मौसम डेस्क:
देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी दिनों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी करते हुए देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 11 अगस्त से लेकर 16 अगस्त तक पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।READ ALSO:-मेरठ में शिवभक्तों के लिए बही सेवा की गंगा: खत्री युवा शक्ति संघ ने लगाया कांवड़ शिविर, कांवड़ियों को बांटे गए फल और जूस
उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून की ट्रफ लाइन और स्थानीय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से तेज आंधी, वज्रपात (बिजली चमकना) और भारी वर्षा का दोहरा संकट मंडरा रहा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से लेकर तटीय आंध्र प्रदेश तक 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है।
1. पहाड़ी राज्यों में कुदरत का कहर: हिमाचल और उत्तराखंड में रेड/ऑरेंज अलर्ट
हिमालयी राज्यों में मानसून की रफ्तार बेहद आक्रामक बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और भूस्खलन (Landslides) का खतरा चरम पर है।
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हिमाचल प्रदेश: IMD के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 11 अगस्त को कई स्थानों पर 'भारी से बहुत भारी बारिश' का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 12 से 16 अगस्त तक लगातार भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
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उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड में 11 से 16 अगस्त के दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से 11 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है, जिससे भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं की संवेदनशीलता बढ़ गई है।
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जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और मुजफ्फराबाद: इन पहाड़ी क्षेत्रों में भी 11 से 16 अगस्त तक लगभग सभी स्थानों पर हल्की से मध्यम और अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।
2. उत्तर भारत के मैदान: राजस्थान में अत्यंत भारी बारिश, यूपी-दिल्ली में छाएंगे बादल
मैदानी इलाकों में मानसून की सक्रियता से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन भारी जलभराव की समस्या भी खड़ी हो सकती है।
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राजस्थान: राजस्थान में मानसून पूरी तरह मेहरबान है। पूर्वी राजस्थान में 11 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है, जबकि 12 अगस्त को भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 13 और 14 अगस्त को यहां तेज मेघगर्जन के साथ बिजली चमकने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के जिलों में 11 और 12 अगस्त को मूसलाधार बारिश के आसार जताए गए हैं।
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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 14 और 15 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 से 15 अगस्त के बीच मानसून रफ्तार पकड़ेगा और अधिकांश जिलों में मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा रहेगा।
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दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के राज्यों (हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़) में 11 अगस्त को व्यापक बारिश देखने को मिलेगी। इसके बाद 13 अगस्त को एक बार फिर अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का दौर लौट सकता है।
3. मध्य भारत और छत्तीसगढ़: मध्य प्रदेश में आफत की बारिश का अनुमान
मध्य भारत में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण वर्षा की गतिविधियों में तेजी आई है।
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मध्य प्रदेश: पश्चिम मध्य प्रदेश में 11 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 11 और 12 अगस्त को व्यापक स्तर पर बारिश होगी, जिसके बाद 13 से 16 अगस्त तक बारिश का जोर थोड़ा कम होकर हल्की से मध्यम श्रेणी का रह सकता है। दूसरी ओर, पूर्वी मध्य प्रदेश में 11 से 16 अगस्त तक लगातार झमाझम बारिश जारी रहेगी, जिसमें 13 से 15 अगस्त के बीच भारी वर्षा का अनुमान है।
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छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 13 से 16 अगस्त के बीच व्यापक बारिश होगी, जबकि 12 से 15 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा का दौर चलेगा। विदर्भ क्षेत्र में 13 और 14 अगस्त को अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।
4. पूर्वी भारत का हाल: बिहार और झारखंड में 13 अगस्त से बदलेगा मौसम
पूर्वी भारत के राज्यों में 12 अगस्त के बाद मानसून की रफ्तार में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
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बिहार और झारखंड: बिहार में 11 और 12 अगस्त को हल्की से मध्यम बारिश होगी, लेकिन 13 से 16 अगस्त के बीच राज्य भर में व्यापक और भारी बारिश का नया स्पेल शुरू होगा। ठीक इसी तरह, झारखंड में 12 से 16 अगस्त तक झमाझम बारिश होगी, जिसमें 13 और 14 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
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ओडिशा और पश्चिम बंगाल: ओडिशा में 12 से 15 अगस्त के बीच 'बहुत भारी बारिश' का अलर्ट है। गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 11 से 16 अगस्त के दौरान 30 से 50 किमी/घंटे की गति से चलने वाली तूफानी हवाओं और बिजली की कड़क के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश होती रहेगी।
5. पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल में मूसलाधार बारिश की संभावना
पूर्वोत्तर के राज्यों में आगामी पूरे सप्ताह मानसूनी गतिविधियां अपने चरम पर रहेंगी।
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असम और मेघालय: 11 से 14 अगस्त तक भारी बारिश होगी, जबकि 15 और 16 अगस्त को स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब यहां 'अत्यंत भारी बारिश' का अनुमान है।
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अरुणाचल प्रदेश: 11 से 14 अगस्त तक लगातार भारी बारिश और 15-16 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
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नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन चारों राज्यों में 11 से 16 अगस्त के दौरान पूरा हफ्ता बारिश से सराबोर रहेगा। लगभग सभी स्थानों पर आंधी-तूफान के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
6. पश्चिम एवं दक्षिण भारत: तटीय इलाकों में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
दक्षिण और पश्चिमी तटीय भारत में मानसूनी हवाओं के प्रभाव से समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
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कोंकण, गोवा और गुजरात: कोंकण और गोवा में 11 से 16 अगस्त तक लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। गुजरात क्षेत्र में 11 से 13 अगस्त के दौरान भारी बारिश होगी, जबकि सौरराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट बारिश की संभावना है।
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तटीय कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप: इन सभी तटीय इलाकों में 11 से 16 अगस्त के बीच अधिकांश स्थानों पर बारिश होगी। इस दौरान 30 से 40 किमी/घंटे (जो बढ़कर 50 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है) की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
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तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 11 से 14 अगस्त के दौरान 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार (झोंके में 60 किमी/घंटा) से हवाएं चलने और तेज गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग की सलाह और सुरक्षा दिशानिर्देश
IMD ने भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की चेतावनी को देखते हुए आम नागरिकों और यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचें: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचें, क्योंकि भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने का खतरा काफी अधिक है।
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जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाएं: मैदानी और शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति में निचले क्षेत्रों और कच्चे मकानों से दूर रहें। बिजली के खंभों और ढीले तारों को न छुएं।
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किसानों के लिए सलाह: खेतों में पानी के निकासी की उचित व्यवस्था रखें और वज्रपात की संभावना के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचें।
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तटीय इलाकों में सतर्कता: मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 11 से 16 अगस्त के दौरान उग्र समुद्र और तेज हवाओं के चलते गहरे समुद्र में न जाएं।