खबरीलाल टीम
नई दिल्ली, 23 सितंबर, 2025: भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह के शुरुआती कारोबार में रुपया 10 पैसे गिरकर ₹88.49 प्रति डॉलर पर आ गया, जिसने दो हफ्ते पहले बने अपने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। यह गिरावट एशियाई करेंसी की कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती के कारण हुई है।

 

रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपए में गिरावट के कई कारण हैं:
  • वैश्विक कारक: एशियाई बाजारों में मंदी और अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना।
  • अमेरिकी नीतियां: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियां भी इसका एक प्रमुख कारण हैं। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा दिया है।
  • H1B वीजा फीस में बढ़ोतरी: H1B वीजा की फीस बढ़ाकर $1 लाख कर दी गई है, जिसका सीधा असर भारत के आईटी सेक्टर पर पड़ेगा।

 

यह गिरावट तब हुई है, जब 2025 में अब तक रुपया 3.25% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को यह डॉलर के मुकाबले ₹85.70 पर था, जो अब ₹88.49 के स्तर पर आ गया है।

 

आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपए के कमजोर होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा:
  • महंगे आयात: भारत के लिए विदेशी सामान आयात करना महंगा हो जाएगा। इसका असर मोबाइल फोन, लैपटॉप, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर भी देखने को मिल सकता है।
  • विदेश में पढ़ाई और यात्रा: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरने से विदेश में पढ़ाई करना और घूमना भी महंगा हो गया है। अब छात्रों और पर्यटकों को $1 के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।

 

करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
किसी भी करेंसी की कीमत उसके फॉरेन करेंसी रिजर्व पर निर्भर करती है। अगर भारत के पास डॉलर का भंडार घटता है, तो रुपया कमजोर होता है। इसे फ्लोटिंग रेट सिस्टम कहते हैं।
 
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