खबरीलाल टीम
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में सफर करने वाले आम मुसाफिरों, डेली कम्यूटर्स और गाड़ी मालिकों की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बम फूटा है। एक समय था जब सीएनजी (CNG - Compressed Natural Gas) को पेट्रोल और डीजल का सबसे सस्ता और किफायती विकल्प माना जाता था। लोग अपनी गाड़ियों में लाखों रुपये खर्च करके सीएनजी किट लगवाते थे ताकि ईंधन के बढ़ते खर्च से बचा जा सके। लेकिन अब यह राहत पूरी तरह से खत्म होती नजर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अब सीएनजी के दाम भी आम आदमी की पहुंच से बाहर यानी 'आउट ऑफ कंट्रोल' हो गए हैं।Read also:-पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की 'ट्रिपल मार': 10 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम, जानिए 23 मई को आपके शहर में क्या है 1 लीटर तेल का भाव?

 

सरकारी तेल और गैस कंपनियों ने आज (23 मई 2026) सुबह से सीएनजी की कीमतों में इस महीने की तीसरी बड़ी बढ़ोतरी लागू कर दी है। महज 10 दिनों के भीतर तीन बार रेट बढ़ने से अब दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाना या कैब-ऑटो से सफर करना बेहद महंगा सौदा हो गया है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आज आपके शहर में सीएनजी का नया रेट क्या है, यह बढ़ोतरी क्यों हो रही है और इसका आपकी रसोई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर होने वाला है।

 

10 दिनों में कैसे लगा 'महंगाई का करंट': बढ़ोतरी का पूरा घटनाक्रम

राहत का दौर अब दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए एक सपना सा बन गया है। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का यह ताजा सिलसिला 15 मई को शुरू हुआ था और तब से अब तक यह तीसरी बार है जब आम जनता को झटका लगा है:

 

  1. 15 मई 2026 (पहला झटका): सरकार और गैस कंपनियों ने अचानक सीधे ₹2 प्रति किलो दाम बढ़ाए थे। यह एक बड़ा इजाफा था जिसने सभी को चौंका दिया था।
  2. 18 मई 2026 (दूसरा झटका): अभी लोग पहली बढ़ोतरी से उबर भी नहीं पाए थे कि महज तीन दिन बाद फिर से ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी गई।
  3. 23 मई 2026 (तीसरा और ताजा झटका): आज सुबह एक बार फिर गैस स्टेशनों पर नए रेट के बोर्ड टांग दिए गए हैं। इस बार भी कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया है।

 

इन लगातार हो रहे बदलावों ने दिल्ली-एनसीआर के लाखों ऑटो चालकों, ओला-उबर (Ola-Uber) कैब ड्राइवर्स और पर्सनल सीएनजी कार रखने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।

 

नई रेट लिस्ट: आपके शहर में क्या है CNG का भाव?

देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के शहरों में टैक्स स्ट्रक्चर (Tax Structure) और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज अलग-अलग होने के कारण सीएनजी की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। यूपी और हरियाणा में यह हमेशा से थोड़ी महंगी रही है। यहां देखिए आज सुबह से लागू हुए नए रेट्स:
 
शहर / क्षेत्र (City/Region)
पुरानी कीमत (₹/किग्रा)
नई कीमत (23 मई से)
कुल बढ़ोतरी (आज)
दिल्ली (Delhi)
₹80.09
₹81.09
+₹1.00
नोएडा (Noida) / ग्रेटर नोएडा
₹88.70
₹89.70
+₹1.00
गाजियाबाद (Ghaziabad)
₹88.70
₹89.70
+₹1.00
गुरुग्राम (Gurugram)
₹87.00+
₹88.00 पार
+₹1.00
 
नोट: ये कीमतें आईजीएल (IGL) और अन्य प्रमुख गैस वितरक कंपनियों द्वारा जारी की गई हैं और पंपों पर आज सुबह से लागू हो चुकी हैं।

 

उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी की नई कीमत ₹89.70 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह ₹90 के मनोवैज्ञानिक स्तर से महज कुछ पैसे ही कम है। वहीं, हरियाणा के गुरुग्राम (Gurugram) में भी दाम ₹88 के पार चले गए हैं।

 

आखिर क्यों आसमान छू रहे हैं CNG के दाम? (वजह क्या है?)

