खबरीलाल टीम
भारत के ग्रामीण रोजगार और आर्थिकी के परिदृश्य में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। पिछले करीब दो दशकों से भारत के करोड़ों ग्रामीण और गरीब परिवारों की आजीविका का सबसे मजबूत सहारा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी 'मनरेगा' (MNREGA) योजना अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। 1 जुलाई, 2026 से केंद्र सरकार इस पुरानी व्यवस्था को आधिकारिक तौर पर समाप्त (Repeal) कर रही है।
 
​इसकी जगह अब एक नई, आधुनिक और अत्यधिक तकनीकी रूप से सुसज्जित रोजगार योजना लागू होने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ लोगों को दिहाड़ी मजदूरी देना नहीं है, बल्कि उन्हें कुशल बनाकर देश के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना है। यह बड़ा कदम 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर माना जा रहा है।
 

​आखिर दो दशक बाद क्यों बंद करनी पड़ी मनरेगा योजना?

​मनरेगा योजना ने अपने शुरुआती वर्षों में ग्रामीण भारत में रोजगार देने और गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन समय के साथ, इस योजना में कई गंभीर प्रशासनिक, ढांचागत और तकनीकी खामियां सामने आने लगी थीं। सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा की गई लंबी और व्यापक समीक्षा में मनरेगा को बंद करने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण सामने आए हैं:
 
  • भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा: कई राज्यों से लगातार फर्जी मस्टर रोल बनाने और काम पर बिना गए ही फर्जी हाजिरी (अटेंडेंस) लगा देने की गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इससे सरकारी खजाने का पैसा बिचौलियों की जेब में जा रहा था।
  • स्थायी संपत्तियों की कमी: पुरानी योजना में अक्सर ऐसे काम कराए जाते थे (जैसे कच्चे गड्ढे खोदना) जो अगली बारिश में फिर से खराब हो जाते थे। गुणवत्तापूर्ण और स्थायी संपत्तियों (Durable Assets) के निर्माण की भारी कमी थी।
  • फंड का भारी दुरुपयोग: काम पूरा किए बिना ही फंड निकाल लेने और अधूरे प्रोजेक्ट्स छोड़ देने के कारण इस योजना पर सवाल उठने लगे थे।
 
​बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डिजिटल युग की नई चुनौतियों को देखते हुए, सरकार का यह स्पष्ट मानना था कि अब पुराने ढांचे में सुधार से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक पूरी तरह से पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख (Result-Oriented) योजना की जरूरत है।
 

​अब ग्रामीण विकास की कमान संभालेगा 'VB-G RAM G'

​1 जुलाई से जो नई व्यवस्था लागू हो रही है, उसका विजन बहुत ही व्यापक है। इस नई योजना का पूरा नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण' (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission-Grameen - VB-G RAM G) रखा गया है।
 
​केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, यह योजना रोजगार के साथ-साथ आजीविका के नए साधन पैदा करेगी और ग्रामीणों के कौशल (Skill) को भी निखारेगी। अब गांवों में केवल मिट्टी ढोने का काम नहीं होगा, बल्कि इसके तहत ऐसे स्थायी ढांचे (Infrastructure) बनाए जाएंगे जो भविष्य में गांव के काम आएं, जैसे— बेहतर जल संरक्षण प्रणालियां, पक्की पंचायत संपत्तियां और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले प्रोजेक्ट्स।
 

मनरेगा और VB-G RAM G में क्या है मुख्य अंतर?

