नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: ज़रा सोचिए, आप एक ऐसा नोट लेकर चलें जो गलती से वॉशिंग मशीन में धुल जाए, बारिश में भीग जाए, या आपकी जेब में महीनों तक मुड़ा रहे, फिर भी बिल्कुल कड़क और नए जैसा बना रहे! सुनने में किसी जादुई चीज जैसा लगता है ना? लेकिन, दुनिया के करीब 60 देशों के नागरिकों के लिए यह कोई जादू नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई है। इन देशों में अब पारंपरिक कागज के नोटों (Paper Banknotes) की जगह प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट (Polymer Banknotes) चलन में आ चुके हैं।READ ALSO:-दिल्ली में महासंग्राम: संसद में घुसने की कोशिश, जंतर-मंतर से जबरन हटाए गए प्रदर्शनकारी; लाठीचार्ज और आंसू गैस के बीच जेपी नड्डा से वार्ता
आजकल ग्लोबल इकॉनमी में इन प्लास्टिक के नोटों का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इनकी लंबी उम्र, सुरक्षा फीचर्स और साफ-सुथरा होना इन्हें कागज के नोटों से कहीं ज्यादा बेहतर बनाता है। आइए, बिल्कुल आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि दुनिया में प्लास्टिक करेंसी की शुरुआत कैसे हुई, कौन-कौन से देश इसे अपना चुके हैं, और हमारा अपना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसे लेकर क्या बड़ी तैयारी कर रहा है।
दुनिया में सबसे पहले किसने की शुरुआत?
प्लास्टिक के नोटों के आविष्कार और उन्हें चलन में लाने का पूरा श्रेय ऑस्ट्रेलिया (Australia) को जाता है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश था, जिसने जाली नोटों (Counterfeit Currency) की समस्या से निपटने के लिए साल 1988 में सबसे पहले पॉलीमर नोट जारी किए थे। इसके बाद, ऑस्ट्रेलिया ने अपने पारंपरिक कागजी नोटों को पूरी तरह से अलविदा कह दिया। ऑस्ट्रेलिया की इस सफलता को देखते हुए, दुनिया के अन्य देशों ने भी इस बेहतरीन तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया।
इन देशों में पूरी तरह से चलते हैं सिर्फ प्लास्टिक के नोट
दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने कागज के नोट छापना पूरी तरह से बंद कर दिया है और अब वहां की अर्थव्यवस्था 100% प्लास्टिक करेंसी पर ही निर्भर है। इस खास लिस्ट में ये देश शामिल हैं:
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प्रमुख विकसित देश: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, और यूनाइटेड किंगडम (UK)।
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अन्य देश: रोमानिया, वियतनाम, ब्रुनेई, पापुआ न्यू गिनी, मालदीव, मॉरिटानिया, निकारागुआ, और वानुअतु।
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कैरेबियाई क्षेत्र: ईस्टर्न कैरेबियन स्टेट्स और बारबाडोस।
ताजा अपडेट (2026): मध्य-पूर्व का देश ओमान भी साल 2026 में अपना 1-रियाल का नया प्लास्टिक नोट जारी करके इस एक्सक्लूसिव लिस्ट का हिस्सा बन चुका है।
आधा सफर पूरा: जहां कागज और प्लास्टिक दोनों का है चलन
कुछ देश ऐसे हैं जो धीरे-धीरे इस बदलाव (Transition) को अपना रहे हैं। इन देशों ने अभी तक अपने सभी नोटों को प्लास्टिक में नहीं बदला है, बल्कि कुछ खास मूल्य (Denominations) के नोट ही पॉलीमर में छापे हैं, जबकि बाकी नोट अभी भी कागज के हैं:
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एशियाई देश: सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, हॉन्गकॉन्ग, बांग्लादेश, श्रीलंका और हमारा पड़ोसी नेपाल।
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अन्य बड़े देश: नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको, ब्राजील, चिली, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और इजराइल।
भारत का क्या है प्लान? क्या जल्द आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट?
भारत में हर दिन करोड़ों रुपये का लेन-देन नकद (Cash) में होता है। ऐसे में छोटे नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं या मैले हो जाते हैं। भारत ने अभी तक आधिकारिक रूप से प्लास्टिक करेंसी को पूरी तरह नहीं अपनाया है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस दिशा में बहुत ही सधे हुए कदम बढ़ा रहा है।
RBI की रणनीति:
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पायलट प्रोजेक्ट: आरबीआई ने कुछ साल पहले 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक 'फील्ड ट्रायल' (पायलट टेस्ट) किया था। इस ट्रायल का उद्देश्य भारत के अलग-अलग मौसमों (गर्मी, नमी, बारिश) में इन नोटों की मजबूती को परखना था।
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नया ट्रायल: अब ताजा जानकारी के अनुसार, आरबीआई एक और बड़े ट्रायल की तैयारी में है। इस बार शुरुआत 10 रुपये और 20 रुपये के छोटे मूल्य वाले प्लास्टिक नोटों से हो सकती है, क्योंकि बाजार में इन्हीं नोटों का सर्कुलेशन सबसे ज्यादा होता है और ये सबसे जल्दी खराब होते हैं।
हालांकि, पूरे भारत जैसे विशाल देश में इसे एक साथ लागू करने की कोई तारीख (Deadline) अभी तय नहीं हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जल्द ही देश के कुछ शहरों में ट्रायल के तौर पर छोटे प्लास्टिक नोट देखने को मिल सकते हैं।
कागज के मुकाबले क्यों इतने 'सुपरहिट' हैं प्लास्टिक के नोट?
आखिर क्यों पूरी दुनिया इन नोटों की दीवानी हो रही है? इसके मुख्य रूप से 3 बड़े कारण हैं:
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जीवनकाल (Lifespan) है बहुत लंबा: एक सामान्य कागज का नोट (विशेषकर छोटे मूल्य का) कुछ ही महीनों में घिसकर खराब हो जाता है। लेकिन, पॉलीमर नोट कागज के मुकाबले 2.5 से 4 गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। इससे सरकार को बार-बार नए नोट छापने का भारी-भरकम खर्च नहीं उठाना पड़ता।
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नकली नोटों (Fake Currency) पर लगती है लगाम: प्लास्टिक के नोटों में पारदर्शी विंडो (Transparent Window), होलोग्राफिक इमेजेज और खास मेटालिक स्याही जैसी उन्नत सुरक्षा तकनीक (Security Features) का इस्तेमाल होता है। एक आम जालसाज के लिए इनकी हूबहू नकल तैयार करना लगभग नामुमकिन होता है।
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वॉटरप्रूफ और डर्टप्रूफ (Waterproof & Hygienic): भारत जैसे देश में जहां लोग नोटों को पसीने में, मसालों के हाथों से या जेब में मोड़कर रखते हैं, वहां प्लास्टिक नोट वरदान साबित हो सकते हैं। इन पर पानी, चाय या पसीने का कोई असर नहीं होता, और गंदगी लगने पर इन्हें गीले कपड़े से साफ भी किया जा सकता है।
भारत तेजी से डिजिटल पेमेंट (UPI) की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन आज भी देश की एक बड़ी आबादी नकद लेन-देन पर निर्भर है। ऐसे में भारत के लिए 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों को बाजार में उतारना अर्थव्यवस्था को साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा।