ग्रेटर नोएडा (ब्यूरो)। दिल्ली-एनसीआर में छाई घनी धुंध और जीरो विजिबिलिटी (Zero Visibility) के बीच ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यहां प्रशासन की घोर लापरवाही और कोहरे के कारण एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार 70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे (नाले) में जा गिरी। युवक ने डूबते हुए अपने पिता को आखिरी कॉल की और जान बचाने की गुहार लगाई, लेकिन जब तक मदद पहुंची, बहुत देर हो चुकी थी। मृतक की पहचान गुरुग्राम निवासी युवराज मेहता (27 वर्ष) के रूप में हुई है। इस घटना ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। क्या है पूरा घटनाक्रम? घटना बीती रात (शनिवार) की है। नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के प्रभारी सर्वेश कुमार के अनुसार, गुरुग्राम में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत युवराज मेहता अपनी कार से ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 की तरफ से गुजर रहे थे। उस समय इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था और विजिबिलिटी लगभग शून्य थी। रास्ते में कोई रिफ्लेक्टर (Reflector) या चेतावनी साइनबोर्ड न होने के कारण युवराज को सड़क और नाले के बीच का अंतर पता नहीं चला। उनकी कार अनियंत्रित होकर जल निकासी बेसिन (Drainage Basin) को अलग करने वाली एक पहाड़ी नुमा जगह से टकराई और सीधे 70 फीट नीचे गहरे पानी में जा गिरी। "पापा, मुझे बचा लो..." वो आखिरी कॉल इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू युवराज की अपने पिता से हुई आखिरी बातचीत है। कार पानी में गिरने के बाद भी युवराज की सांसें चल रही थीं। उसने डूबते हुए किसी तरह अपना फोन निकाला और अपने पिता राजकुमार को कॉल किया। कांपती आवाज में उसने कहा, "पापा, मेरी गाड़ी गड्ढे में गिर गई है। मैं डूब रहा हूं... मैं मरना नहीं चाहता, प्लीज मुझे आकर बचा लीजिए।" बेटे की यह बात सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत युवराज का मोबाइल नंबर ट्रेस किया और लोकेशन को फॉलो करते हुए बदहवास हालत में ग्रेटर नोएडा पहुंचे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब तक वे और पुलिस टीम मौके पर पहुंची, युवराज की आवाज खामोश हो चुकी थी। बेटे का शव देखकर पिता राजकुमार मौके पर ही बेहोश हो गए। 5 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन स्थानीय लोगों ने कार को गिरते हुए देखा था और पुलिस को सूचना दी थी। कुछ लोगों ने युवराज को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन गड्ढा बहुत गहरा और पानी से भरा होने के कारण वे सफल नहीं हो सके। सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क थाना पुलिस, गोताखोर और NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें मौके पर पहुंचीं। घने कोहरे और अंधेरे के कारण रेस्क्यू में भारी दिक्कतें आईं। करीब 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया। ड्राइविंग सीट पर युवराज का शव मिला, जिसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रशासन पर एफआईआर: "यह हादसा नहीं, हत्या है" युवराज की मौत से गुस्साए परिजनों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक के पिता ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। आरोप: पिता ने अपनी शिकायत में सरकार और स्थानीय प्रशासन को बेटे की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जिस सर्विस रोड पर यह हादसा हुआ, वहां न तो स्ट्रीट लाइट थी, न ही कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया था और न ही नाले को कवर किया गया था। लीपापोती: स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए अब उस गड्ढे को आनन-फानन में कूड़े और मिट्टी से भरवा रहा है, जबकि यह काम पहले किया जाना चाहिए था। सेक्टर 150, जिसे ग्रेटर नोएडा का सबसे पॉश और हरा-भरा सेक्टर कहा जाता है, वहां ऐसी लापरवाही शर्मनाक है। एक होनहार इंजीनियर की जान चली गई, सिर्फ इसलिए क्योंकि सड़क पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है—क्या किसी अधिकारी पर कार्रवाई होगी या यह फाइल भी कोहरे में गुम हो जाएगी?
नोएडा (इंफ्रास्ट्रक्चर डेस्क/खबरीलाल): दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की धड़कन कहे जाने वाले नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida-Greater Noida) के निवासियों के लिए एक ऐसी खबर आई है, जो आने वाले कुछ सालों में उनके सफर करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी। अगर आप भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रोज लगने वाले भयंकर जाम से परेशान हैं, पीक आवर्स में रेंगती गाड़ियों को देख अपना सिर पकड़ लेते हैं, तो अब मुस्कुराने का वक्त आ गया है।READ ALSO:-UP Shikshamitra News: शिक्षामित्रों के 'अच्छे दिन' शुरू! योगी सरकार ने खोला खुशियों का पिटारा; मानदेय से लेकर तैनाती तक, पूरी होंगी ये 3 बड़ी मांगें उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और नोएडा प्राधिकरण ने शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। यह प्लान है—एक नया और वैकल्पिक एक्सप्रेसवे (New Alternative Expressway)। 30 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न सिर्फ गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि यमुना पुश्ता रोड के समानांतर (Parallel) बनकर पूरे इलाके की इकोनॉमी को बूस्ट करेगा। 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे इस नए एक्सप्रेसवे का पूरा रूट मैप, इसके बनने से किन सेक्टरों की लॉटरी लगेगी, और आखिर प्रशासन इस प्रोजेक्ट को लेकर इतना गंभीर क्यों है। क्यों पड़ी नए एक्सप्रेसवे की जरूरत? (The Need for Speed) सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर प्रशासन को एक नए एक्सप्रेसवे की याद क्यों आई? मौजूदा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे (Old Expressway) शहर की लाइफलाइन है, लेकिन अब यह अपनी क्षमता से दोगुना भार उठा रहा है। मौजूदा हालात: रेंगती गाड़ियां, थमता विकास ट्रैफिक का दबाव: मौजूदा एक्सप्रेसवे पर रोजाना लाखों गाड़ियां गुजरती हैं। सुबह और शाम के वक्त महामाया फ्लाईओवर से लेकर परी चौक तक कई जगहों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक रहता है। भविष्य की चिंता: जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के शुरू होने के बाद इस रोड पर ट्रैफिक का दबाव और बढ़ने वाला है। एकमात्र विकल्प: अभी नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। अगर यहां कोई एक्सीडेंट हो जाए, तो पूरा शहर थम जाता है। इसी समस्या को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम (Lokesh M) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने एक वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव रखा, जिसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। क्या है 'यमुना पुश्ता एक्सप्रेसवे' का ब्लूप्रिंट? यह नया प्रोजेक्ट केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना होगा। आइए जानते हैं इसके तकनीकी पहलू और ड्राफ्ट की खास बातें। 1. रूट और लंबाई (Route & Length) कुल लंबाई: लगभग 30 किलोमीटर। शुरुआत: यह एक्सप्रेसवे नोएडा के सेक्टर-94 (कालिंदी कुंज के पास) से शुरू होगा। अंत: इसका समापन ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 (परी चौक से पहले) के पास होगा। अलाइनमेंट: यह पूरी सड़क यमुना पुश्ता रोड (Yamuna Embankment Road) के समानांतर यानी उसके साथ-साथ चलेगी। 2. लेन और चौड़ाई (Lanes & Width) शुरुआती प्लान: ड्राफ्ट के मुताबिक, इसे 6 लेन का बनाया जाएगा। भविष्य की तैयारी: इसका डिजाइन ऐसा तैयार किया जा रहा है कि भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे और चौड़ा (Expandable) किया जा सके। 3. कनेक्टिविटी का जाल यह नया एक्सप्रेसवे पुराने और खस्ताहाल रास्तों को जोड़कर एक 'सुव्यवस्थित नेटवर्क' बनाएगा। अभी पुश्ता रोड पर कहीं 4 लेन है, कहीं 2 लेन, तो कहीं कच्ची सड़क और खड़ंजा है। नया प्रोजेक्ट इन सबको एक हाई-स्पीड कॉरिडोर में बदल देगा। बाढ़ का डर और इंजीनियरिंग का कमाल इस प्रोजेक्ट की राह में सबसे बड़ी चुनौती थी—यमुना का बाढ़ क्षेत्र (Flood Zone)। हम सभी ने देखा है कि मानसून में यमुना का जलस्तर बढ़ने पर खादर इलाकों में पानी भर जाता है। पुराने प्रस्ताव में क्या थी कमी? पहले जब इस सड़क का विचार आया था, तो सिंचाई विभाग (Irrigation Department) ने कड़ी आपत्ति जताई थी। डर: विभाग का कहना था कि अगर हम डूब क्षेत्र (River Bed) में सड़क बनाएंगे, तो पानी के बहाव में बाधा आएगी और बाढ़ का पानी शहर (नोएडा के रिहायशी इलाकों) में घुस सकता है। भूमि अधिग्रहण: जमीन को लेकर भी कुछ पेंच फंसे थे। नया ड्राफ्ट: सुरक्षित और स्मार्ट अधिकारियों ने अब एक 'संशोधित ड्राफ्ट' (Revised Draft) तैयार किया है, जिसने इन कमियों को दूर कर दिया है। पुश्ता रोड का इस्तेमाल: अब एक्सप्रेसवे को नदी के बीच में नहीं, बल्कि मौजूदा पुश्ता रोड (बंधा) के किनारे-किनारे बनाया जाएगा। ऊंचाई: सड़क की ऊंचाई इस तरह रखी जाएगी कि बाढ़ का पानी उस पर न आए। कम अधिग्रहण: चूंकि पुश्ता रोड के पास की जमीन पहले से सरकारी नियंत्रण में है, इसलिए भूमि अधिग्रहण की समस्या बहुत कम होगी और प्रोजेक्ट तेजी से पूरा होगा। पीपीपी मॉडल - 'प्राइवेट पार्टनर' के साथ विकास 30 किलोमीटर लंबा 6 लेन का एक्सप्रेसवे बनाना कोई सस्ता काम नहीं है। इसमें हजारों करोड़ का खर्च आएगा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने स्पष्ट किया है कि इतना बड़ा खर्च अकेले उठाना मुश्किल है। क्या है योजना? मॉडल: यह एक्सप्रेसवे पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल पर बनाया जा सकता है। फायदा: इसमें निजी कंपनियां पैसा और तकनीक लगाएंगी। इसके बदले में उन्हें कुछ समय के लिए टोल वसूलने या विज्ञापन का अधिकार मिल सकता है। गति: निजी कंपनियों के आने से काम की रफ्तार सरकारी काम की तुलना में तेज होगी और 'डेडलाइन' पर काम पूरा होगा। रियल एस्टेट सेक्टर में आएगा 'बूम' (Impact on Sectors) जैसे ही किसी इलाके में नई सड़क बनती है, वहां की जमीन 'सोना' बन जाती है। इस नए एक्सप्रेसवे से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। इन सेक्टर्स की बदलेगी किस्मत: 1. सेक्टर 94 (The Commercial Hub): यह एक्सप्रेसवे का शुरुआती पॉइंट है। यहां पहले से ही 'सुपरटेक सुपरनोवा' जैसी गगनचुंबी इमारतें और कमर्शियल हब हैं। नई कनेक्टिविटी से यहां ऑफिस स्पेस और लग्जरी हाउसिंग की मांग बढ़ेगी। 2. सेक्टर 135 (Corporate & Residential): यह इलाका पहले से ही कई बड़ी आईटी कंपनियों का घर है। नया एक्सप्रेसवे कर्मचारियों के लिए आवागमन आसान करेगा, जिससे रेंटल मार्केट (Rental Market) में तेजी आएगी। 3. सेक्टर 150 (The Sports City): ग्रेटर नोएडा का सेक्टर 150 अपनी हरियाली और स्पोर्ट्स सिटी के लिए मशहूर है। यह एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर होगा। कनेक्टिविटी: यहां से जेवर एयरपोर्ट जाना और भी आसान हो जाएगा। निवेश: यहां निवेश करने वालों को अब तक जाम की चिंता थी, जो इस सड़क के बनने से खत्म हो जाएगी। प्रॉपर्टी के दाम 20-30% तक बढ़ सकते हैं। 4. फार्म हाउस और विला: यमुना किनारे के फार्म हाउस (Farmhouses) और विला प्रोजेक्ट्स को अब सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे उनकी वैल्यूएशन बढ़ेगी। आम आदमी को क्या फायदा? (Commuter Benefits) इस पूरी कवायद का असली लाभार्थी आम नागरिक है। समय की बचत: नोएडा से ग्रेटर नोएडा का सफर, जो पीक आवर्स में 45 मिनट से 1 घंटा लेता है, वह घटकर 20-25 मिनट रह जाएगा। ईंधन की बचत: बार-बार ब्रेक लगाने और रेंगने से होने वाली ईंधन की बर्बादी रुकेगी। वैकल्पिक मार्ग: अगर पुराने एक्सप्रेसवे पर कोई वीआईपी मूवमेंट (VIP Movement) है या मेंटेनेंस का काम चल रहा है, तो आपके पास दूसरा रास्ता मौजूद होगा। प्रदूषण में कमी: गाड़ियां जब अच्छी रफ्तार में चलेंगी, तो शहर का प्रदूषण स्तर भी कम होगा। शासन से 'हरी झंडी' का इंतजार फिलहाल स्थिति यह है कि प्राधिकरण ने अपना 'होमवर्क' पूरा कर लिया है। ड्राफ्ट: तैयार है। सर्वे: हो चुका है (जहां कच्ची सड़क और खड़ंजा है)। प्रेजेंटेशन: सीएम योगी के सामने शुरुआती प्रेजेंटेशन हो चुकी है। अब अगला कदम इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से शासन (Lucknow) भेजना है। वहां से अंतिम मुहर लगते ही डीपीआर (Detailed Project Report) बनाई जाएगी और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले सरकार इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना चाहेगी, ताकि जनता को विकास का तोहफा दिया जा सके। नोएडा के विकास का नया अध्याय नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच प्रस्तावित यह नया एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के भविष्य की जीवनरेखा है। जिस तरह यमुना एक्सप्रेसवे ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली, उसी तरह यह 'यमुना पुश्ता एक्सप्रेसवे' शहर के अंदरूनी ट्रैफिक की समस्या का स्थायी समाधान बनेगा। हालांकि, पर्यावरण की चुनौतियों और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर प्राधिकरण को बेहद सतर्क रहना होगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो वह दिन दूर नहीं जब आप यमुना की लहरों के किनारे-किनारे अपनी गाड़ी दौड़ाते हुए मिनटों में ग्रेटर नोएडा पहुंच जाएंगे। (नोएडा की हर छोटी-बड़ी खबर और रियल एस्टेट अपडेट्स के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।) FAQ: नए एक्सप्रेसवे से जुड़े आपके सवाल प्रश्न 1: यह नया एक्सप्रेसवे पुराने एक्सप्रेसवे से कितना अलग होगा? उत्तर: पुराना एक्सप्रेसवे शहर के बीचों-बीच से ट्रैफिक उठाता है, जबकि नया एक्सप्रेसवे यमुना के किनारे (पुश्ता रोड) बनेगा। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए बाईपास का काम करेगा जिन्हें लंबी दूरी तय करनी है। प्रश्न 2: क्या इस एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स लगेगा? उत्तर: चूंकि इसे पीपीपी मॉडल पर बनाने की तैयारी है, इसलिए पूरी संभावना है कि इस पर टोल टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, यह प्रीमियम सर्विस के बदले लिया जाने वाला शुल्क होगा। प्रश्न 3: यह प्रोजेक्ट कब तक बनकर तैयार होगा? उत्तर: अभी यह प्रस्ताव चरण में है। मंजूरी और निर्माण में कम से कम 3 से 4 साल का समय लग सकता है। प्रश्न 4: क्या इससे जेवर एयरपोर्ट जाने वालों को फायदा होगा? उत्तर: बिल्कुल। सेक्टर 150 से यह एक्सप्रेसवे परी चौक और यमुना एक्सप्रेसवे के नजदीक खत्म होगा, जिससे एयरपोर्ट जाने वालों को जाम मुक्त रास्ता मिलेगा।
ग्रेटर नोएडा (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के पॉश इलाके सेक्टर-150 से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां की एक हाई-प्रोफाइल सोसायटी में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) का एक खौफनाक अंत हुआ है। मणिपुर की रहने वाली एक युवती ने अपने साउथ कोरियन बॉयफ्रेंड की चाकू मारकर हत्या कर दी।READ ALSO:-Meerut News: संगीत सोम को 'बम' से उड़ाने की धमकी! बांग्लादेशी नंबर से आया कॉल, शाहरुख खान को 'गद्दार' कहने पर भड़के कट्टरपंथी? मृतक की पहचान डक ही यूह (Duk Hi Youh) के रूप में हुई है, जो नोएडा स्थित सैमसंग (Samsung) कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। पुलिस ने आरोपी प्रेमिका लुंजेना पामई को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शराब के नशे में हुए झगड़े ने इस वारदात को जन्म दिया। क्या है पूरा मामला? (The Incident) घटना ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एटीएस पायस हाइडवेज (ATS Pious Hideaways) सोसायटी की है। पुलिस के मुताबिक, डक ही यूह और लुंजेना पामई यहां पिछले कुछ समय से लिव-इन में रह रहे थे। पार्टी में हुआ झगड़ा, फिर चला चाकू पुलिस पूछताछ में आरोपी लुंजेना ने बताया कि घटना वाली रात (न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान) दोनों ने घर में दोस्तों के साथ शराब पार्टी की थी। पार्टी खत्म होने के बाद किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि नौबत धक्का-मुक्की तक आ गई। इसी दौरान गुस्से में आकर लुंजेना ने किचन से चाकू उठाया और अपने बॉयफ्रेंड पर हमला कर दिया। खून से लथपथ प्रेमी को खुद ले गई अस्पताल वारदात के बाद जब डक ही यूह खून से लथपथ होकर गिर पड़ा, तो लुंजेना घबरा गई। वह खुद उसे घायल अवस्था में लेकर पास के जिम्स (GIMS) अस्पताल पहुंची। उसे उम्मीद थी कि शायद उसकी जान बच जाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद डक ही यूह को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने मामला संदिग्ध और मेडिको-लीगल (Medico-Legal) देखते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी। 2 साल पहले 'बियर बार' में शुरू हुई थी लव स्टोरी पुलिस की जांच में इस रिश्ते की पूरी कहानी सामने आई है। मुलाकात: मृतक डक ही यूह और आरोपी लुंजेना की पहली मुलाकात करीब 2 साल पहले एक बियर बार में हुई थी। दोस्ती और प्यार: लुंजेना उस बियर बार में काम करती थी। वहीं से दोनों की दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई। लिव-इन: इसके बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और ग्रेटर नोएडा की इस सोसायटी में शिफ्ट हो गए। लेकिन शराब और गुस्से ने इस 2 साल पुराने रिश्ते को खूनी अंजाम तक पहुंचा दिया। पुलिस का क्या कहना है? (Police Statement) ग्रेटर नोएडा के डीसीपी (DCP) शाद मियां खान ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया: "थाना नॉलेज पार्क पुलिस को जिम्स अस्पताल से सूचना मिली थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। आरोपी युवती से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू (Weapon) भी बरामद कर लिया गया है। युवती का कहना है कि उसका इरादा जान से मारने का नहीं था, लेकिन झगड़े में यह घटना हो गई।" आरोपी गिरफ्तार, दूतावास को दी जाएगी सूचना पुलिस ने आरोपी लुंजेना पामई को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। चूंकि मृतक दक्षिण कोरिया का नागरिक था, इसलिए पुलिस प्रोटोकॉल के तहत संबंधित दूतावास (Embassy) और मृतक के परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया भी कर रही है। सवाल: लिव-इन में बढ़ते अपराध चिंता का विषय ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर में लिव-इन पार्टनर द्वारा हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड हो या हालिया निक्की यादव केस, गुस्से और नशे में रिश्तों का कत्ल अब एक सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है। एटीएस सोसायटी के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं।
नोएडा (क्राइम ब्यूरो/विशेष संवाददाता): दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी नोएडा (Noida) की चकाचौंध के बीच एक ऐसी काली करतूत सामने आई है, जिसने न केवल 'राखी' के पवित्र धागे को कलंकित किया है, बल्कि समाज के नैतिक पतन की एक डरावनी तस्वीर भी पेश की है। यहाँ एक चचेरे भाई ने अपनी ही बहन के साथ हवस की आग बुझाने के लिए पहले मर्यादाएं लांघीं और जब पाप का घड़ा भर गया, तो उसे छिपाने के लिए एक ऐसी खौफनाक साजिश रची, जिसका अंत 18 साल की युवती की दर्दनाक मौत के साथ हुआ।READ ALSO:-बागपत में खाप पंचायत का 'तुगलकी' फरमान: बच्चों के स्मार्टफोन और हाफ पैंट पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, इतिहासकारों ने बताया समाज को पीछे धकेलने वाला कदम नोएडा के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र की इस घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक भाई, जिसे अपनी बहन की रक्षक होना चाहिए था, वही उसका भक्षक बन गया। अवैध संबंधों, अनचाहे गर्भ और नीम-हकीमी तरीके से किए गए गर्भपात (Abortion) के प्रयास ने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम के समुद्र में धकेल दिया है। पुलिस ने आरोपी भाई को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पीछे छूट गए हैं कभी न खत्म होने वाले सवाल और दो परिवारों का दर्द। घटनाक्रम: 18 दिसंबर से 23 दिसंबर तक मौत का तांडव यह मामला केवल एक अपराध का नहीं, बल्कि विश्वासघात की पराकाष्ठा का है। पुलिस एफआईआर, परिजनों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर घटनाक्रम की कड़ी-दर-कड़ी कुछ इस प्रकार है: 1. मर्यादा का उल्लंघन और "वो" गलती: मृतका (18 वर्ष) और आरोपी युवक रिश्ते में सगे चचेरे भाई-बहन थे। वे एक ही कुनबे और परिवेश में पले-बढ़े थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच पिछले कुछ समय से शारीरिक संबंध बन गए थे। लड़के ने रिश्तों की मर्यादा को ताक पर रखकर अपनी ही बहन के साथ संबंध स्थापित किए। परिणाम वही हुआ जिसका डर था—लड़की गर्भवती हो गई। 2. बदनामी का डर और मौत का सौदा: जैसे ही लड़की के गर्भवती होने की बात आरोपी भाई को पता चली, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे डर था कि अगर परिवार में यह बात खुल गई, तो न केवल उसकी बदनामी होगी, बल्कि दोनों परिवारों के बीच खूनी संघर्ष भी हो सकता है। "लोक-लाज" के इसी डर ने उसे अपराधी बना दिया। डॉक्टर के पास जाने या परिवार को बताने के बजाय, उसने बाजार से अवैध रूप से गर्भपात की दवा (Abortion Kit/Pills) खरीदी। उसने सोचा कि दवा खिलाकर वह चुपचाप इस समस्या को खत्म कर देगा, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि वह अपनी बहन को दवा नहीं, बल्कि जहर दे रहा है। 3. 18 दिसंबर: जब बिगड़ने लगी हालत: आरोपी ने लड़की को दवा खिला दी। दवा का असर उल्टा हुआ। लड़की के शरीर में भयानक रिएक्शन हुआ। उसे असहनीय पेट दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव (Heavy Bleeding) शुरू हो गया। 