भारतीय कंज्यूमर गुड्स (FMCG) बाजार में '100% शुद्धता' के दावों को लेकर देश के सबसे बड़े खाद्य नियामक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और दिग्गजों में शुमार डाबर इंडिया लिमिटेड (Dabur India Ltd.) के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। FSSAI द्वारा पैकेज्ड फूड्स पर '100% Pure', '100% Natural' और '100% Organic' जैसे मार्केटिंग दावों पर तुरंत प्रभाव से लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ डाबर ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।READ ALSO:-विवादों से घिरे इंफ्लूएंसर शादाब जकाती का बदला अंदाज: मेरठ में सड़क पर उतरकर कांवड़ियों को बांटे फल और दवाएं, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
6 अगस्त को दायर अपनी रिट याचिका में डाबर ने खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रेगुलेटर का यह आदेश "अविचारित, भेदभावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने वाला" है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को बड़ी राहत देते हुए FSSAI के विवादित आदेश पर 24 अगस्त तक अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है।
क्या है पूरा विवाद? '100% क्लेम' पर FSSAI का क्रैकडाउन
पूरे विवाद की जड़ FSSAI का वह सख्त रुख है, जिसके तहत प्रोसेस्ड या पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर '100%' का दावा करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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FSSAI का तर्क: फूड रेगुलेटर के अनुसार, किसी भी प्रोसेस्ड खाद्य उत्पाद पर '100% प्योर' या '100% नेचुरल' लिखना उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक (Misleading) है। FSSAI का मानना है कि ऐसे दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 के नियमों का उल्लंघन करते हैं।
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तत्काल बिक्री पर रोक: FSSAI ने 100% क्लेम वाले प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने के निर्देश दिए थे और डाबर समेत संबंधित कंपनियों से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने को कहा था।
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प्रतिस्पर्धा पर असर: FSSAI का कहना था कि ऐसे एकतरफा दावों से बाजार में मौजूद अन्य ब्रांड्स और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पादों की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है।
दिल्ली हाईकोर्ट का रुख: प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का उल्लंघन हुआ
डाबर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उच्च न्यायालय ने माना कि किसी भी कंपनी या कारोबारी संस्था के खिलाफ इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला लेने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना अनिवार्य था।
कोर्ट ने कहा कि अचानक बैन लगाने और इन्वेंट्री हटाने का आदेश देने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' (Show-Cause Notice) जारी नहीं करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने 24 अगस्त तक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिससे डाबर को अपने उत्पादों की बिक्री जारी रखने की अस्थायी राहत मिल गई है।
डाबर का तीखा प्रहार: "कॉम्पिटिटर्स के कमर्शियल इंटरेस्ट साध रहा FSSAI"
हाईकोर्ट में पेश अपनी याचिका में डाबर इंडिया ने FSSAI के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और रेगुलेटर की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं:
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उद्योग का सामान्य शब्द: डाबर का कहना है कि '100%' का दावा किसी अन्य मैन्युफैक्चरर या ब्रांड की तुलना किए बिना, स्वतंत्र रूप से उत्पाद की गुणवत्ता दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी दुनिया और भारत के एफएमसीजी उद्योग में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला मानक शब्द है।
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जनहित नहीं, कॉर्पोरेट हित: कंपनी ने अदालत में दावा किया कि FSSAI का यह अचानक लिया गया फैसला किसी जनहित (Public Interest) में जारी नहीं किया गया है, बल्कि उद्योग की प्रतिस्पर्धी कंपनियों के व्यावसायिक हितों को फायदा पहुंचाने की नीयत से प्रेरित दिखता है।
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सुधार का मौका नहीं दिया: डाबर ने शिकायत की कि FSSAI ने उन्हें कोई सुधार का अवसर (Opportunity of Correction) या नोटिस दिए बिना सीधे बिक्री बैन करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया।
₹150 करोड़ की इन्वेंट्री दांव पर, 11 फ्लैगशिप ब्रांड्स प्रभावित
FSSAI के इस अचानक आए आदेश का सबसे बड़ा आर्थिक झटका डाबर के सप्लाई चेन और पोर्टफोलियो को लगा है।
