नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: वर्तमान समय में घर, गाड़ी या निजी जरूरतों (Personal Loan) के लिए लोन लेना आम बात हो गई है। लेकिन आर्थिक स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी-कभी वित्तीय संकट के कारण लोग समय पर अपनी ईएमआई (EMI) का भुगतान नहीं कर पाते हैं। ईएमआई बाउंस होते ही कर्जदारों के मन में सबसे बड़ा डर संपत्ति (घर या वाहन) छिन जाने और रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी का होता है।
कई बार रिकवरी एजेंट कर्ज वसूलने के लिए कानून को ताक पर रखकर ग्राहकों को गालियां देते हैं, उन्हें डराते हैं और उनके रिश्तेदारों को फोन करके उन्हें सामाजिक रूप से शर्मिंदा करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंक का पैसा वसूलना जायज है, लेकिन उसका तरीका पूरी तरह से कानूनी और मानवीय होना चाहिए।
एक या दो EMI चूकने का मतलब संपत्ति छिनना नहीं है!
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि अगर आपकी एक ईएमआई मिस हो गई, तो बैंक तुरंत आपके घर या गाड़ी पर ताला लगा देगा। लेकिन कानूनी तौर पर ऐसा बिल्कुल नहीं है। बैंक को संपत्ति जब्त करने से पहले एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
जब कोई कर्जदार लगातार 90 दिनों (यानी 3 महीने) तक अपने लोन की किस्त नहीं चुकाता है, तब जाकर बैंक उस लोन खाते को एनपीए (NPA - Non-Performing Asset) यानी 'डूबत खाता' घोषित करता है। इससे पहले बैंक आपको सिर्फ रिमाइंडर भेज सकता है या लेट फीस लगा सकता है, लेकिन संपत्ति जब्त करने की कोई कार्रवाई शुरू नहीं कर सकता।
कब और कैसे बैंक कर सकता है संपत्ति पर कानूनी कार्रवाई?
संपत्ति की जब्ती केवल सिक्योर्ड लोन (Secured Loans) जैसे- होम लोन, ऑटो लोन या प्रॉपर्टी के बदले लोन (LAP) के मामलों में ही की जा सकती है। पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड जैसे अनसिक्योर्ड लोन में कोई संपत्ति गिरवी नहीं होती, इसलिए वहां जब्ती का सवाल ही नहीं उठता।
खाता NPA घोषित होने के बाद बैंक SARFAESI (सरफेसी) एक्ट की धारा 13(2) के तहत कार्रवाई करता है:
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60 दिन का नोटिस: बैंक कर्जदार को बकाया चुकाने के लिए 60 दिन का लिखित नोटिस जारी करता है।
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कर्जदार का अधिकार: कर्जदार को इस नोटिस पर अपनी आपत्ति या जवाब दर्ज करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
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बैंक की जिम्मेदारी: अगर कर्जदार कोई जवाब या आपत्ति देता है, तो बैंक को उस पर विचार करना होगा और उसे खारिज करने का कारण 15 दिनों के भीतर लिखित में बताना होगा।
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सिंबॉलिक पजेशन: अगर 60 दिन के नोटिस के बाद भी कोई समाधान नहीं निकलता है, तो बैंक संपत्ति का 'प्रतीकात्मक कब्जा' (Symbolic Possession) लेता है और नीलामी से पहले भी 30 दिन का पब्लिक नोटिस देता है।
इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगते हैं। इसलिए घबराने के बजाय बैंक से बातचीत कर समाधान निकालना बेहतर होता है।
रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी पर RBI की 'लक्ष्मण रेखा'
आरबीआई ने रिकवरी एजेंटों के उत्पीड़न को रोकने के लिए बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। अगर कोई भी थर्ड-पार्टी रिकवरी एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो बैंक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
रिकवरी एजेंट क्या नहीं कर सकते?