18 दिसंबर को जब लड़की दर्द से तड़पने लगी, तो घबराए हुए परिजन उसे आनन-फानन में नोएडा के एक निजी अस्पताल लेकर भागे। उस वक्त तक माता-पिता को लग रहा था कि शायद बेटी को कोई सामान्य बीमारी या इन्फेक्शन हुआ है। 4. दिल्ली रेफर और मौत: नोएडा के अस्पताल में डॉक्टरों ने जब लड़की की जांच की, तो स्थिति की गंभीरता को भांप गए। गर्भपात अधूरा रह गया था (Incomplete Abortion) और संक्रमण (Sepsis) फैलने का खतरा था। हालत नाजुक देखते हुए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) रेफर कर दिया गया। यहाँ आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए, आखिरकार 23 दिसंबर को लड़की का शरीर हार गया। अत्यधिक खून बह जाने और अंदरूनी अंगों के फेल होने के कारण उसने दम तोड़ दिया। सफदरजंग के डॉक्टरों का खुलासा: "यह सामान्य मौत नहीं है" जब तक लड़की का इलाज चल रहा था, परिवार अंधेरे में था। लेकिन उसकी मौत के बाद जब डॉक्टरों ने 'डेथ समरी' और मेडिकल रिपोर्ट परिजनों को सौंपी, तो वहां कोहराम मच गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में बताया: "मरीज की मौत सामान्य बीमारी से नहीं हुई है। यह केस 'सेप्टीसीमिया ड्यू टू इंड्यूस्ड अबॉर्शन' (Septicemia due to induced abortion) का है। मरीज ने गर्भपात की हाई डोज दवा ली थी, जिसके कारण उसका गर्भाशय (Uterus) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और शरीर में जहर फैल गया था।" डॉक्टरों के इस एक वाक्य ने वहां मौजूद पिता और अन्य परिजनों को हिलाकर रख दिया। जिस बेटी की बीमारी के लिए वे दुआ मांग रहे थे, वह दरअसल अपने ही भाई की करतूत का शिकार हुई थी। आरोपी का कबूलनामा: "हाँ, मैंने ही दी थी गोली" बहन की मौत की खबर और डॉक्टरों के खुलासे के बाद आरोपी भाई ज्यादा देर तक झूठ का नकाब नहीं पहन सका। अस्पताल में ही परिजनों और पुलिस की सख्ती के बाद वह टूट गया। रोते हुए उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह नहीं चाहता था कि लड़की मरे, वह सिर्फ गर्भ गिराना चाहता था ताकि किसी को पता न चले। उसने माना कि उसने बिना किसी डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लाकर बहन को खिलाई थी। पुलिसिया कार्रवाई: एफआईआर से गिरफ्तारी तक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नोएडा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। शिकायत: लड़की के पिता ने भारी मन से अपने ही भतीजे के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-39 थाने में लिखित शिकायत दी। आरोप: शिकायत में आरोपी पर बहला-फुसलाकर या जबरन शारीरिक संबंध बनाने (दुष्कर्म) और धोखे से गर्भपात की दवा खिलाकर गैर-इरादतन हत्या करने का आरोप लगाया गया। पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, जिसने डॉक्टरों के दावे की पुष्टि कर दी। रिपोर्ट में मौत की वजह 'शॉक और हेमरेज ड्यू टू अबॉर्शन' (Shock and hemorrhage due to abortion) बताई गई। गिरफ्तारी: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उस मेडिकल स्टोर वाले की भी तलाश कर रही है जिसने बिना पर्ची के यह प्रतिबंधित दवा बेची। मेडिकल विश्लेषण: क्यों जानलेवा होती हैं गर्भपात की गोलियां? इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की ओर इशारा किया है—Self-Medication (स्वयं चिकित्सा)। स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के अनुसार: MTP किट का नियम: भारत में गर्भपात की दवा केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर की देखरेख में ही दी जा सकती है। इसके लिए पहले अल्ट्रासाउंड जरूरी होता है ताकि यह पता चले कि प्रेगनेंसी गर्भाशय में है या ट्यूब में (Ectopic Pregnancy)। मौत का कारण: अगर प्रेगनेंसी एक्टोपिक हो और दवा खा ली जाए, तो फैलोपियन ट्यूब फट सकती है, जिससे मिनटों में मरीज की मौत हो सकती है। इस केस में, दवा की ओवरडोज या गलत समय पर सेवन से गर्भाशय फट गया या अत्यधिक ब्लीडिंग हुई जिसे रोका नहीं जा सका। अधूरा गर्भपात: अक्सर दवा लेने के बाद भ्रूण का कुछ हिस्सा अंदर रह जाता है, जो सड़कर सेप्सिस (Sepsis) पैदा करता है। यह शरीर के अंगों को फेल कर देता है। सामाजिक पहलू: बिखर गए दो परिवार नोएडा की इस घटना ने दो भाइयों (लड़की के पिता और लड़के के पिता) के परिवारों को हमेशा के लिए दुश्मन बना दिया है। विश्वास की हत्या: एक ही छत या आस-पड़ोस में रहने वाले संयुक्त परिवारों में बच्चों पर भरोसा किया जाता है। लेकिन इस घटना ने उस भरोसे की नींव हिला दी है। कलंक: आरोपी ने बदनामी से बचने के लिए जो किया, उसने अंततः परिवार को उससे भी बड़ी बदनामी और त्रासदी दी। आज उनका बेटा जेल में है और बेटी श्मशान में। युवाओं की मानसिकता: यह घटना आज की युवा पीढ़ी में यौन शिक्षा (Sex Education) की कमी और जिम्मेदारी के अभाव को भी दर्शाती है। समस्या आने पर माता-पिता से बात करने के बजाय गलत कदम उठाना जानलेवा साबित हुआ। कानूनी पेंच: क्या सजा हो सकती है? नए कानूनों (भारतीय न्याय संहिता - BNS) और पुराने IPC के तहत यह मामला बेहद गंभीर है। दुष्कर्म (Rape): यदि संबंध मर्जी के बिना थे या धोखे से बनाए गए थे। गर्भपात कारित करना (Causing Miscarriage): महिला की सहमति के बिना या उसकी जान को खतरे में डालकर गर्भपात करना एक गंभीर अपराध है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide): दवा देने के कृत्य से मौत हुई, इसलिए यह धारा भी लागू होगी। एक सबक पूरे समाज के लिए नोएडा के सेक्टर-39 की यह घटना सिर्फ एक 'क्राइम न्यूज़' नहीं है, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है। यह सिखाती है कि पाप को छिपाने के लिए किया गया दूसरा पाप अक्सर पहले से ज्यादा घातक होता है। अगर समय रहते परिवार को विश्वास में लिया जाता या उचित चिकित्सीय सहायता ली जाती, तो शायद आज वह 18 साल की लड़की जिंदा होती। फिलहाल, पुलिस अपनी जांच कर रही है, लेकिन उस घर की खुशियां हमेशा के लिए मातम में बदल चुकी हैं। प्रशासन की अपील: पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात की दवा न लें और न ही मेडिकल स्टोर वाले बिना पर्ची के ऐसी दवाएं बेचें। ऐसा करना जानलेवा और गैरकानूनी दोनों है।
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे के नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) और यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) को आपस में जोड़ने के लिए एक 'लिंक एक्सप्रेसवे' बनाने की तैयारी तेज हो गई है। यह परियोजना न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से लेकर जेवर एयरपोर्ट तक की कनेक्टिविटी को सुपरफास्ट बना देगी।READ ALSO:-यमुना एक्सप्रेसवे पर मौत का तांडव: कोहरे के कारण आपस में भिड़ीं बसें और कारें, 13 लोगों की जलकर मौत, 70 से ज्यादा घायल ₹4000 करोड़ की महात्वाकांक्षी परियोजना उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने इस 74 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी संभाली है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें से करीब 1200 करोड़ रुपये केवल जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) पर खर्च किए जाएंगे। बाकी राशि निर्माण कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में लगेगी। जनवरी से शुरू होगा जमीन अधिग्रहण परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। यीडा (YEIDA) क्षेत्र और बुलंदशहर के गांवों में जमीन खरीद के लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जनवरी 2026 से जमीन खरीदने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी। इसके लिए यमुना प्राधिकरण जल्द ही किसानों के साथ बैठक करेगा और आपसी सहमति के आधार पर जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। 56 गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कुल 740 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे दो जिलों के 56 गांवों से होकर गुजरेगा: गौतमबुद्ध नगर: 8 गांव। बुलंदशहर: 48 गांव। इन गांवों के किसानों और निवासियों को उचित मुआवजा देकर जमीन ली जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक खुशहाली आएगी। रूट मैप: कहां से कहां तक? यह लिंक एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे के बुलंदशहर स्थित सियाना क्षेत्र से शुरू होगा और यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-21 (फिल्म सिटी) के पास जाकर मिलेगा। इसकी कुल लंबाई 74 किलोमीटर होगी। इसमें से लगभग 20 किलोमीटर का हिस्सा यीडा (Yamuna Authority) क्षेत्र में पड़ेगा। खास बात यह है कि यीडा क्षेत्र में लगभग 9 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाई जाएगी, जो ट्रैफिक को बिना किसी बाधा के गुजरने में मदद करेगी। जेवर एयरपोर्ट और इन शहरों को सीधा फायदा इस एक्सप्रेसवे के बनने से सबसे बड़ा फायदा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को होगा। यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक और वैकल्पिक और तेज मार्ग मिल जाएगा। इसके अलावा: दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए आगरा और लखनऊ की तरफ जाना आसान हो जाएगा। व्यापारिक लाभ: माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स के लिए यह रूट वरदान साबित होगा, क्योंकि यह मुंबई तक जाने वाले कॉरिडोर से भी इनडायरेक्टली कनेक्ट करेगा। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण पूरा होते ही यूपीडा निर्माण कार्य शुरू कर देगा। यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