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प्रभावित ब्रांड्स: एफएसएसएआई के आदेश से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें भारत के घर-घर में पहचाने जाने वाले डाबर हनी (Dabur Honey), डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल (Dabur Virgin Coconut Oil) और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर (Real Activ Coconut Water) जैसे प्रीमियम ब्रांड्स शामिल हैं।
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FSSAI पर लापरवाही का आरोप: डाबर ने याचिका में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि FSSAI ने लेबल्स की जमीनी जांच किए बिना ही आदेश लिस्ट तैयार कर दी।
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बिना क्लेम वाले प्रॉडक्ट भी लपेटे में: कंपनी के अनुसार, 'डाबर होममेड कोकोनट मिल्क' और 'डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल' के लेबल्स पर कभी '100%' का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी FSSAI ने उन्हें बैन की सूची में शामिल कर दिया।
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बर्बादी का खतरा: यदि यह बैन तुरंत लागू होता, तो डाबर की ₹150 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की इन्वेंट्री (तैयार माल और पैकेजिंग मटेरियल) पूरी तरह नष्ट हो जाती।
सप्लाई चेन में हड़कंप: ब्लिंकिट का अल्टीमेटम और हिल्टन का फैसला
FSSAI का यह आदेश जैसे ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुआ, बाजार में डाबर की रिटेल और ऑनलाइन सप्लाई चेन अचानक चरमरा गई। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बड़े होटल ब्रांड्स ने कानूनी झंझटों से बचने के लिए तेजी से कदम उठाए:
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ब्लिंकिट (Blinkit) का अल्टीमेटम: 4 अगस्त को जोमैटो के स्वामित्व वाले क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'ब्लिंकिट' ने डाबर को एक आधिकारिक अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रभावित 100% क्लेम वाले प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल (रिमूव) कर दिया। ब्लिंकिट ने स्पष्ट किया कि इस विवाद से उत्पन्न किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी।
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हिल्टन होटल्स (Hilton Hotels): प्रसिद्ध इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी चेन हिल्टन होटल्स ने भी एहतियातन कदम उठाते हुए मामला सुलझने तक डाबर के प्रभावित उत्पादों को अपनी दैनिक आपूर्ति सूची से बाहर करने का प्रस्ताव रखा।
कंपनी पहले से ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव
कानूनी लड़ाई के बीच डाबर ने यह भी साफ किया है कि वह एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट संस्था के रूप में FSSAI के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए पहले से ही प्रयासरत थी।
कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, FSSAI द्वारा उठाए गए बिंदुओं का संज्ञान लेते हुए उसने अपने अधिकांश प्रभावित प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और आधिकारिक वेबसाइट्स से '100%' का दावा हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी। अधिकांश पैकेजिंग को नए डिजाइन वाले लेबल्स से बदला जा चुका है या बदलाव के अंतिम चरण में है। ऐसे में अचानक बिक्री रोकने का आदेश पूरी तरह से तर्कहीन था।
FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे की राह
बीते कुछ महीनों से FSSAI देश की प्रमुख FMCG कंपनियों, मसालों के ब्रांड्स और रेस्टोरेंट चेंस पर भ्रामक दावों, आर्टिफिशियल कलर्स, हाइजीन और पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। रेगुलेटर का साफ संदेश है कि बिना किसी ठोस वैज्ञानिक सत्यापन के मार्केटिंग के लिए बड़े-बड़े दावे नहीं किए जा सकते।
फिलहाल, डाबर द्वारा लगाए गए संगीन आरोपों और हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर पर FSSAI की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए 24 अगस्त तक के स्टे के बाद अब पूरे एफएमसीजी उद्योग और शेयर बाजार की निगाहें 24 अगस्त को होने वाली अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं।
नॉलेज पार्ट: जानिए क्या कहता है FSSAI का 'क्लेम्स रेगुलेशन 2018'?
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कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, यदि FSSAI को किसी प्रोडक्ट के लेबल, विज्ञापन या दावे पर आपत्ति होती है, तो पहले संबंधित खाद्य व्यवसाय ऑपरेटर (FBO) को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए लिखित नोटिस दिया जाना चाहिए।
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सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट नियम: FSSAI का मानना है कि किसी भी प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट वाले खाद्य पदार्थ में '100% Pure' या '100% Natural' लिखना तकनीकी रूप से गलत है, क्योंकि प्रोसेसिंग के दौरान उत्पाद का मूल स्वरूप बदलता है। वहीं, कंपनियों का तर्क होता है कि शहद, शुद्ध नारियल तेल या सीधे फल से निकले नारियल पानी जैसे प्राकृतिक उत्पादों में 100% का दावा पूरी तरह तर्कसंगत और सत्य है।


