खबरीलाल टीम
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। इस वैश्विक संकट की आंच अब भारतीय रसोई तक भी पहुंचने लगी है। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी जंग की वजह से देश के भीतर कुकिंग गैस (LPG) की कमी को लेकर आम जनता के बीच गहरी चिंता और डर का माहौल बन गया है। इसी डर के कारण देशभर में एलपीजी पैनिक बुकिंग (LPG Panic Booking) के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने शनिवार को एक अहम प्रेस वार्ता करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से जुड़ी तमाम चिंताओं के बावजूद पूरे भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई पूरी तरह से स्थिर और सुरक्षित बनी हुई है।RREAD ALSO:-1 अप्रैल से हाईवे का सफर आपकी जेब पर पड़ेगा भारी: FASTag एनुअल पास हुआ महंगा, 52 लाख से ज्यादा यूज़र्स को झटका!

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नौवहन मंत्रालय (Ministry of Shipping) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से देश को वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हाल के दिनों में गैस सिलेंडरों की एलपीजी पैनिक बुकिंग काफी तेजी से बढ़ी है, जो कि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर अनावश्यक दबाव डाल रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन भारत की तैयारियां पूरी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी तक देश के किसी भी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (Distribution Center) से LPG खत्म होने या 'ड्राई आउट' होने की कोई आधिकारिक खबर नहीं आई है।

 

एलपीजी पैनिक बुकिंग (LPG Panic Booking) का बढ़ता आंकड़ा और सरकार की चिंता

मौजूदा समय में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती गैस की कमी नहीं, बल्कि जनता के बीच फैला डर है। इसी डर के चलते लोग अपनी वास्तविक जरूरत से पहले ही गैस बुक कर रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में एलपीजी पैनिक बुकिंग की स्थिति गंभीर हो गई है। सामान्य दिनों में पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग का आंकड़ा औसतन 50 लाख प्रतिदिन रहता है। लेकिन युद्ध की खबरों और गैस की कमी की अफवाहों के चलते यह आंकड़ा बढ़कर 88.8 लाख प्रतिदिन हो गया है।

 

हर दिन 38.8 लाख से अधिक अतिरिक्त बुकिंग आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि लोग गैस खत्म होने के डर से घबराए हुए हैं। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्वीकार किया कि बाजार में निश्चित रूप से एलपीजी पैनिक बुकिंग का माहौल है। उन्होंने जनता से भावुक और घबराकर कदम न उठाने की अपील की है। जब लाखों लोग एक साथ बिना जरूरत के गैस बुक करते हैं, तो लॉजिस्टिक (Logistics) और डिलीवरी सिस्टम पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे उन परिवारों को समय पर गैस नहीं मिल पाती जिन्हें वास्तव में इसकी तुरंत आवश्यकता होती है। इसलिए, सरकार का मुख्य फोकस इस एलपीजी पैनिक बुकिंग को रोकना और लोगों को सही जानकारी देना है।

 

पेट्रोलियम मंत्रालय का सीधा संदेश: रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर

जनता के मन से एलपीजी पैनिक बुकिंग का डर निकालने के लिए मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल (Crude Oil) का देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश की सभी रिफाइनरियां (Refineries) अपनी पूरी क्षमता (Full Capacity) पर काम कर रही हैं। मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में हमें आपातकालीन आयात (Emergency Import) की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारे पास रणनीतिक और घरेलू दोनों स्तरों पर पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध है।

 

रिफाइनरियों ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अपने उत्पादन में 31 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि की है। इसका मतलब है कि जितनी तेजी से एलपीजी पैनिक बुकिंग हो रही है, सरकार उतनी ही तेजी से गैस का उत्पादन भी बढ़ा रही है। इसके अलावा, गेल (GAIL) के साथ उच्च स्तरीय बैठक की गई है, जिसमें यह तय किया गया है कि जिसे भी कॉमर्शियल (Commercial) गैस सिलेंडर की आवश्यकता होगी, उसे वह प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराया जाएगा। 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कॉमर्शियल सिलेंडर का डिस्ट्रीब्यूशन सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है।

 

डिजिटल इंडिया पहल का लाभ इस संकट के समय में साफ देखने को मिल रहा है। सरकार के मुताबिक, वर्तमान में कुल बुकिंग का 84 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन (Online Booking) किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें न लगाएं और पूरी तरह से डिजिटल बुकिंग पर शिफ्ट हों। "लाइन लगाने की कोई जरूरत ही नहीं है। पैनिक ना करें, सिलेंडर आपके घर पहुंचेगा," यह भरोसा केंद्र सरकार ने देशवासियों को दिया है।