ग्रेटर नोएडा: अगर आप दिल्ली-एनसीआर, खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रास्तों से अक्सर गुजरते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सर्दियों में कोहरे (Fog) के कारण होने वाले जानलेवा हादसों को रोकने के लिए गौतमबुद्ध नगर ट्रैफिक पुलिस (Gautam Buddh Nagar Traffic Police) ने सख्त कदम उठाए हैं।READ ALSO:-UP BJP President: पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना तय, CM योगी की मौजूदगी में भरा नामांकन; जानें 2027 के लिए क्या है बीजेपी का 'मास्टरप्लान' यातायात पुलिस ने जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे (Yamuna Expressway), नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे और एलिवेटेड रोड पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा (Maximum Speed Limit) में कटौती करने का फैसला किया है। यह नई व्यवस्था 15 दिसंबर 2025 से लागू होगी और 15 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? शनिवार, 13 दिसंबर की सुबह दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा देखा गया, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी। इसके साथ ही प्रदूषण का स्तर (AQI) भी 400 के पार बना हुआ है, जिससे सड़कों पर धुंध (Smog) की चादर बिछी हुई है। अतीत में इन एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के कारण कई भीषण 'पाइल-अप' (एक के बाद एक गाड़ियों का टकराना) हादसे हो चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने एहतियातन गति सीमा घटाने का निर्णय लिया है। जानें कहां कितनी होगी अब स्पीड? ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग सड़कों और वाहनों की श्रेणी के हिसाब से नई स्पीड लिमिट तय की है। इसे आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं: सड़क/एक्सप्रेस-वे का नाम हल्के वाहन (कार, जीप, वैन) भारी वाहन (बस, ट्रक, डंपर) यमुना एक्सप्रेस-वे 75 किमी/घंटा 60 किमी/घंटा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे 75 किमी/घंटा 50 किमी/घंटा नोएडा एलिवेटेड रोड 50 किमी/घंटा 40 किमी/घंटा नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं होगा, बल्कि इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा। 15 दिसंबर से एक्सप्रेस-वे पर लगे स्पीड कैमरे (Speed Cameras) नई लिमिट के हिसाब से सेट कर दिए जाएंगे। जो भी वाहन चालक तय सीमा से तेज गाड़ी चलाता हुआ पाया जाएगा, उसका ई-चालान (E-Challan) काटा जाएगा। कोहरे और प्रदूषण की दोहरी मार नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फिलहाल स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक तरफ तापमान गिरने से कोहरा बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ हवा की गुणवत्ता (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में है। हल्के वाहन: कार, जीप, वैन और छोटी पिकअप गाड़ियां। भारी वाहन: ट्रक, बस, ट्रेलर, टैंकर और बड़े कंटेनर। नोएडा एलिवेटेड रोड (MP-2 मार्ग) पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वहां गाड़ियों के फिसलने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए वहां स्पीड लिमिट सबसे कम (50 और 40 किमी/घंटा) रखी गई है। चालकों के लिए एडवाइजरी ट्रैफिक पुलिस ने अपील की है कि वाहन चालक सफर के दौरान फॉग लाइट्स (Fog Lights) का इस्तेमाल करें। इंडिकेटर हमेशा ऑन रखें और आगे चल रही गाड़ी से उचित दूरी बनाकर चलें। थोड़ी सी जल्दबाजी कोहरे में बड़े हादसे का सबब बन सकती है। गौतमबुद्ध नगर ट्रैफिक पुलिस का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक सराहनीय प्रयास है। 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक दो महीने के लिए हमें अपनी रफ्तार पर काबू रखना होगा। याद रखें, 'दुर्घटना से देर भली'। घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है, इसलिए यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित सफर करें।
नोएडा: हाईटेक सिटी नोएडा (Noida News) में साइबर पुलिस और थाना फेस-1 की संयुक्त टीम ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो सात समंदर पार बैठे भारतीयों को अपना शिकार बनाता था। पुलिस ने गुरुवार को इस गैंग की मास्टरमाइंड 25 वर्षीय कनिष्का समेत 6 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी कॉल सेंटर के जरिए सस्ते दामों पर नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम और अन्य ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स की मेंबरशिप बेचने का झांसा देकर ठगी करता था।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर: मस्जिद के मुअज्जिन ने दी दारोगा की गर्दन काटने की खुली तालिबानी धमकी; वीडियो वायरल होने पर FIR दर्ज, आरोपी फरार BA पास कनिष्का और बीटेक दोस्त ने रची साजिश पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस पूरे सिंडिकेट की मास्टरमाइंड 25 साल की कनिष्का है, जिसने कोविड काल में इग्नू (IGNOU) से बीए पास किया था। कनिष्का की मुलाकात बीटेक पास अनिल बघेल से हुई थी। दोनों ने पहले कई आईटी कंपनियों में काम किया और वहां से ओटीटी सब्सक्रिप्शन की टेक्निकल बारीकियां सीखीं। इसके बाद इन्होंने 'WEBBIZ SERVICES LLC' नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई और नोएडा के सेक्टर-2 में 1.5 लाख रुपये महीने के किराये पर एक आलीशान ऑफिस खोला। यहां से वे ठगी का अपना काला कारोबार चला रहे थे। 100-300 डॉलर में बेचते थे सपना, 4 महीने में करते थे 'ब्लैकआउट' एसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि यह गैंग मुख्य रूप से विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों (NRIs) को टारगेट करता था। सस्ते का लालच: आरोपी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर 100 से 300 डॉलर (करीब 9,000 से 27,000 रुपये) में 24 महीने के लिए नेटफ्लिक्स और अन्य प्रीमियम एप्स का सब्सक्रिप्शन देने का वादा करते थे। ठगी का तरीका: पैसे लेने के बाद वे ग्राहक को सर्विस देते थे, लेकिन 24 महीने की जगह सिर्फ 4 महीने बाद ही सब्सक्रिप्शन बंद कर देते थे। बहाना: जब ग्राहक शिकायत करते, तो वे "पेड वीडियो" या "तकनीकी खराबी" का बहाना बनाकर उन्हें टाल देते और दोबारा नया प्लान लेने के लिए मनाते थे। फर्राटेदार अंग्रेजी और टेक्निकल हैकिंग का खेल पुलिस के मुताबिक, गैंग में शामिल सभी लोग अपने-अपने काम में माहिर थे। कॉल सेंटर में काम करने के लिए उन लोगों को ही रखा जाता था जो फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकें। गैंग के सदस्यों की भूमिका: अनिल बघेल (28): टेक्निकल हैकर। इसका काम IPTV बॉक्स सेटअप करना, लाइव चैनल कैप्चर करना और सर्वर बदलकर ओटीटी अनलॉक करना था। मनीष त्रिपाठी (32): डेटा मैनेजर। विदेशों में रहने वाले भारतीयों का डेटा जुटाना और पेमेंट ट्रेल छिपाना इसकी जिम्मेदारी थी। गौरव बघेल (23): ऑपरेशन्स हेड। सब्सक्रिप्शन कटने पर ग्राहकों को कॉल करना और मॉनिटरिंग करना। राधा बल्लभ (30): सॉफ्टवेयर ऑपरेटर। कस्टम पैनल बनाना और फर्जी ऐप चलाना। योगेश बघेल (20): मार्केटिंग। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर विज्ञापन चलाकर शिकार फंसाना। लग्जरी लाइफस्टाइल और सीज खाते मास्टरमाइंड कनिष्का ही गैंग के सारे फाइनेंस मैनेज करती थी। ऑफिस का किराया, वर्करों की सैलरी और लग्जरी गाड़ियों का खर्चा उसी के हाथ में था। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। जांच में 6 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें लाखों का ट्रांजैक्शन हुआ है। पुलिस ने इन सभी खातों को फ्रीज कर दिया है और ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाल रही है। नोएडा पुलिस (Noida Police) की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी चाहे कितने भी शातिर हों, कानून की नजर से नहीं बच सकते। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनाधिकृत प्लेटफॉर्म से सस्ता सब्सक्रिप्शन खरीदने के लालच में न आएं, यह आपकी निजी जानकारी और पैसों दोनों के लिए खतरा हो सकता है।
नोएडा (Noida): कंक्रीट के जंगल के रूप में पहचाने जाने वाले नोएडा शहर ने अब पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मकता की एक नई मिसाल पेश की है। शहर के सेक्टर-94 में बना जंगल ट्रेल पार्क (Jungle Trail Park Noida) अब पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए खोल दिया गया है। यह पार्क केवल घूमने की जगह नहीं है, बल्कि 'कबाड़ से जुगाड़' (Waste to Art) की एक अद्भुत दुनिया है।READ ALSO:-भक्तों के लिए खुशखबरी! अब 25 मिनट में दिल्ली से पहुंचेंगे 'मेहंदीपुर बालाजी', हेलीकॉप्टर सेवा शुरू; जानिये कितना है किराया 1 दिसंबर 2025 को आम जनता के लिए खोले गए इस पार्क की चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत और 18.27 एकड़ में फैला यह पार्क अपनी अनूठी कलाकृतियों और घने जंगल के अनुभव के लिए जाना जा रहा है। 400 टन कचरा और 650 बेजुबान जानवर जंगल ट्रेल पार्क नोएडा की सबसे बड़ी खासियत इसका निर्माण है। जिसे हम बेकार कचरा समझकर फेंक देते हैं, उसे यहां के कलाकारों ने अनमोल कलाकृतियों में बदल दिया है। पार्क में लोहे के पुराने सरिए, मोटर के खराब पुर्जे, जंग लगे बिजली के पोल, क्लच प्लेट और तारों जैसे करीब 400 टन धातु-स्क्रैप का उपयोग किया गया है। इन बेकार चीजों को जोड़कर कलाकारों ने 650 से अधिक जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों की मूर्तियां बनाई हैं। ये इतनी सजीव हैं कि पहली नजर में यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि ये कचरे से बनी हैं। 6 जोन में बंटी दुनिया: अंटार्कटिका से अफ्रीका तक पार्क को अलग-अलग महाद्वीपों और थीम के आधार पर 6 जोन में बांटा गया है। यहाँ आपको दुनिया भर के वन्यजीवों की झलक देखने को मिलेगी: एशिया और अफ्रीका: यहाँ एशियाई बाघों की दहाड़ और अफ्रीकी शेरों का कुनबा नजर आता है। ऑस्ट्रेलिया: कंगारू और कोआला जैसे जीव यहाँ विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। अमेरिका: ग्रिजली भालू और दक्षिण अमेरिकी जगुआर की विशाल मूर्तियां लोगों को रोमांचित करती हैं। समुद्री दुनिया (Aqua Zone): यहाँ शार्क, व्हेल, ऑक्टोपस और डॉल्फिन का एक अलग संसार है। रात में जब इन पर नीली रोशनी पड़ती है, तो ऐसा लगता है मानो आप समुद्र की गहराई में हों। मियावाकी तकनीक: कंक्रीट के बीच असली जंगल सिर्फ लोहे के जानवर ही नहीं, बल्कि जंगल ट्रेल पार्क नोएडा में असली जंगल का अहसास भी है। यहाँ जापानी 'मियावाकी तकनीक' का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक से मात्र एक साल में 3.5 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं, जो अब घने जंगल का रूप ले चुके हैं। झाड़ियाँ, छोटे पेड़ और ऊंचे वृक्षों की परतें मिलकर इसे एक घना हरा-भरा आवरण देती हैं। यहाँ चलते समय आपको शहर के शोर-शराबे से दूर प्रकृति की गोद में होने का सुकून मिलता है। एडवेंचर और रोमांच का पूरा डोज अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं, तो यह पार्क आपके लिए परफेक्ट है। यहाँ सिर्फ मूर्तियां देखना ही नहीं, बल्कि कई रोमांचक गतिविधियां भी उपलब्ध हैं: जिप-लाइनिंग और जिप-साइक्लिंग: हवा में उड़ने का मजा। रॉक क्लाइम्बिंग: कृत्रिम पहाड़ों पर चढ़ने का अनुभव। बोटिंग: परिवार के साथ शांत तालाब में नाव चलाने की सुविधा। एम्फीथिएटर और फूड कोर्ट: 1000 सीटों वाला ओपन थियेटर और खाने-पीने के लिए बेहतरीन फूड कोर्ट भी मौजूद है। टिकट, टाइमिंग और अन्य जानकारी नोएडा आने वाले पर्यटकों के लिए यह जानना जरूरी है कि पार्क कब और कैसे जा सकते हैं। समय (Timing): सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक (सातों दिन खुला)। टिकट (Ticket Price): 120 रुपये प्रति व्यक्ति (3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फ्री)। बुकिंग: टिकट काउंटर और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध हैं। एडवेंचर शुल्क: गतिविधियों के लिए अलग से शुल्क देना होगा। पार्किंग: 76 कार और 8 बसों की पार्किंग क्षमता। नाइट सफारी जैसा अनुभव शाम ढलते ही जंगल ट्रेल पार्क नोएडा का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। विशेष साउंड और लाइट इफेक्ट्स की मदद से यहाँ का माहौल किसी नाइट सफारी जैसा हो जाता है। स्पीकरों से आती जानवरों की आवाजें और रंग-बिरंगी रोशनियों में चमकती स्क्रैप की मूर्तियां बच्चों और बड़ों दोनों को एक जादुई दुनिया में ले जाती हैं। नोएडा का यह नया पार्क आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है। जिस तरह से 400 टन कचरे का उपयोग करके इतना सुंदर पर्यटन स्थल बनाया गया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। अगर आप परिवार के साथ एक यादगार दिन बिताना चाहते हैं, तो सेक्टर 94 का यह जंगल ट्रेल पार्क आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए। नोएडा के सेक्टर 94 में 'जंगल ट्रेल पार्क' की शुरुआत हो चुकी है। 18.27 एकड़ में फैले इस पार्क में 400 टन स्क्रैप से 650 जानवरों की मूर्तियां बनाई गई हैं। मियावाकी फॉरेस्ट, बोटिंग, जिप-लाइनिंग और नाइट व्यू इसकी खासियत हैं। पार्क का समय सुबह 9 से रात 9 बजे तक है और एंट्री फीस 120 रुपये है।