 
मानक (Parameters)
मनरेगा (MNREGA)
वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G)
रोजगार की गारंटी
100 दिन (प्रति वित्तीय वर्ष)
125 दिन (प्रति वित्तीय वर्ष)
योजना का मुख्य फोकस
मुख्य रूप से अकुशल शारीरिक श्रम
मजदूरी, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन
उपस्थिति (Attendance)
मैनुअल रजिस्टर / आधार आधारित
फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान)
परिसंपत्ति निर्माण
अस्थायी/कच्चे काम पर ज्यादा जोर
स्थायी अवसंरचना (Durable Assets) का निर्माण
तकनीकी निगरानी
सीमित डिजिटल मॉनिटरिंग
रियल-टाइम ट्रैकिंग और शत-प्रतिशत 
सबसे बड़ा फायदा: अब मिलेगी पूरे 125 दिनों के काम की गारंटी
इस नई 'वीबी-जी राम जी' (VB-G RAM G) योजना के लागू होने से ग्रामीण कामगारों के लिए सबसे बड़ी और खुश कर देने वाली खबर यह है कि इसमें काम के दिन बढ़ा दिए गए हैं। जहां पुरानी मनरेगा योजना में एक ग्रामीण परिवार को साल भर में केवल 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती थी, वहीं नई व्यवस्था के तहत इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
 
​रोजगार के दिनों में 25 दिन का यह इजाफा उन गरीब परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक सुरक्षा कवच साबित होगा, जो पूरी तरह से मजदूरी पर ही निर्भर हैं। इसके अलावा, इस योजना को केवल शारीरिक श्रम तक सीमित न रखकर, इसके साथ कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रमों को जोड़ा गया है ताकि कामगार आगे चलकर पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकें।
 

​तकनीक (Technology) से रुकेगा भ्रष्टाचार: फेस ऑथेंटिकेशन से लगेगी हाजिरी

​पुरानी योजना की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार थी, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने नई योजना को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया है:
 
  • चेहरे की पहचान (Face Authentication): अब फर्जी अटेंडेंस लगाना लगभग असंभव होगा। कामगारों की उपस्थिति कार्यस्थल पर चेहरे की पहचान करने वाली अत्याधुनिक तकनीक के जरिए लगाई जाएगी।
  • डिजिटल पेमेंट: मजदूरी का भुगतान बिना किसी लालफीताशाही और देरी के सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में सुनिश्चित करने के लिए एडवांस डिजिटल पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • रियल-टाइम निगरानी: मस्टर रोल पूरी तरह से डिजिटल होंगे और काम की प्रगति की निगरानी रियल-टाइम (Real-time) और जियो-टैगिंग (Geo-tagging) के जरिए की जाएगी।
  • सख्त सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): गांव का हर नागरिक डिजिटल पोर्टल के जरिए देख सकेगा कि किस योजना पर कितना पैसा खर्च हो रहा है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
 

​पुराने जॉब कार्ड और अधूरे कामों का क्या होगा?

​इस बदलाव को लेकर कई ग्रामीणों के मन में डर है कि उनके पुराने जॉब कार्ड का क्या होगा? सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक पूरी तरह से निर्बाध (Seamless) प्रक्रिया होगी। 1 जुलाई से मनरेगा के तहत चल रहे सभी अधूरे काम, पुरानी संपत्तियां, फंड और जॉब कार्ड्स के रिकॉर्ड स्वतः ही नई 'VB-G RAM G' योजना के तहत ट्रांसफर हो जाएंगे। बशर्ते कामगारों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा हो, किसी भी मजदूर को काम से वंचित नहीं किया जाएगा।
​🌧️ मानसून लेगा नई योजना की पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
​यह महत्वाकांक्षी योजना ऐसे समय में जमीन पर उतर रही है, जब देश मानसूनी सीजन के बीच में है। इस साल कई मौसम एजेंसियों ने देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश (कमजोर मानसून) होने की आशंका जताई है।
 
​अगर मानसून कमजोर रहता है, तो खरीफ की फसल और कृषि कार्यों पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। खेती में काम कम होने से ग्रामीण इलाकों के लोग अचानक वैकल्पिक रोजगार की तलाश में इस नई योजना की तरफ रुख करेंगे। रोजगार की मांग में आने वाले इस अचानक भारी उछाल को यह नई 'VB-G RAM G' व्यवस्था कितनी कुशलता से संभाल पाती है और लोगों को समय पर 125 दिन का काम कैसे मुहैया कराती है, यही इसकी पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।

 

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