नई दिल्ली/व्यापार डेस्क:
दुनिया इस समय एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भीषण युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस महायुद्ध का सबसे सीधा और भयानक असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में पिछले कुछ ही दिनों के भीतर लगभग 13 प्रतिशत की भयंकर तेजी दर्ज की गई है।
जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम भड़कते हैं, तो भारतीय उपभोक्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाना लाजमी है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। लेकिन, इस बार कहानी कुछ अलग है। वैश्विक हाहाकार के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने रविवार को जारी किए गए पेट्रोल और डीजल के नए रेट्स में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की है। देश के अधिकांश शहरों में ईंधन पुराने दामों पर ही बिक रहा है, जो त्योहारी और चुनावी माहौल के बीच आम आदमी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
आइए, इस पूरी खबर का विस्तार से विश्लेषण करते हैं, जानते हैं आज के ताज़ा रेट, और समझते हैं कि क्रूड में आग लगने के बावजूद भारत में कीमतें क्यों नहीं बढ़ रही हैं।
मिडिल ईस्ट का संकट और क्रूड ऑयल में 13% का उछाल
पश्चिम एशिया तेल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक क्षेत्र है। वर्तमान में जो युद्ध की स्थिति बनी हुई है—जिसमें अमेरिका, ईरान और अन्य क्षेत्रीय ताकतें आमने-सामने हैं—उसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को खतरे में डाल दिया है। लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का डर सता रहा है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि जब भी तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा होती है, सट्टेबाज और बड़े निवेशक क्रूड की खरीदारी तेज कर देते हैं, जिससे कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर जाती हैं। यही कारण है कि ब्रेंट क्रूड कुछ ही समय में 13% तक महंगा हो गया है। अगर यह तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकती हैं।
भारत में क्यों नहीं बढ़े दाम? (The India Story)
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भारत बाहर से महंगा तेल खरीद रहा है, तो देश के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़ रहे हैं? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
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तेल कंपनियों का बफर मार्जिन (Buffer Margin): पिछले कुछ महीनों में, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता था, तब भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई खास कटौती नहीं की थी। उस दौरान कंपनियों ने तगड़ा मुनाफा कमाया और अपना घाटा पूरा किया। अब उसी 'बफर प्रॉफिट' का इस्तेमाल वर्तमान संकट के दौरान कीमतों को स्थिर रखने के लिए किया जा रहा है।
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सरकार की महंगाई नियंत्रण रणनीति: महंगाई (Inflation) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा होती है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर माल ढुलाई (Transport) पर पड़ता है, जिससे फल, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा की सभी चीजें महंगी हो जाती हैं। सरकार किसी भी कीमत पर महंगाई को बेकाबू नहीं होने देना चाहती।
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रणनीतिक तेल भंडार और रूसी क्रूड: भारत ने पिछले दो सालों में रूस से रियायती दरों पर भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा, भारत के पास अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) भी हैं, जो ऐसी आपात स्थितियों में काम आते हैं और बाजार को झटके से बचाते हैं।
किन शहरों में पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये के पार?