ग्रेटर नोएडा (Greater Noida News): नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) से उड़ान भरने का सपना देख रहे लोगों के लिए यमुना प्राधिकरण (YEIDA) ने एक और बड़ी सौगात दी है। अब एयरपोर्ट तक का सफर न केवल आसान होगा, बल्कि पूरी तरह प्रदूषणमुक्त और लग्जरी भी होगा। यमुना प्राधिकरण बोर्ड ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए प्रदूषणमुक्त हाइड्रोजन बस सेवा (Hydrogen Bus Service) चलाने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे दी है।READ ALSO:-आजम खान के परिवार पर एक और 'वज्रपात': बेटे अब्दुल्ला आजम को 7 साल की कैद; फर्जी पासपोर्ट मामले में कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला यह परियोजना अपने आप में बेहद अनोखी है क्योंकि ये हाईटेक बसें पेट्रोल या डीजल से नहीं, बल्कि गंदे पानी (Waste Water) से तैयार किए गए ग्रीन फ्यूल पर दौड़ेंगी। एनटीपीसी (NTPC) और यमुना प्राधिकरण के बीच हुए इस समझौते को भविष्य के ट्रांसपोर्ट का गेम-चेंजर माना जा रहा है। गंदे पानी से कैसे चलेंगी बसें? जानें विज्ञान इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका ईंधन है। आम तौर पर गाड़ियां पेट्रोल-डीजल से चलती हैं जो प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन ये बसें हाइड्रोजन फ्यूल पर चलेंगी। ईंधन का स्रोत: यह हाइड्रोजन ग्रेटर नोएडा स्थित एनटीपीसी (NTPC) के प्लांट में तैयार किया जाएगा। प्रक्रिया: एनटीपीसी शहर के ट्रीटेड 'गंदे पानी' (Sewage Water) को रिफाइन करके इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया के जरिए उससे ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगा। आउटपुट: जब ये बसें सड़क पर चलेंगी, तो इनके साइलेंसर से काला धुआं नहीं, बल्कि सिर्फ पानी की भाप (Water Vapor) निकलेगी। यानी सफर 100% प्रदूषणमुक्त होगा। एक बार भरने पर 600 किमी की नॉन-स्टॉप रेंज यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, ये बसें तकनीक के मामले में दुनिया की बेहतरीन बसों को टक्कर देंगी। रेंज: एक बार हाइड्रोजन टैंक फुल होने पर यह बस बिना रुके 600 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकेगी। लग्जरी सुविद्धा: ये बसें पूरी तरह वातानुकूलित (Fully AC) और 'इंटरसिटी मॉडल' पर आधारित होंगी। क्षमता: प्रत्येक बस में 45 यात्रियों के बैठने की लग्जरी व्यवस्था होगी। सफर इतना शांत (Silent) होगा कि इंजन का शोर भी अंदर नहीं आएगा। एनटीपीसी और प्राधिकरण की भूमिका तय इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदारियां भी बांट दी गई हैं। NTPC का काम: हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन करना, बसों में ईंधन भरना और बसों का तकनीकी रखरखाव (Maintenance) करना एनटीपीसी की जिम्मेदारी होगी। यमुना प्राधिकरण का काम: बसों का संचालन (Operation), रूट तय करना और ड्राइवरों की व्यवस्था करना यमुना प्राधिकरण के जिम्मे होगा। जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को लगेंगे पंख नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) को देश का सबसे आधुनिक एयरपोर्ट बनाया जा रहा है। यहां कनेक्टिविटी के लिए पहले से ही यमुना एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और फरीदाबाद-नोएडा कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। अब हाइड्रोजन बसों के जुड़ने से यह पूरा इलाका 'इको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट जोन' बन जाएगा। सीईओ ने कहा- यह भविष्य का मास्टरप्लान यमुना प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यहां यात्रियों की संख्या लाखों में होगी। ऐसे में अगर अभी से ग्रीन ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था नहीं की गई, तो प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन सकता है। यह बस सेवा न केवल यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास अनुभव देगी, बल्कि यमुना सिटी (Yamuna City) को 'इको-फ्रेंडली कैपिटल' के रूप में स्थापित करेगी। गंदे पानी से ईंधन बनाकर बसें चलाना सुनने में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन यमुना प्राधिकरण और एनटीपीसी इसे हकीकत बनाने जा रहे हैं। यह कदम न केवल पर्यावरण बचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान भी दिलाएगा।
मेरठ: दिल्ली, हरिद्वार और देहरादून को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन (पुराना NH-58) परियोजना में अब लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस चार लेन हाईवे को छह लेन बनाने की घोषणा एक साल पहले की थी, लेकिन फिलहाल यह परियोजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के चरण में है, जिसमें ही लगभग छह महीने का समय लगने का अनुमान है।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ RRTS: बोर्ड लगे, स्टेशन तैयार... फिर भी 'नमो भारत' को हरी झंडी का इंतज़ार; क्या 25 दिसंबर को मिलेगी सौगात? परतापुर से लेकर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा तक किए जाने वाले इस 80 किलोमीटर के चौड़ीकरण कार्य के लिए अभी लोगों को कम से कम ढाई से तीन साल तक जाम से जूझना पड़ सकता है। डीपीआर: परियोजना की नींव में लग रहा है समय परियोजना निदेशक, राजकुमार नाहरवाल के अनुसार, मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन चौड़ीकरण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। यह डीपीआर मैसर्स एफपी इंडिया प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सर्वे के आधार पर तैयार की जा रही है। डीपीआर समय-सीमा: डीपीआर को मार्च 2026 तक तैयार करके मंत्रालय को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। आगे की प्रक्रिया: डीपीआर की स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन में करीब एक साल का समय और लग सकता है। निर्माण समय: कार्य आवंटन के बाद इसे पूरा करने के लिए कम से कम डेढ़ साल की समय सीमा निर्धारित की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को क्रम से देखें तो मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन परियोजना को पूर्ण होने में अभी ढाई से तीन साल का समय लग सकता है। जाम से राहत के लिए संरचनात्मक बदलाव NHAI द्वारा तैयार की जा रही डीपीआर में मौजूदा जाम की समस्या को देखते हुए कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं: एलिवेटेड रोड: परतापुर से सिवाया टोल प्लाजा तक एलिवेटेड रोड (संभावित) का निर्माण किया जा सकता है, जिससे इस अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हिस्से में वाहनों की गति बनी रहे। मंसूरपुर में विशेष व्यवस्था: मंसूरपुर (Muzaffarnagar) में, जहां चीनी मिल, मार्केट और मेडिकल कॉलेज के कारण अक्सर जाम लगता है, वहां लगभग 1.5 किलोमीटर तक एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। पुराने फ्लाईओवर को भी चौड़ा करके डबल किया जाएगा। नए अंडरपास: पूरे मार्ग पर लगभग सभी कट (जंक्शन) को बंद करके 20 नए अंडरपास बनाए जाने की संभावना है, जिससे निर्बाध यातायात सुनिश्चित किया जा सके। जमीन अधिग्रहण: चौड़ीकरण के लिए कुछ हिस्सों में जमीन खरीद भी की जानी है, जिससे इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगने की उम्मीद है। डीपीआर में चौड़ीकरण की सटीक लागत और विस्तृत योजना स्पष्ट होगी। दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे जल्द खोलने की मांग वर्तमान में, दिल्ली से देहरादून/हरिद्वार जाने वाले अधिकांश वाहन मेरठ-रुड़की हाईवे का उपयोग करते हैं, जिससे वीकेंड पर यातायात रेंगने लगता है। इस दबाव को कम करने का एक त्वरित समाधान दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे को जल्द से जल्द खोलना है। राजकुमार नाहरवाल (परियोजना निदेशक, NHAI मेरठ क्षेत्र) ने भी स्वीकार किया कि मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन पर जाम कम करने के लिए लोगों को दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे (Delhi-Dehradun Greenfield Highway) को जल्द शुरू करने की मांग करनी चाहिए। यह हाईवे शुरू होने से इस मार्ग पर से लगभग 20 हजार से अधिक वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन चौड़ीकरण परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी पूर्णता में अभी काफी वक्त लगेगा। डीपीआर तैयार करने, मंत्रालय की स्वीकृति, टेंडर और फिर निर्माण कार्य में ढाई से तीन साल का समय लगने की संभावना है। इस दौरान यात्रियों को जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे को जल्द से जल्द शुरू करना एक आवश्यक और तात्कालिक कदम है।