 

'शिवालिक' और 'नंदा देवी': होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत आ रहे देवदूत

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा खाड़ी देशों (Gulf Countries) से आता है। यह सारा व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जो वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इसी रास्ते के बंद होने या बाधित होने की आशंका ने ही भारत में एलपीजी पैनिक बुकिंग को जन्म दिया है।

 

लेकिन इसी बीच एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया को जानकारी दी कि सभी भारतीय नागरिक और नाविक पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) रीजन में पूरी तरह सुरक्षित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 24 फंसे हुए भारतीय जहाजों में से दो प्रमुख एलपीजी करियर (LPG Carrier) जहाजों—'शिवालिक' (Shivalik) और 'नंदा देवी' (Nanda Devi)—ने तनावपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है और अब वे भारत की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। 

 

इन दोनों विशाल जहाजों में कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन (Metric Tonnes) एलपीजी मौजूद है। यह मात्रा इतनी बड़ी है कि इससे लाखों घरों के चूल्हे जल सकते हैं और एलपीजी पैनिक बुकिंग के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ये दोनों जहाज 16 मार्च 2026 तक भारत के गुजरात स्थित कांडला पोर्ट (Kandla Port) और मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच जाएंगे। डीजी शिपिंग (DG Shipping) द्वारा सभी जहाजों और नाविकों की उपग्रहों और रडार के माध्यम से 24 घंटे कड़ी निगरानी की जा रही है।

 

विदेश मंत्रालय की कूटनीतिक जीत और भारतीयों की सुरक्षा

यह संकट केवल ऊर्जा का नहीं है, बल्कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा का भी है। भारत सरकार ने इस मोर्चे पर बहुत तेजी से काम किया है। विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले चौबीस घंटों में कंट्रोल रूम में 360 कॉल और ईमेल प्राप्त हुए हैं। वहीं, पिछले पंद्रह दिन में संकट शुरू होने के बाद से 2500 कॉल और पांच हजार ईमेल आए हैं। सरकार ने हर एक नागरिक की चिंता का जवाब दिया है।

 

अब तक कुल 253 भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिनमें से 30 नाविकों को पिछले 24 घंटों के भीतर ही वापस लाया गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस कूटनीतिक जीत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता से आयात करने को लेकर खाड़ी देशों के विभिन्न स्तरों पर बात कर रहा है। भारत अपने तमाम 'गल्फ मेंबर' (Gulf Member) देशों के संपर्क में है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित रहे।

 

रणधीर जायसवाल ने बताया कि इन्हीं उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयासों का नतीजा है कि 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जैसे जहाज सुरक्षित रूप से भारत आ रहे हैं। बाकी बचे जहाजों से भी हमारा सीधा संपर्क बना हुआ है और उनकी सुरक्षा हमारी निगरानी में है। इसके अलावा, जो बहुत सारे ईरानी नागरिक भारत में फंसे हुए हैं, उन्हें वापस ले जाने के लिए ईरान द्वारा कोच्चि (Kochi) से विशेष फ्लाइट की व्यवस्था की गई है। यह दोनों देशों के बीच बेहतर कूटनीतिक समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है।

 

राज्यों में कालाबाजारी पर सख्त एक्शन और छापेमारी

जब भी देश में एलपीजी पैनिक बुकिंग जैसा माहौल बनता है, तो कालाबाजारी (Black Marketing) करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। वे गैस सिलेंडरों को जमा (Hoard) करने लगते हैं ताकि बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इस बार पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

 

संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कई मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्य के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय आपात बैठकें की हैं। हरियाणा, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के साथ केंद्र की सीधी बैठक की गयी है। गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूटरों (Distributors) के यहां औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) किए जा रहे हैं।

 

अकेले उत्तर प्रदेश (UP) में पुलिस और नागरिक आपूर्ति विभाग (Civil Supplies Department) की संयुक्त टीमों ने 1400 स्थानों पर औचक छापेमारी की है, जिसमें गड़बड़ी पाए जाने पर 19 लोगों को हिरासत में लिया गया है। तेल कंपनियों (Oil Marketing Companies - OMCs) की अपनी विशेष टीमें भी डिस्ट्रीब्यूटरों के गोदामों पर अचानक पहुंच कर स्टॉक की जांच कर रही हैं। सरकार का एकमात्र प्रयास यह है कि किसी भी स्थिति में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े और एलपीजी पैनिक बुकिंग की आड़ में कोई मुनाफाखोरी न कर सके।

 

पोर्ट्स (Ports) को भी यह विशेष निर्देश दिया गया है कि एलपीजी और तेल से जुड़े कार्गो (Cargo) को रियायती शुल्क (Concessional Duty) पर और बिना किसी देरी के क्लीयरेंस दिया जाए। पिछले तीन दिनों में उन छह जहाजों को बंदरगाहों पर प्राथमिकता (Priority) दी गई है जो गल्फ के अलावा भी दुनिया के अन्य क्षेत्रों से भारतीय तट पर ऊर्जा सामग्री लेकर आए हैं।

 

वैकल्पिक ईंधनों को मंजूरी और पर्यावरण नियमों में ढील

सरकार केवल गैस की आपूर्ति पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि संकट की इस घड़ी में हर संभव विकल्प तलाशे जा रहे हैं। चूंकि दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में प्रदूषण के कारण कई तरह के ईंधनों पर प्रतिबंध रहता है, इसलिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बड़ा फैसला लिया है। एलपीजी पैनिक बुकिंग और गैस संकट की आशंकाओं को देखते हुए सीएक्यूएम ने एनसीआर क्षेत्र में उद्योगों और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एक माह के लिए बायोमास (Biomass) के उपयोग को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

 

इससे होटलों, रेस्टोरेंट्स और छोटे उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो एलपीजी की संभावित कमी के कारण अपना काम बंद होने के डर में थे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी नियम सख्त कर दिया है कि गैस बुकिंग तय समयसीमा (Time Limit) के बाद ही मान्य होगी। इसका मतलब है कि अगर कोई उपभोक्ता एक गैस लेने के तुरंत बाद दूसरे की बुकिंग करना चाहता है, तो उसे एक निश्चित अवधि (जैसे 15 या 21 दिन) का इंतजार करना होगा। यह कदम एलपीजी पैनिक बुकिंग को रोकने और सभी को समान रूप से गैस उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है। 

 

फर्जी वीडियो और अफवाहों से बचें: सरकार की सख्त चेतावनी

आज के डिजिटल युग में, वास्तविक युद्ध से ज्यादा खतरनाक सोशल मीडिया (Social Media) पर लड़ा जाने वाला 'सूचना युद्ध' (Information War) होता है। एलपीजी पैनिक बुकिंग के पीछे एक बहुत बड़ा कारण सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरें और अफवाहें हैं।

 

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर बहुत से फर्जी वीडियो (Fake Videos) और डीपफेक (Deepfake) वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि देश में गैस पूरी तरह खत्म हो गई है और अगले कई महीनों तक गैस नहीं मिलेगी। उन्होंने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है।

 

"सोशल मीडिया के सिर्फ आधिकारिक (Official) हैंडल पर ही भरोसा करें। फर्जी और एआई (AI) निर्मित वीडियो से बच के रहें," सेंथिल राजन ने कहा। केंद्र सरकार ने इस मामले में सभी राज्यों से बात की है और जिला स्तर (District Level) पर विशेष कमेटियां बनाकर लोगों की सहायता करने का निर्देश दिया है। ये कमेटियां न केवल गैस आपूर्ति की निगरानी करेंगी बल्कि अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखेंगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को इस एलपीजी पैनिक बुकिंग की मानसिकता से जल्द से जल्द बाहर निकलना बेहद जरूरी है, अन्यथा एक कृत्रिम (Artificial) संकट खड़ा हो सकता है।

 

डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा और मीडिया की भूमिका

सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि एलपीजी पैनिक बुकिंग से बचने का सबसे अच्छा तरीका पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था पर भरोसा करना है। पेट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही एक देशव्यापी अभियान (Campaign) शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को डिजिटल बुकिंग के फायदों के बारे में जागरूक करना है। मंत्रालय की लोगों से अपील है कि वे गैस एजेंसियों पर जाकर भीड़ न लगाएं। ऑनलाइन सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी है और जो पहले बुक करेगा, उसे पहले गैस मिलेगी।

 

स्थिति निश्चित रूप से गंभीर है, दुनिया एक बड़े भू-राजनीतिक संकट से गुजर रही है, लेकिन भारत सरकार का दावा है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में एलपीजी है। "पैनिक की कोई जरूरत नहीं है," सरकार ने बार-बार दोहराया। इसके साथ ही, सरकार ने भारतीय मीडिया से भी विशेष अनुरोध किया है। मीडिया से कहा गया है कि वह जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करे और लोगों को बुकिंग के लिये जागरूक करे, ताकि एलपीजी पैनिक बुकिंग को रोका जा सके।

