींचना होता है। सांसद मित्तल का यह बिल भी देश का ध्यान 'पुरुषों के खिलाफ होने वाले अपराधों' की ओर खींचने का एक बड़ा प्रयास था।
'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है?
केतन अग्रवाल के मामले ने उन आवाजों को और बुलंद कर दिया है जो लंबे समय से जेंडर-न्यूट्रल (लिंग-तटस्थ) कानूनों की मांग कर रहे हैं। समाज में एक धारणा बन गई है कि हिंसा और अपराध का शिकार केवल महिलाएं ही होती हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'राष्ट्रीय महिला आयोग' (NCW) जैसी सशक्त संस्थाएं मौजूद हैं, जो बहुत जरूरी और सराहनीय भी हैं। लेकिन, न्यायविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग अब यह सवाल उठा रहा है कि जब कोई पुरुष घरेलू हिंसा, ब्लैकमेल, हनीट्रैप, झूठे मुकदमों (जैसे- झूठे रेप केस या दहेज प्रताड़ना के केस) या केतन जैसे जघन्य हत्याकांड का शिकार होता है, तो वह न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाए?
पुरुष आयोग के गठन के पीछे मुख्य तर्क:
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झूठे मुकदमों से बचाव: NCRB (National Crime Records Bureau) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल हजारों पुरुषों पर झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं, जिससे उनका करियर और जीवन तबाह हो जाता है। एक आयोग उन्हें कानूनी और मानसिक सहायता प्रदान कर सकता है।
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घरेलू हिंसा के शिकार पुरुष: कई शोधों से यह बात सामने आई है कि पुरुष भी बड़े पैमाने पर घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होते हैं, लेकिन सामाजिक शर्म और कानून के अभाव में वे अपनी आवाज नहीं उठा पाते।
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पुरुष आत्महत्या दर: भारत में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की आत्महत्या की दर काफी अधिक है, जिसके पीछे पारिवारिक कलह, आर्थिक दबाव और कानूनी प्रताड़ना बड़े कारण होते हैं। एक संस्थागत ढांचा उन्हें काउंसलिंग और मदद दे सकता है।
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समान न्याय का अधिकार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है। न्याय की तराजू में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
न्याय की तराजू में बराबरी की मांग
पुणे का केतन अग्रवाल मर्डर केस केवल एक हत्या का मामला नहीं है; यह हमारे सामाजिक और कानूनी ढांचे में मौजूद उन खामियों का भी आईना है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सिया गोयल और उसके प्रेमी द्वारा रची गई इस खौफनाक साजिश ने साबित कर दिया है कि अपराधी का कोई 'जेंडर' (लिंग) नहीं होता। अपराध करने वाला सिर्फ एक अपराधी होता है, और पीड़ित सिर्फ एक पीड़ित होता है।
सांसद अशोक कुमार मित्तल द्वारा उठाई गई 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन केतन की मौत ने इस मांग को एक नया और ज्वलंत संदर्भ दे दिया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForKetan और #NationalCommissionForMen जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह वीभत्स घटना वास्तव में देश के कानून निर्माताओं को जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर कर पाएगी, या केतन अग्रवाल का मामला भी समय के साथ फाइलों में दबकर रह जाएगा। यह समय है कि समाज और सरकार मिलकर एक ऐसा कानूनी माहौल बनाएं जहां न्याय की पुकार किसी के जेंडर की मोहताज न रहे।