नोएडा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अब काफी आसान और तेज होने वाली है। आवेदन प्रक्रिया में तेजी लाने के मकसद से, नोएडा के सेक्टर-19 स्थित हेड पोस्ट ऑफिस में स्थित नोएडा पासपोर्ट सेवा केंद्र का विस्तार किया गया है और सुविधाओं को बढ़ाया गया है। इस विस्तार से अब आवेदकों को पासपोर्ट बनवाने के लिए ज्यादा दौड़-धूप नहीं करनी पड़ेगी।READ ALSO:-पति या पिता? वोटर सर्वे फॉर्म में किसका नाम लिखें शादीशुदा महिलाएं? चुनाव आयोग ने दूर किया सबसे बड़ा कन्फ्यूजन सुविधाओं का विस्तार और आवेदनों में वृद्धि सीनियर पोस्ट मास्टर मनोज कुमार के अनुसार, केंद्र में आवेदनों की संख्या की तुलना में संसाधन कम थे, जिन्हें अब बढ़ाया गया है। काउंटर में वृद्धि: इस पासपोर्ट सेवा केंद्र में तीन नए काउंटर जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल पांच काउंटरों पर काम होगा। मशीनें और उपकरण: काम की गति बढ़ाने के लिए दो नई मशीनें और अतिरिक्त उपकरण भी लगाए गए हैं। तेजी से काम: नए संसाधनों को लगाने के बाद, अब पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में पांच गुना ज्यादा तेजी से काम होगा। दोगुनी हुई आवेदन क्षमता सुविधाएं बढ़ने से आवेदनों की संख्या में तगड़ा इजाफा होना तय है। पहले, सीमित संसाधनों के कारण रोजाना केवल 45 आवेदन ही मंजूर हो पा रहे थे। नई क्षमता: अब रोजाना 200 से ज्यादा आवेदन लिए जा सकेंगे। सत्यापन में तेजी: सत्यापन के लिए रोजाना बुलाए जाने वाले आवेदकों की संख्या भी दोगुनी कर दी गई है। इससे दस्तावेज प्रमाणित करवाना भी पहले से ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा। सीनियर पोस्ट मास्टर मनोज कुमार ने पुष्टि की है कि सुविधाएं बढ़ने से पासपोर्ट के आवेदनों का बढ़ना स्वाभाविक है, और यह कदम प्रक्रिया को आसान बनाकर जनता को राहत देगा। नोएडा पासपोर्ट सेवा केंद्र का विस्तार यह सुनिश्चित करता है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को पासपोर्ट बनवाने में लगने वाला समय कम हो, और आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कुशल हो। यह केंद्र सरकार और डाक विभाग का एक सराहनीय कदम है, जो नागरिकों के लिए आवश्यक सेवाओं को सुलभ बनाता है। नोएडा के सेक्टर-19 स्थित हेड पोस्ट ऑफिस में नोएडा पासपोर्ट सेवा केंद्र का विस्तार किया गया है। यहां तीन नए काउंटर और दो नई मशीनें लगाई गई हैं, जिससे पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में अब पांच गुना तेजी आएगी। अब रोजाना 200 से ज्यादा आवेदन लिए जा सकेंगे, जिससे आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से यात्रियों को सीधी और आसान कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। एयरपोर्ट का निर्माण और संचालन संभाल रही यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और UPSRTC के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत नोएडा एयरपोर्ट बस सेवा शुरू की जाएगी।READ ALSO:-SIR का खौफ? वोटर लिस्ट से नाम कटा तो क्या छिन जाएगी नागरिकता? जानिए क्या है नियम और कैसे दोबारा जुड़ेगा नाम इस साझेदारी से शुरुआती चरण में 14 रूटों पर रोडवेज बसें चलेंगी, जिसका नेटवर्क बाद में 25 से अधिक शहरों तक विस्तारित किया जाएगा। शुरुआती 14 रूटों पर डायरेक्ट कनेक्टिविटी शुरुआती 14 रूटों को अंतिम रूप दे दिया गया है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ेंगे। इन रूटों पर बस संचालन की तारीख हालांकि अभी तय नहीं की गई है, लेकिन एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यात्रियों को तुरंत इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। पहले चरण में शामिल प्रमुख शहर: नोएडा ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद आगरा अलीगढ़ मथुरा-वृंदावन हाथरस इन सेवाओं के शुरू होने से यात्रियों को एयरपोर्ट से इन शहरों तक आवागमन में होने वाली परेशानी खत्म हो जाएगी। (Internal link to related article on Jewar Airport progress) 25 से अधिक शहरों तक नेटवर्क का विस्तार UPSRTC और एयरपोर्ट प्रबंधन की योजना है कि शुरुआती 14 रूटों के बाद इस नेटवर्क का विस्तार किया जाए। नोएडा एयरपोर्ट बस सेवा के नेटवर्क में शामिल होने वाले अन्य शहरों में बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, हापुड़ और मुरादाबाद भी शामिल हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन का दावा है कि इस पहल के तहत, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा के साथ किए गए समझौतों को मिलाकर कुल 25 से अधिक शहरों से जोड़ा जाएगा। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने कहा कि बेहतर यात्री अनुभव के लिए एयरपोर्ट से आने-जाने की यात्रा को डायरेक्ट और आसान बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस साझेदारी के लिए उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह का आभार व्यक्त किया। इन राज्यों से भी होगी सीधी कनेक्टिविटी नोएडा एयरपोर्ट प्रबंधन पहले ही तीन पड़ोसी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ एमओयू कर चुका है: दिल्ली हरियाणा: गुड़गांव, फरीदाबाद, चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहर। उत्तराखंड: देहरादून और हरिद्वार जैसे प्रमुख शहर। इस तरह, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधी नोएडा एयरपोर्ट बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सभी प्रमुख हिस्सों से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में आसानी होगी। प्रमुख रूट जिस पर मिलेगी सुविधा प्रस्तावित बस मार्गों में कई महत्वपूर्ण शहरों और कस्बों को शामिल किया गया है: प्रमुख क्षेत्र: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कासना, गाजियाबाद और दादरी। पश्चिमी यूपी के शहर: मेरठ, हापुड़, आगरा, मथुरा-वृंदावन और हाथरस। इन रूट्स पर परी चौक, सेक्टर-37, बॉटनिकल गार्डन, सूरजपुर, विजय नगर, लालकुआं, डासना, पिलखुवा, बाजना कट, मथुरा कट, कुबेर कट, टुंडला, टप्पल, खैर और बुलंदशहर जैसे इंटरमीडिएट स्टॉप भी शामिल होंगे। इसके अलावा, कुछ रूटों को फिरोजाबाद, सिकोहाबाद और आहार तक भी विस्तारित करने की योजना है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पहले ही UPSRTC के साथ समझौता करना यात्रियों के लिए एक बड़ा सुविधा कदम है। शुरुआती 14 रूटों पर नोएडा एयरपोर्ट बस सेवा का संचालन शुरू होने से पश्चिमी यूपी के प्रमुख शहर, विशेषकर मथुरा-वृंदावन और आगरा, एयरपोर्ट से सीधे जुड़ जाएंगे, जिससे हवाई यात्रियों का सफर आसान होगा।
नोएडा: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों यात्रियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की नई मिनी बसें, जो पिछले दो महीनों से डिपो में खड़ी थीं, अब जल्द ही सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। परिवहन निगम के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान लगभग पूरा हो चुका है और ये बसें अगले हफ्ते से नियमित रूप से दौड़ती नजर आएंगी।READ ALSO:-नमो भारत डिपो में 'सोलर ऑन ट्रैक' प्रणाली, पटरियों के बीच बिछे सोलर पैनल से बनेगी बिजली, देश में ऐसा दूसरा सिस्टम नोएडा मिनी बस सेवा की शुरुआत से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच आवागमन करने वाले दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। तकनीकी बाधा हुई दूर, रूट तय उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिपो को कुल 10 नई मिनी बसें आवंटित की थीं। इनमें से 8 बसें नोएडा डिपो को जबकि 2 बसें ग्रेटर नोएडा डिपो को मिली हैं। गौतमबुद्ध नगर के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण इन 44 सीटर मिनी बसों को अब तक रूट पर नहीं उतारा जा सका था। उन्होंने कहा, "मुख्यालय से संपर्क में रहते हुए तकनीकी खामियों को दूर करने की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि एक हफ्ते के भीतर सभी आवश्यक परीक्षण पूरे हो जाएंगे और नोएडा मिनी बस सेवा नियमित रूप से शुरू हो जाएगी।" बसें अब डिपो में तैयार खड़ी हैं और इनकी लॉन्चिंग की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इन रूटों पर चलेंगी नई मिनी बसें शुरुआत में, परिवहन निगम ने इन 44 सीटर मिनी बसों को जिले के ग्रामीण रूटों पर चलाने की योजना बनाई थी। हालांकि, बाद में इस योजना में बदलाव किया गया। ग्रामीण रूटों के लिए निजी ऑपरेटर्स की बसें अनुबंध पर चलाने का विचार किया गया था और इसके लिए टेंडर भी जारी किए गए थे, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया रद्द कर दी गई। परिवहन विभाग ने अब फैसला किया है कि ये 10 नई मिनी बसें शहर के अंदरूनी और इंटरसिटी रूटों पर चलाई जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से नोएडा मिनी बस सेवा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत वर्तमान में, नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिपो में कुल 305 बसें संचालित हैं। इनमें से 188 बसें नोएडा डिपो में हैं, जबकि शेष ग्रेटर नोएडा डिपो में हैं। ये बसें साधारण और सीएनजी-संचालित हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों डिपो में एक भी वातानुकूलित (एसी) बस नहीं है। ऐसे में, नई मिनी बसों के चलने से रोजमर्रा के हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। ये बसें न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी, बल्कि नोएडा और गाजियाबाद के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिससे व्यस्त रूटों पर भीड़ कम होगी और यात्रा का समय भी बचेगा। ये आधुनिक बसें यात्रियों को एक आरामदायक विकल्प प्रदान करेंगी, जो शहर के बढ़ते यातायात के लिए एक सकारात्मक कदम है। तेजी से बढ़ते शहरों की जरूरत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद तीनों ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के महत्वपूर्ण औद्योगिक और आवासीय केंद्र हैं। इन शहरों के बीच दैनिक यात्रियों की संख्या बहुत अधिक है। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करना इन शहरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। नोएडा मिनी बस सेवा की शुरुआत क्षेत्र में एक मजबूत परिवहन नेटवर्क बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 10 नई मिनी बसें जल्द ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच चलना शुरू करेंगी। तकनीकी कारणों से रुका यह प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में है, और अगले हफ्ते से नोएडा मिनी बस सेवा शुरू होने की पूरी संभावना है। यह पहल इन तीनों व्यस्त शहरों के बीच कनेक्टिविटी को सुगम और यात्रियों के लिए आरामदायक बनाएगी, जो गौतमबुद्ध नगर के परिवहन ढांचे के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर है।
