खबरीलाल टीम
साल 2025 (Year End 2025) अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज यानी बुधवार, 31 दिसंबर को सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक तरफ निवेशक नए साल के जश्न की तैयारियों में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ सोने और चांदी की कीमतों में साल के आखिरी दिन बड़ी गिरावट (Correction) देखने को मिली है। लगातार दूसरे दिन कीमती धातुओं के दाम नीचे आए हैं, जिससे उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है जो शादियों के सीजन के लिए खरीदारी का प्लान बना रहे थे।READ ALSO:-UP Ayurvedic Doctors Surgery Permission: 2026 से यूपी में 'मिक्सोपैथी' की तैयारी! अब आयुर्वेदिक डॉक्टर करेंगे बवासीर, मोतियाबिंद और पथरी का ऑपरेशन; जानें क्या है सरकार का फुल प्लान

 

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,500 रुपये टूटकर 1,33,099 रुपये पर आ गया है। वहीं, चांदी में भी भारी बिकवाली हावी रही और यह लगभग 2,900 रुपये सस्ती होकर 2,29,433 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है।

 

हालांकि, यह गिरावट 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसी ही है, क्योंकि पिछले एक साल में सोने और चांदी ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसने शेयर बाजार और रियल एस्टेट जैसे तमाम एसेट क्लास को पीछे छोड़ दिया है। आइये, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आज के ताज़ा भाव क्या हैं, बीते एक साल में निवेशकों ने कितना मुनाफा कमाया और साल 2026 में इन कीमती धातुओं की चाल कैसी रहने वाली है।

 

1. आज का बाज़ार: क्यों आई कीमतों में गिरावट?

बीते कुछ दिनों से सर्राफा बाजार में रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखी जा रही थी। ठीक दो दिन पहले, यानी 29 दिसंबर 2025 को सोने और चांदी ने अपना अब तक का सबसे उच्चतम स्तर (All Time High) छू लिया था।
  • सोने का हाई: 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम (29 दिसंबर)।
  • चांदी का हाई: 2,43,483 रुपये प्रति किलोग्राम (29 दिसंबर)।

 

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज बढ़त के बाद 'मुनाफावसूली' (Profit Booking) होना तय था। साल के आखिरी दिन ट्रेडर अपनी पोजीशन काट रहे हैं और मुनाफा घर ले जा रहे हैं, जिसके चलते आज कीमतों में गिरावट आई है।

 

IBJA के ताज़ा रेट्स (31 दिसंबर 2025):

धातु (Metal)
आज का भाव (Today)
कल का भाव (Yesterday)
गिरावट (Drop)
सोना (Gold 24K)
₹1,33,099 / 10g
₹1,34,599 / 10g
₹1,500 (▼)
चांदी (Silver 999)
₹2,29,433 / 1kg
₹2,32,329 / 1kg
₹2,896 (▼)

 

2. साल 2025 का लेखा-जोखा: निवेशकों के लिए 'गोल्डन ईयर'

अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो साल 2025 उन निवेशकों के लिए यादगार साबित हुआ है जिन्होंने सोने और चांदी पर दांव लगाया था। महंगाई और वैश्विक तनाव के बीच सोना सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) बनकर उभरा, वहीं चांदी ने अपनी 'इंडस्ट्रियल डिमांड' के दम पर तो सारे रिकॉर्ड ही ध्वस्त कर दिए।

 

एक साल में कितना बढ़ा भाव?

  1. सोना (Gold Return):
    बीते एक साल में सोने की कीमत में 75% का उछाल आया है।
    • 31 दिसंबर 2024: 76,162 रुपये (प्रति 10 ग्राम)
    • 31 दिसंबर 2025: 1,33,099 रुपये (प्रति 10 ग्राम)
    • कुल बढ़त: 56,937 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  2. चांदी (Silver Return):
    चांदी ने प्रदर्शन के मामले में सोने को भी पछाड़ दिया है। इसमें 167% की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है।
    • 31 दिसंबर 2024: 86,017 रुपये (प्रति किलो)
    • 31 दिसंबर 2025: 2,29,433 रुपये (प्रति किलो)
    • कुल बढ़त: 1,43,416 रुपये प्रति किलो।

 

इसका मतलब यह है कि अगर किसी ने एक साल पहले 1 लाख रुपये की चांदी खरीदी होती, तो आज उसकी कीमत बढ़कर 2.67 लाख रुपये हो गई होती। इतना रिटर्न बैंक एफडी या म्यूचुअल फंड्स में भी आसानी से नहीं मिलता।

 

3. सोने में तेजी के 3 प्रमुख 'ग्लोबल कारण'