 

भारत की रणनीतिक तैयारियां: भविष्य की सुरक्षा

यह संकट भारत को अपनी ऊर्जा नीतियों (Energy Policies) पर भी पुनर्विचार करने का अवसर दे रहा है। दशकों से भारत मध्य पूर्व पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी तेल और गैस का आयात शुरू किया है। वर्तमान में रिफाइनरियों का 31% उत्पादन बढ़ना यह साबित करता है कि भारत की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता (Domestic Refining Capacity) बहुत मजबूत है।

 

जब तक 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जैसे जहाज सुरक्षित रूप से भारत के बंदरगाहों पर माल उतारते रहेंगे, तब तक एलपीजी पैनिक बुकिंग का कोई तार्किक आधार नहीं है। लोगों को यह समझना चाहिए कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) जैसे मजबूत कानून बना रखे हैं, जिनका उपयोग संकट के समय जमाखोरी को रोकने के लिए किया जाता है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. एलपीजी पैनिक बुकिंग (LPG Panic Booking) क्या है? जब लोग गैस खत्म होने या भविष्य में न मिलने के डर से, जरूरत न होने पर भी जल्दबाजी में गैस सिलेंडर बुक करने लगते हैं, तो इसे एलपीजी पैनिक बुकिंग कहा जाता है। हाल ही में ईरान-इजरायल युद्ध की खबरों के कारण भारत में यह आंकड़ा 50 लाख से बढ़कर 88.8 लाख प्रतिदिन हो गया है।

 

2. क्या भारत में सच में कुकिंग गैस (LPG) खत्म हो रही है? नहीं। केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और उत्पादन 31% तक बढ़ा दिया गया है। घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

 

3. 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जहाज चर्चा में क्यों हैं? ये भारत के दो बड़े एलपीजी करियर जहाज हैं जो युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुके हैं। ये दोनों जहाज 92,700 मीट्रिक टन गैस लेकर 16 मार्च 2026 तक भारत के कांडला और मुंद्रा पोर्ट पहुंच रहे हैं, जो देश की गैस सप्लाई को और मजबूत करेंगे।

 

4. गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है? सरकार और राज्य प्रशासन गैस एजेंसियों पर औचक छापेमारी कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में 1400 जगहों पर जांच की गई और 19 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकार ने ऑनलाइन बुकिंग को 84% तक पहुंचा दिया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

 

5. अगर मेरे पास गैस खत्म होने वाली है, तो मुझे क्या करना चाहिए? आपको सामान्य तरीके से अपने गैस प्रदाता के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से गैस बुक करनी चाहिए। सरकार ने भरोसा दिया है कि सिलेंडर सुरक्षित रूप से आपके घर पहुंचेगा, इसलिए लाइनों में लगने या एलपीजी पैनिक बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है।

 

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित जरूर किया है, लेकिन भारत सरकार की त्वरित कूटनीतिक और प्रशासनिक कार्रवाइयों ने देश को एक बड़े ऊर्जा संकट से बचा लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और नौवहन मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से न केवल भारतीय नाविक सुरक्षित घर लौट रहे हैं, बल्कि 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जैसे जहाजों के जरिए लाखों टन गैस भी भारत पहुंच रही है। रिफाइनरियों के फुल कैपिसिटी पर काम करने और राज्यों में कालाबाजारी के खिलाफ सख्त एक्शन से यह साबित होता है कि सरकार स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण में है। ऐसे में आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और फर्जी एआई वीडियो के झांसे में न आएं। एलपीजी पैनिक बुकिंग करके हम केवल अपने ही सिस्टम पर दबाव बढ़ा रहे हैं। समझदारी इसी में है कि डिजिटल बुकिंग का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर ही गैस बुक करें। सरकार का साफ संदेश है—पैनिक न करें, सिलेंडर आपके घर तक सुरक्षित पहुंचेगा।

 

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत में एलपीजी सप्लाई को लेकर फैली अफवाहों के कारण गैस की बुकिंग 50 लाख से बढ़कर 88.8 लाख प्रतिदिन हो गई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता (31% अधिक उत्पादन) पर काम कर रही हैं। 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नामक दो बड़े जहाज 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित पार कर चुके हैं और जल्द भारत पहुंच रहे हैं। सरकार ने कालाबाजारी पर सख्त एक्शन लिया है और लोगों से फर्जी वीडियो से बचते हुए पैनिक बुकिंग न करने की अपील की है।
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