मेरठ का चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) परिसर एक बार फिर विवादों के चलते सुर्खियों में है। परिसर में फायरिंग या चाकूबाजी जैसी घटनाओं के बाद, अब सोमवार को विश्वविद्यालय के नाम से बने एक वॉट्सऐप ग्रुप में अश्लील मैसेज और पोर्न वीडियो भेजे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना से CCSU Meerut परिसर में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-दिल्ली धमाके के बाद मेरठ में चप्पे-चप्पे पर पुलिस: रेलवे स्टेशन से बस अड्डे तक सघन चेकिंग, हाईवे पर वाहनों की तलाशी हिस्ट्रीशीटर छात्र का 'कारनामा' यह आपत्तिजनक घटना विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और छात्रों के आचरण पर गंभीर सवाल उठाती है। एडमिन की पहचान: बताया जा रहा है कि यह ग्रुप कैंपस में चाकू से एक छात्र पर हमला करने की वारदात में शामिल रहे एक हिस्ट्रीशीटर छात्र के द्वारा बनाया गया था। ग्रुप का उद्देश्य: आमतौर पर इस ग्रुप में CCSU से संबंधित शैक्षिक और कैंपस के मुद्दों पर छात्र चर्चा करते थे, लेकिन अब इसका उपयोग आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के लिए किया गया। 700 लोगों का बड़ा ग्रुप और छात्राओं का ग्रुप छोड़ना यह वॉट्सऐप ग्रुप काफी बड़ा था, जिससे आपत्तिजनक सामग्री व्यापक स्तर पर फैली। ग्रुप का आकार: बताया गया कि यूनिवर्सिटी के नाम से बनाए गए इस ग्रुप में कैंपस के लगभग 700 छात्र और कुछ प्रतिष्ठित लोग भी जुड़े हुए थे। छात्राओं का रिएक्शन: अश्लील मैसेज और पोर्न वीडियो ग्रुप में आने के बाद, विवि में पढ़ने वाली कई छात्राओं ने तुरंत इस ग्रुप से खुद को बाहर (Leave) कर लिया। प्रतिक्रिया: मैसेज के बाद अन्य छात्रों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ऐसे मैसेज भेजने वाले की निंदा की और आपत्तिजनक मैसेज डिलीट किए। एडमिन जेल में, लेकिन कौन है असली दोषी? पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रुप का मुख्य एडमिन जेल में है, तो ये मैसेज किसने भेजे। मुख्य एडमिन जेल में: इस ग्रुप का मुख्य एडमिन फिलहाल जेल में बंद है। उसे हाल ही में कैंपस में एक छात्र को चाकू मारने के मामले में मुकदमा होने के बाद किसी पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर कोर्ट में पेश होने पर गिरफ्तार किया गया था। दूसरा एडमिन सक्रिय: मुख्य एडमिन के जेल जाने के बाद, दूसरे एडमिन ने तुरंत हरकत में आते हुए सभी आपत्तिजनक मैसेज डिलीट कर दिए और ग्रुप की प्राइवेसी में बदलाव किए ताकि भविष्य में ऐसी सामग्री साझा न हो सके। जांच की मांग: अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह किसी छात्र ने जानबूझकर किया है या ग्रुप को हैक करने जैसा कोई और कारण रहा। पुलिस इस मामले में आईटी एक्ट के तहत जांच कर रही है। सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने एक बार फिर CCSU Meerut परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों ने मांग की है कि आपत्तिजनक सामग्री भेजने वाले के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर भी इस मामले की आलोचना हो रही है। ग्रुप एडमिन पर होगी कानूनी कार्रवाई CCSU प्रशासन को अब ऐसे हिंसक और आपत्तिजनक गतिविधियों वाले छात्रों पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। यूपी पुलिस इस मामले में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर, ग्रुप में अश्लील सामग्री भेजने वाले वास्तविक व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है।
ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा सिटी) क्षेत्र के लिए एक बड़ी खबर है। यमुना विकास प्राधिकरण (यीडा) की बोर्ड बैठक 7 नवंबर 2025 को होने जा रही है, जिसमें परिवहन और विकास के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (Noida Airport) को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हाइड्रोजन बसों के संचालन का है। इस पहल से यीडा सिटी को देश के पहले ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल के रूप में नई पहचान मिलेगी।READ ALSO:-मौसम का 'डबल अटैक': कल से चलेंगी बर्फीली हवाएं, पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ेगी ठिठुरन, IMD ने जारी किया बारिश-बर्फबारी का अलर्ट ग्रेटर नोएडा को ग्रीन सिटी बनाने का विजन यीडा सिटी को न केवल औद्योगिक और आवासीय केंद्र के रूप में, बल्कि एक पर्यावरण-अनुकूल क्षेत्र के रूप में विकसित करने का विजन है। एनटीपीसी (NTPC) द्वारा प्रायोजित यह हाइड्रोजन बस परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सोमवार को प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें 7 नवंबर की बोर्ड बैठक का विस्तृत एजेंडा तैयार किया गया। हाइड्रोजन बसें - 'बस' नहीं, क्रांति है! यह प्रस्ताव Greater Noida क्षेत्र की परिवहन प्रणाली को बदल देगा। पायलट प्रोजेक्ट: शुरुआती चरण में, यह एक तीन वर्षीय पायलट प्रोजेक्ट होगा। संचालन: एनटीपीसी (NTPC) ने यमुना सिटी क्षेत्र में 4 लग्जरी हाइड्रोजन एसी बसों के संचालन का प्रस्ताव दिया है। अद्वितीय लाभ (Zero Emission): ये बसें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होंगी। इनके चलने पर केवल भाप (Water Vapour) निकलेगी, जिससे वायु प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा। रेंज: ये आधुनिक बसें एक बार ईंधन भरने पर लगभग 600 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकेंगी, जो लंबी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए उपयुक्त है। जिम्मेदारी का बंटवारा पायलट प्रोजेक्ट की सफलता सुनिश्चित करने के लिए यमुना प्राधिकरण और एनटीपीसी के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है: ईंधन और रखरखाव: हाइड्रोजन ईंधन भरने और बसों के रखरखाव की जिम्मेदारी एनटीपीसी संभालेगा। मानव संसाधन: ड्राइवर और परिचालक (कंडक्टर) की व्यवस्था यमुना प्राधिकरण स्वयं संभालेगा। भविष्य की योजना: यदि यह योजना सफल रहती है, तो इसे पूरे दिल्ली-एनसीआर के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी में सुधार इस हाइड्रोजन बस सेवा की शुरुआत से नोएडा एयरपोर्ट तक की कनेक्टिविटी न केवल तेज, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हो जाएगी। यह यीडा सिटी को भारत में सार्वजनिक परिवहन के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने में अग्रणी बना देगा। राया हेरिटेज सिटी परियोजना 7 नवंबर की बोर्ड बैठक में एक और बड़ा प्रस्ताव राया हेरिटेज सिटी परियोजना को धरातल पर उतारने से जुड़ा है। रूट बदलाव: परियोजना के तहत सड़क निर्माण के रूट में बदलाव पर चर्चा होगी, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को कम से कम नुकसान हो। विकास मॉडल का चयन: यह भी तय किया जाएगा कि परियोजना को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में विकसित किया जाए या यमुना प्राधिकरण स्वयं इसे आगे बढ़ाए। इन प्रमुख प्रस्तावों के अलावा, विभिन्न आवासीय भूखंड योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगने की संभावना है।
मेरठ (लावड़): मेरठ के लावड़ कस्बे में 22 जून से लापता उमेर की हत्या का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उमेर की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके ही दो दोस्तों ने एक लड़की से जुड़े विवाद में कर दी थी। पुलिस ने एक हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा फरार है।READ ALSO:-मां-बेटी से बाल पकड़कर बदसलूकी करने पर दारानगर गंज चौकी इंचार्ज संजय त्यागी लाइन हाजिर हालांकि, पुलिस अभी तक उमेर का शव बरामद नहीं कर सकी है, जिससे नाराज परिजनों ने लावड़ चौकी पर जमकर हंगामा किया और आत्मदाह तक का प्रयास किया। लड़की का हाथ पकड़ना बना मौत का कारण पुलिस ने मंगलवार को उमेर के दोस्त और हत्याकांड के मुख्य आरोपी ईशा को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। आरोपी ईशा ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। आरोपी ने बताया कि कस्बे की एक किराना दुकान पर बैठने वाली युवती से उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था। उमेर भी वहां आता-जाता था। कुछ दिन पहले उमेर ने उस युवती का हाथ पकड़ लिया था, जिसे ईशा ने देख लिया था। यह बात उसे नागवार गुजरी और उसने उमेर को रास्ते से हटाने की ठान ली। घूमने के बहाने ले जाकर मार दी गोली प्लान के मुताबिक, 22 जून को ईशा और उसके दूसरे दोस्त शाकिर ने उमेर को फोन करके बुलाया। वे उसे घुमाने के बहाने अपनी कार में बैठाकर सरधना के पास अटेरना ले गए। वहां गंगनहर के किनारे बैठकर तीनों ने कोल्ड ड्रिंक पी। इसी दौरान ईशा ने पीछे से उमेर के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद दोनों ने मिलकर शव को गंगनहर में फेंक दिया और फरार हो गए। परिजनों ने चौकी घेरी, आत्मदाह का प्रयास उधर, उमेर के भाई आलमगिर ने पहले ही ईशा और शाकिर पर अपहरण कर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था। मंगलवार को जैसे ही हत्या का खुलासा हुआ और शव बरामद न होने की बात सामने आई, परिजन भड़क गए। उमेर की पत्नी नगमा और भाई आलमगिर ने कई परिजनों के साथ लावड़ चौकी का घेराव किया। शव बरामदगी की मांग को लेकर नगमा और आलमगिर ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, जिससे पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। सीओ ने 72 घंटे का समय मांगा मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ सदर देहात शिव प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराया। परिजनों ने एसएसपी के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए तीन मांगें रखीं: फरार आरोपी शाकिर की तत्काल गिरफ्तारी। उमेर के शव की जल्द से जल्द बरामदगी। लापरवाही बरतने पर हल्का इंचार्ज अभिषेक यादव को सस्पेंड करना। सीओ शिव प्रताप सिंह ने परिजनों को 72 घंटे का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शांत हुए। सीओ ने बताया कि घटना में प्रयुक्त कार बरामद कर ली गई है, आरोपी ईशा को जेल भेज दिया गया है और शाकिर की तलाश जारी है। शव की बरामदगी के लिए गाजियाबाद पुलिस की भी मदद ली जा रही है।
लखनऊ/नोएडा: नोएडा में बन रहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ कंक्रीट का एक ढांचा नहीं, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का नया 'ग्रोथ इंजन' है। और हर इंजन को चाहिए एक मजबूत 'फ्यूल लाइन'। इसी फ्यूल लाइन को बिछाने का काम अब अंतिम चरण में है। सरकार ने एनएच-34 को नोएडा एयरपोर्ट से जोड़ने वाली एक ऐसी सड़क परियोजना को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया है, जिसे सिर्फ एक रास्ता कहना गलत होगा - यह असल में इस पूरे क्षेत्र का नया 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' बनने जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ को जाम से मिलेगी मुक्ति! बीच सड़क से हटेगी बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी, जली कोठी में नाले पर बनेगा स्लैब क्या है यह 'सुपरफास्ट' कॉरिडोर? यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि व्यापार और तरक्की के लिए बनाया जा रहा है। इसके दो मुख्य हिस्से हैं: विकास की डबल लेन: खुर्जा-जेवर रोड, जो अब तक एक सिंगल रोड है, उसे 15.43 किलोमीटर तक डबल लेन में बदला जाएगा। यह इस कॉरिडोर की मुख्य धमनी (main artery) होगी। जाम-मुक्त बाईपास: खुर्जा शहर के ट्रैफिक को बायपास करने के लिए 4 किलोमीटर लंबा एक नया बाईपास बनाया जाएगा, जो सीधे एनएच-34 को इस डबल लेन सड़क से जोड़ देगा। इन दोनों के बनने का मतलब है - एयरपोर्ट तक 'जीरो ट्रैफिक' और 'नॉन-स्टॉप' पहुंच। सिर्फ सफर नहीं, व्यापार भी होगा आसान इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि यहां के स्थानीय उद्योगों को मिलेगा। खुर्जा की पॉटरी को मिलेंगे पंख: खुर्जा, जिसे 'पॉटरी नगर' कहा जाता है, उसके कारीगरों के लिए यह सड़क एक वरदान साबित होगी। वे अपने उत्पाद बिना किसी जाम में फंसे, कम समय में सीधे एयरपोर्ट कार्गो तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके लिए दुनिया भर के बाजार खुल जाएंगे। मेरठ और हापुड़ के उद्योगों को रफ्तार: यही फायदा मेरठ के खेल के सामान और हापुड़ के अन्य उद्योगों को भी मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी सीधे तौर पर व्यापार को बढ़ाएगी। किसकी मेहनत लाई रंग? इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के पीछे जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह का लंबा संघर्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक उनकी मजबूत पैरवी है। वहीं, 4 किलोमीटर लंबे बाईपास के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की संस्तुति ने इस योजना को और गति दी है। यह कॉरिडोर जब बनकर तैयार होगा, तो यह सिर्फ मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर की दूरी ही कम नहीं करेगा, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास के एक नए 'रनवे' पर लाकर खड़ा कर देगा, जहां से तरक्की की नई 'उड़ान' भरी जाएगी।