भले ही हालिया दिनों में कीमतें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल पहले से ही आसमान छू रहा है। राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले उच्च वैट (VAT) के कारण कई राजधानियों और महानगरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है।
110 रुपये के क्लब वाले प्रमुख शहर:
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हैदराबाद: ₹115.69
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तिरुअनंतपुरम: ₹115.49
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कोलकाता: ₹113.48
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पटना: ₹113.37
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जयपुर: ₹113.32
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पुणे: ₹112.02
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बेंगलुरू: ₹111.37
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मुंबई: ₹111.21
आपके शहर में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के भाव? (विस्तृत सूची)
नीचे दी गई तालिका में देश के प्रमुख शहरों के आज के पेट्रोल और डीजल के रेट दिए गए हैं। आप देख सकते हैं कि राज्यवार करों के कारण इनमें कितना अंतर है:
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शहर का नाम
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पेट्रोल का दाम (₹/लीटर)
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डीजल का दाम (₹/लीटर)
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|---|---|---|
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नई दिल्ली
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102.12
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95.20
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नोएडा (यूपी)
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101.89
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95.37
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गुरुग्राम (हरियाणा)
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102.97
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95.64
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लखनऊ (यूपी)
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101.89
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95.36
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चंडीगढ़
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101.54
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89.47
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चेन्नई
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108.96
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100.74
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भुवनेश्वर
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108.97
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100.68
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कोलकाता
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113.48
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99.82
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मुंबई
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111.21
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97.83
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बेंगलुरू
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111.37
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99.56
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हैदराबाद
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115.69
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105.22
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जयपुर
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113.32
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98.63
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पटना
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113.37
|
99.36
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तिरुअनंतपुरम
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115.49
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104.40
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राज्यों के बीच कीमतों में इतना भारी अंतर क्यों होता है?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि पूरे देश में पेट्रोल-डीजल का एक ही दाम क्यों नहीं होता? इसका जवाब है— टैक्स का जाल (Tax Structure)।
भारत में पेट्रोल और डीजल को अभी तक जीएसटी (GST) के दायरे में नहीं लाया गया है। इसकी कीमत तय करने का फॉर्मूला कुछ इस प्रकार काम करता है:
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बेस प्राइस: जिस कीमत पर कंपनियां रिफाइनरी से तेल निकालती हैं।
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केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क (Excise Duty): यह पूरे देश में एक समान होता है।
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डीलर कमीशन: जो पेट्रोल पंप मालिकों को मिलता है।
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राज्य सरकार का वैट (Value Added Tax): यह सबसे अहम हिस्सा है। हर राज्य सरकार अपनी सुविधानुसार अलग-अलग दर से वैट वसूलती है। यही कारण है कि दिल्ली के मुकाबले राजस्थान या महाराष्ट्र में तेल महंगा होता है, क्योंकि वहां राज्य सरकार का टैक्स ज्यादा है।
घर बैठे कैसे चेक करें अपने शहर के ताज़ा रेट?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत तय होती हैं। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से हर दिन सुबह 6 बजे नई कीमतें अपडेट की जाती हैं।
उपभोक्ता बहुत ही आसानी से अपने मोबाइल के जरिए ये रेट्स जान सकते हैं:
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SMS के माध्यम से:
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अगर आप इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहक हैं, तो अपने फोन के मैसेज बॉक्स में जाएं।
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टाइप करें: RSP <स्पेस> अपने शहर का डीलर कोड
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इसे 9224992249 पर भेज दें।
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(उदाहरण: दिल्ली का कोड 102072 है, तो आप RSP 102072 लिखकर भेजेंगे।)
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मोबाइल ऐप के जरिए:
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स्मार्टफोन यूजर्स 'IndianOil ONE', 'BPCL SmartDrive', या 'HPCL My HPCL' ऐप डाउनलोड करके सीधे लाइव कीमतें देख सकते हैं।
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आधिकारिक वेबसाइट:
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आप संबंधित तेल कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर भी 'Pump Locator' या 'Fuel Price' सेक्शन में अपने शहर का नाम डालकर भाव जान सकते हैं।
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आगे क्या होने वाला है?
फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि वैश्विक तनाव का असर उनकी जेब पर नहीं पड़ रहा है। लेकिन, अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि यह स्थिरता हमेशा के लिए नहीं रह सकती। यदि पश्चिम एशिया का युद्ध लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कई हफ्तों तक टिक जाती हैं, तो तेल कंपनियों का घाटा (Under-recovery) फिर से बढ़ने लगेगा।
ऐसी स्थिति में, कंपनियों के पास अंततः खुदरा कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हालांकि, सरकार की पूरी कोशिश है कि कूटनीतिक रास्तों और रणनीतिक भंडारों का इस्तेमाल करके देश को इस वैश्विक 'ऑयल शॉक' से बचाया जा सके। तब तक के लिए, भारतीय जनता इस स्थिरता का लाभ उठा सकती है।