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमतों में आग लगने के पीछे सिर्फ स्थानीय कारण नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
  • डॉलर इंडेक्स में कमजोरी:
    अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Fed Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला जारी है। जब ब्याज दरें घटती हैं, तो अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की 'होल्डिंग कॉस्ट' कम हो जाती है, जिससे निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं।
  • जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension):
    रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। जब दुनिया में युद्ध या अस्थिरता का माहौल होता है, तो शेयर बाजार में जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे समय में निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित मानते हैं। इसे 'सेफ हेवन डिमांड' कहा जाता है।
  • सेंट्रल बैंकों की अंधाधुंध खरीदारी:
    सिर्फ आम आदमी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (खासकर चीन, रूस और भारत) अपने खजाने में डॉलर की जगह सोना भर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक साल में सेंट्रल बैंकों ने 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। जब बड़े खरीदार बाजार में आते हैं, तो दाम बढ़ना स्वाभाविक है।

 

4. चांदी क्यों बनी 'नया सोना'? (Silver's Industrial Boom)

चांदी अब सिर्फ पायल या सिक्के बनाने वाली धातु नहीं रह गई है। यह एक महत्वपूर्ण 'इंडस्ट्रियल मेटल' बन चुकी है। चांदी की कीमतों में 167% की तेजी के पीछे ये तीन बड़े कारण हैं:

 

  1. इंडस्ट्रियल और ग्रीन एनर्जी डिमांड:
    आज के दौर में सोलर पैनल (Solar Panels), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और 5G इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का भारी इस्तेमाल हो रहा है। जैसे-जैसे दुनिया ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है, चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है।
  2. ट्रंप का टैरिफ डर और ग्लोबल सप्लाई:
    अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिका की नीतियों (विशेषकर टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों) के कारण अनिश्चितता है। अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं ताकि भविष्य में सप्लाई चेन बाधित न हो।
  3. मैन्युफैक्चरिंग होड़:
    प्रोडक्शन रुकने के डर से स्मार्टफोन और ईवी निर्माता कंपनियां पहले से ही चांदी खरीद कर रख रही हैं। सप्लाई सीमित है और डिमांड बहुत ज्यादा, यही अर्थशास्त्र का नियम चांदी के भाव को आसमान पर ले जा रहा है।

 

5. साल 2026 का आउटलुक: क्या 2.75 लाख तक जाएगी चांदी?

आज की गिरावट को देखकर अगर आप सोच रहे हैं कि तेजी का दौर खत्म हो गया है, तो एक्सपर्ट्स की राय इससे अलग है।

 

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि चांदी की डिमांड में जो तेजी (Bull Run) है, वह अभी लंबी चलेगी।

 

  • चांदी का टारगेट: उनका अनुमान है कि अगले 1 साल में चांदी 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है। इंडस्ट्रियल डिमांड इसमें मुख्य ट्रिगर रहेगी।
  • सोने का भविष्य: वहीं, सोने की चमक भी फीकी नहीं पड़ेगी। अगले साल तक सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर सकता है।

 

इसलिए, बाजार के जानकारों की सलाह है कि हर बड़ी गिरावट (Dips) पर खरीदारी करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

 

6. उपभोक्ता गाइड: शहर-दर-शहर क्यों बदल जाते हैं रेट?

अक्सर लोग सवाल करते हैं कि टीवी या इंटरनेट पर दिखने वाला रेट और सुनार की दुकान के रेट में अंतर क्यों होता है?

 

आपको बता दें कि IBJA (India Bullion and Jewellers Association) द्वारा जारी किए गए रेट्स 'बेंचमार्क' होते हैं। इनमें 3% GST और मेकिंग चार्ज (Making Charges) शामिल नहीं होते।

 

  • फाइनल कीमत: जब आप ज्वेलरी खरीदते हैं, तो सोने के बेस रेट में 3% जीएसटी और 8% से 20% तक मेकिंग चार्ज जुड़ जाता है। यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई, मेरठ या लखनऊ में सोने के भाव में थोड़ा अंतर होता है।
  • गोल्ड लोन और बॉन्ड: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जब 'सोवरेन गोल्ड बॉन्ड' (SGB) जारी करता है या बैंक जब गोल्ड लोन देते हैं, तो वे इसी IBJA रेट को आधार मानते हैं।

 

क्या यह खरीदारी का सही समय है?

साल 2025 की विदाई के साथ सोने और चांदी ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। आज की गिरावट उन लोगों के लिए एक अवसर हो सकती है जो बढ़ती कीमतों के कारण बाजार से दूर हो गए थे। एक्सपर्ट्स का आउटलुक 2026 के लिए भी 'पॉजिटिव' है।

 

अगर आप निवेश के नजरिए से देख रहे हैं, तो फिजिकल गोल्ड के अलावा डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) या ईटीएफ (ETF) भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, जहाँ आपको मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता। लेकिन अगर घर में शादी है, तो आज की गिरावट का फायदा उठाकर बुकिंग की जा सकती है।
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