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धमकी या गाली-गलौज: एजेंट किसी भी हालत में कर्जदार के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज या मारपीट नहीं कर सकता।
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समय की पाबंदी: रिकवरी के लिए कॉल या घर पर विजिट करने का समय केवल सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही निर्धारित है। रात में या सुबह जल्दी फोन करना गैरकानूनी है।
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निजता का हनन (Privacy Violation): एजेंट कर्जदार के परिवार, पड़ोसियों, दोस्तों या उसके दफ्तर (बॉस/सहकर्मियों) को फोन करके उसे सार्वजनिक रूप से जलील नहीं कर सकते।
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गुमनाम और फर्जी कॉल्स: एजेंट अपनी पहचान छुपाकर, गुमनाम नंबरों से या फर्जी पुलिस/वकील बनकर धमकी भरे कॉल नहीं कर सकते।
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गिरफ्तारी की धमकी: लोन का भुगतान न कर पाना कोई आपराधिक मामला (Criminal Offense) नहीं बल्कि सिविल मामला (Civil Dispute) है। कोई भी एजेंट पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने या जेल भिजवाने की धमकी नहीं दे सकता।
एजेंट परेशान करे तो क्या हैं आपके कानूनी विकल्प?
अगर कोई रिकवरी एजेंट अपनी हदें पार करता है और आपको या आपके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है, तो डरे नहीं, बल्कि ये कदम उठाएं:
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सबूत इकट्ठा करें: एजेंट के सभी फोन कॉल्स रिकॉर्ड करें। वॉट्सऐप मैसेज, ईमेल और एसएमएस का स्क्रीनशॉट लेकर सुरक्षित रख लें। अगर वह घर आता है, तो उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करें और उसका आई-कार्ड (ID Card) मांगें।
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बैंक को लिखित शिकायत (Grievance Redressal): सबसे पहले बैंक के नोडल अधिकारी या ब्रांच मैनेजर को सबूतों के साथ ई-मेल करें। नियम के मुताबिक, एजेंट की किसी भी बदसलूकी की सीधी जिम्मेदारी उसी बैंक की होती है जिसने उसे काम पर रखा है।
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RBI लोकपाल (Ombudsman) से शिकायत: अगर बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करता है, तो आप रिज़र्व बैंक के ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) पोर्टल पर जाकर बैंक और एजेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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पुलिस की मदद लें: अगर एजेंट जबरदस्ती आपके घर में घुसने की कोशिश करता है, महिला सदस्यों से बदसलूकी करता है, या शारीरिक हिंसा की धमकी देता है, तो बिना देर किए डायल 112 (Police Helpline) पर कॉल करें और स्थानीय थाने में जबरन वसूली और उत्पीड़न की FIR दर्ज कराएं।
EMI न चुका पाने की स्थिति में क्या करें? (Smart Tips)
अगर आपके पास सच में पैसे नहीं हैं, तो बैंक के फोन इग्नोर करने या भागने से समस्या और बढ़ेगी। इसकी बजाय समझदारी से काम लें:
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बैंक मैनेजर से मिलें: अपनी असली समस्या (मेडिकल, जॉब लॉस) मैनेजर को बताएं। बैंक अक्सर जेनुइन मामलों में मदद करते हैं।
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लोन रीस्ट्रक्चरिंग (Loan Restructuring): बैंक से अपने लोन की अवधि (Tenure) बढ़ाने का अनुरोध करें। इससे आपकी EMI की रकम कम हो जाएगी और भुगतान करना आसान होगा।
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मोराटोरियम (Moratorium): कुछ समय (जैसे 3 से 6 महीने) के लिए EMI हॉलिडे या मोराटोरियम की मांग करें, ताकि आप नई नौकरी ढूंढ सकें या आर्थिक स्थिति सुधार सकें।
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वन-टाइम सेटलमेंट (OTS): अगर लोन चुकाना बिल्कुल असंभव हो गया है, तो आप बैंक के साथ बातचीत करके मूल रकम पर 'वन-टाइम सेटलमेंट' कर सकते हैं, हालांकि इससे आपका CIBIL स्कोर खराब होगा।
कर्ज लेना और उसे चुकाना एक वित्तीय जिम्मेदारी है, लेकिन वित्तीय मजबूरी कोई अपराध नहीं है। भारत का कानून कर्जदारों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। अपने अधिकारों को जानें, जागरूक रहें और किसी भी रिकवरी एजेंट की गैरकानूनी धमकियों के आगे न झुकें।