लगातार बढ़ रहे इन दामों के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। एनर्जी सेक्टर के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं:

 

  • डोमेस्टिक गैस की शॉर्टेज (Domestic Gas Shortage): घरेलू स्तर पर भारत में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के उत्पादन में कई तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतें आ रही हैं। जितनी डिमांड बाजार में है, उतनी सप्लाई घरेलू उत्पादन से पूरी नहीं हो पा रही है। जब लोकल सप्लाई कम होती है, तो कंपनियों को विदेशी गैस पर निर्भर होना पड़ता है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में एनर्जी क्राइसिस (International Energy Crisis): वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical tensions) और सप्लाई चेन के बाधित होने के कारण इंटरनेशनल मार्केट में एलएनजी (LNG - Liquefied Natural Gas) के दाम काफी ऊंचे बने हुए हैं।
  • इनपुट कॉस्ट और अंडर-रिकवरी (Input Cost & Under-recovery): गैस कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है। इसके चलते उनकी 'इनपुट कॉस्ट' काफी बढ़ गई है। कंपनियां अपने नुकसान (Under-recovery) को पाटने और मार्जिन को बनाए रखने के लिए धीरे-धीरे लेकिन लगातार खुदरा कीमतों (Retail Prices) में बढ़ोतरी कर रही हैं।

 

आम आदमी की जेब पर 'चौतरफा प्रहार': क्या-क्या होगा प्रभावित?

सीएनजी के महंगे होने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपको गैस पंप पर ज्यादा पैसे देने होंगे। इसका असर इकोनॉमी के कई हिस्सों पर एक चेन रिएक्शन (Chain Reaction) की तरह पड़ता है:

 

1. ऑटो और कैब का सफर होगा महंगा (Fare Revision Demand): सीएनजी के इतने महंगे होने का सीधा असर अब दिल्ली-एनसीआर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर पड़ेगा। ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे इतने महंगे ईंधन के साथ पुरानी दरों पर गाड़ियां नहीं चला सकते। उन्होंने सरकार से किराया बढ़ाने (Fare Revision) की जोरदार मांग शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में ओला, उबर, रेपिडो और लोकल टैक्सियों का सफर आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है।
2. फल, सब्जियां और जरूरी सामान की महंगाई: दिल्ली-एनसीआर में रोजाना हजारों छोटे-बड़े कमर्शियल वाहन (जैसे टाटा ऐस, महिंद्रा पिकअप) सीएनजी पर चलते हैं। ये वाहन आजादपुर मंडी, ओखला और गाजीपुर जैसी मंडियों से फल, सब्जियां, दूध और राशन की सप्लाई पूरी दिल्ली में करते हैं। ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से मालभाड़ा (Freight charges) बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर सब्जियों और फलों की रिटेल कीमतों पर पड़ेगा। अंततः यह बोझ भी आम उपभोक्ता को ही उठाना होगा।

 

3. डेली कम्यूटर्स का बिगड़ा बजट: जो नौकरीपेशा लोग रोजाना दिल्ली से नोएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम अप-डाउन करते हैं, उनका महीने का फ्यूल बजट हजारों रुपये बढ़ गया है। जो व्यक्ति रोज 50 से 70 किलोमीटर गाड़ी चलाता है, उसे अब हर महीने सीएनजी के लिए पहले के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत अधिक रकम खर्च करनी होगी।

 

"हम सीएनजी गाड़ी इसलिए लेते हैं ताकि पेट्रोल का खर्च बच सके। लेकिन जब सीएनजी ही ₹90 के करीब पहुंच जाए, तो सीएनजी किट लगवाने और लंबी लाइनों में लगने का क्या फायदा? सरकार को आम आदमी के बारे में सोचना चाहिए।" - दिल्ली के एक दैनिक यात्री की प्रतिक्रिया

 

क्या अब इलेक्ट्रिक वाहन (EV) ही बचा है एकमात्र विकल्प?

सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कार खरीदार अब सीएनजी की बजाय सीधे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ रुख करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, ईवी की शुरुआती कीमत अभी भी पेट्रोल/सीएनजी कारों के मुकाबले काफी ज्यादा है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन लंबी अवधि में रनिंग कॉस्ट (Running Cost) के मामले में अब ईवी ही एकमात्र किफायती विकल्प नजर आ रहा है।

 

मई 2026 का यह महीना दिल्ली-एनसीआर की जनता के लिए महंगाई के लिहाज से काफी भारी साबित हो रहा है। पेट्रोल-डीजल के बाद सीएनजी की कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। सरकार और गैस कंपनियों को इस दिशा में जल्द ही कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम कम नहीं होते हैं या सरकार एक्साइज ड्यूटी व वैट (VAT) में कोई राहत नहीं देती है, तो आने वाले दिनों में महंगाई का यह ग्राफ और भी ऊपर जा सकता है। फिलहाल, जनता को इस 'महंगाई की मार' के साथ ही तालमेल बिठाना होगा।
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