ग्रेटर नोएडा/नोएडा। ऑनलाइन ग्रॉसरी और फूड डिलीवरी कंपनियों की लापरवाही अब ग्राहकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले एक ग्राहक ने पॉपुलर डिलीवरी प्लेटफॉर्म 'मिल्क बास्केट' (Milk Basket) से मंगवाए गए फूड प्रोडक्ट की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने रखा है। ग्राहक को डिलीवरी में पूरी तरह से सड़ी-गली अवस्था में चीज सॉस प्राप्त हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना ने ऑनलाइन ऑर्डर किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर का सियासी डेब्यू! बीजेपी के टिकट पर लड़ सकती हैं बिहार विधानसभा चुनाव सड़ा हुआ चीज सॉस: 'जान का भी खतरा' ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी सागर गुप्ता ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करते हुए मिल्क बास्केट की डिलीवरी पर गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने बताया कि मिल्क बास्केट से ऑर्डर किया गया चीज सॉस (Cheese Sauce) इस्तेमाल करने लायक नहीं था और डिलीवरी के वक्त ही वह सड़ी हुई अवस्था में था। 🚨Shame on #Milkbasket & #Amul Supplying rotten products is not just negligence — it’s a threat to public health! 🛑 Stop playing with consumers’ trust and safety. Authorities must act NOW!@Amul_Coop @Milkbasketin @JaagoGrahak#FoodSafety #JaagoGrahak #PublicHealth pic.twitter.com/g8gqfwG2MZ — Sagar Gupta (@SGuptaGNW) October 8, 2025 पीड़ित का बड़ा आरोप सागर गुप्ता का कहना है कि इस तरह के दूषित खाद्य सामग्री का सेवन करने से ग्राहक को न केवल फूड पॉइजनिंग हो सकती है, बल्कि पेट की गंभीर बीमारियां और यहां तक कि जान का भी खतरा हो सकता है। गुप्ता ने इसे महज ग्राहक सेवा की चूक नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया है, जिस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की है। क्यों हो रही ऐसी चूक? लापरवाही या सप्लाई चेन की कमी यह मामला ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की पूरी सप्लाई चेन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है: कमजोर कोल्ड चेन: संभव है कि चीज सॉस जैसे खराब होने वाले (Perishable) उत्पाद को डिलीवरी के दौरान सही तापमान (Cold Chain) में नहीं रखा गया हो। स्टोरेज की कमी: कंपनी के वेयरहाउस या डार्क स्टोर में सामान के स्टोरेज में कमी या अनियमितता हो सकती है। एक्सपायरी डेट की अनदेखी: डिलीवरी से पहले प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट की जांच नहीं की गई। तेजी का दबाव: तेजी से डिलीवरी करने के दबाव में कर्मचारियों द्वारा गुणवत्ता की जांच को नजरअंदाज करना। ग्रेटर नोएडा में लगातार मामले: पहले भेजी थी चिकन बिरयानी यह पहला मौका नहीं है जब ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभीर मामले सामने आए हैं। पिछले दिनों: वेज की जगह नॉन-वेज: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ही एक ग्राहक को एक नामी रेस्टोरेंट संचालक ने शाकाहारी (वेज) बिरयानी के ऑर्डर पर गलती से चिकन बिरयानी (नॉन-वेज) भेज दी थी। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा में लगातार हो रही यह चूक उपभोक्ताओं के बीच ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के प्रति विश्वास को कम कर रही है और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का मामला भी बनता है।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 11वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ उसके बॉयफ्रेंड ने पहले नोएडा ले जाकर रेप किया और जब वह वापस लौटी तो लड़के के परिवार वालों ने उसे बेरहमी से पीटने के बाद रेलवे लाइन पर फेंक दिया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने बॉयफ्रेंड समेत उसके माता-पिता और भाइयों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।READ ALSO:-'नाम बदलकर फंसाया, कलमा पढ़वाया, गोमांस खिलाने पर पीटा', यूट्यूबर ने भोजपुरी एक्टर मणि मेराज की खोली पोल, गिरफ्तार क्या है पूरा मामला? काकोरी थाना क्षेत्र की रहने वाली 11वीं की छात्रा का उसी के इलाके के एक युवक सुजीत यादव से प्रेम प्रसंग था। पीड़िता का आरोप है कि सुजीत यादव उसे 18 जुलाई को बहला-फुसलाकर अपने साथ नोएडा ले गया। वहां उसने एक किराए का कमरा लिया और छात्रा को बंधक बनाकर रखा। इस दौरान सुजीत ने कई बार उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। बचाव और बदला हुआ बयान किसी तरह छात्रा ने अपने परिजनों से संपर्क साधा और अपनी आपबीती बताई। घबराए हुए परिवार ने तुरंत काकोरी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए एक टीम नोएडा भेजी और 4 अक्टूबर को छात्रा को वहां से छुड़ाकर काकोरी थाने ले आई। हालांकि, लखनऊ पहुंचने के बाद छात्रा ने दबाव में आकर या किसी अन्य कारण से अपना बयान बदल दिया और सुजीत के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे परिजनों को सौंप दिया था। घर लौटने पर जानलेवा हमला मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब मंगलवार (7 अक्टूबर) को छात्रा दोबारा थाने पहुंची, लेकिन इस बार और भी बुरी हालत में। उसने पुलिस को बताया कि घर लौटने के बाद मंगलवार को उसके बॉयफ्रेंड सुजीत के माता-पिता, दो भाइयों और कुछ अन्य लोगों ने उसे रास्ते में रोक लिया। उन्होंने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और उसे मरा हुआ समझकर नौबस्ता रेलवे लाइन के पास फेंककर फरार हो गए। आसपास के राहगीरों ने जब उसे देखा और शोर मचाया, तब उसकी जान बच सकी। पुलिस ने दर्ज किया केस इस बार मामले की गंभीरता को देखते हुए काकोरी के इंस्पेक्टर सतीश चंद्र राठौर ने तुरंत पीड़िता की तहरीर पर सुजीत के माता-पिता, दोनों भाइयों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट और जानलेवा हमले का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया है और उसके बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि रेप के आरोपों की भी दोबारा जांच की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा: गौतम बुद्ध नगर के जेवर में बन रहे नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, इसकी अत्याधुनिक सुविधाओं की परतें खुलती जा रही हैं। 30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के लिए तैयार यह सिर्फ भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा ही नहीं होगा, बल्कि यह देश के सबसे बड़े और सबसे आधुनिक ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) का भी घर होगा। यह एक ऐसी जगह होगी जहां यात्री फ्लाइट से उतरने के बाद एक ही छत के नीचे बस, टैक्सी, कार, मेट्रो और यहां तक कि नमो भारत ट्रेन भी पकड़ सकेंगे।READ ALSO:-ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं! 45 दिन में चालान न भरा तो लाइसेंस होगा रद्द, गाड़ी भी होगी जब्त क्या है यह ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC)? नोएडा एयरपोर्ट के दोनों टर्मिनलों के बीच लगभग 20 एकड़ की विशाल भूमि पर इस GTC का निर्माण किया जा रहा है। यह एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब है जिसे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। विशाल पार्किंग: यहां एक साथ 1200 से ज्यादा वाहनों की पार्किंग की सुविधा होगी, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट भी शामिल हैं। आसान पहुंच: GTC को टर्मिनल बिल्डिंग से कुछ ही दूरी पर बनाया जा रहा है, जिससे यात्री पैदल चलकर ही अपनी कैब, टैक्सी या बस तक आसानी से पहुंच जाएंगे। निर्माण की स्थिति: GTC का निर्माण तीन चरणों में होना है, जिसमें से पहले चरण का 80% काम पूरा हो चुका है और एयरपोर्ट के उद्घाटन तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगा। जर्मनी और लंदन से प्रेरित डिजाइन नोएडा एयरपोर्ट के GTC को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और लंदन के हीथ्रो जैसे विश्व स्तरीय हवाई अड्डों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। यहां यात्रियों के लिए एक विशाल कॉनकोर्स और एक भूमिगत स्टेशन बनाया जा रहा है। इस सेंटर में सिर्फ परिवहन के साधन ही नहीं, बल्कि यात्रियों के आराम के लिए रेस्तरां, लाउंज और शॉपिंग के लिए वाणिज्यिक स्थान जैसी कई सुविधाएं भी होंगी। जीरो-वेटिंग कनेक्टिविटी का वादा यात्रियों को एयरपोर्ट से निकलते ही उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (YIAPL) ने कई परिवहन एजेंसियों के साथ करार किया है। रोडवेज बसें: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा रोडवेज की बसें उद्घाटन के दिन से ही अपनी सेवाएं शुरू कर देंगी। टैक्सी सेवाएं: उबर, रैपिडो और महिंद्रा के साथ टैक्सी सुविधाओं के लिए समझौता किया गया है। प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ाव: यहां से यात्रियों को पश्चिमी यूपी और पड़ोसी राज्यों के प्रमुख शहरों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, देहरादून, हरिद्वार, चंडीगढ़, पानीपत, अंबाला, और हल्द्वानी के लिए सीधी बसें और टैक्सियां मिलेंगी। नोएडा एयरपोर्ट की अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं GTC के अलावा भी यह एयरपोर्ट कई मायनों में खास होगा: क्षमता और रनवे: पहले चरण में 3.9 किलोमीटर लंबे रनवे के साथ यह सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। ग्रीन एनर्जी: पूरा एयरपोर्ट सौर ऊर्जा से संचालित होगा और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर जलभराव-रोधी तकनीक से बनाया गया है। जेट ब्रिज: यात्रियों को टर्मिनल से सीधे विमान में चढ़ाने के लिए 10 फुली फंक्शनल जेट ब्रिज होंगे, जिससे बसों की जरूरत खत्म हो जाएगी। उन्नत सुरक्षा: 180-डिग्री निगरानी वाले अग्नि सुरक्षा टावर और तेज सामान जांच के लिए ऑटोमेटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम (ATRS) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह हवाई अड्डा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश सरकार और ज्यूरिख एयरपोर्ट की सहायक कंपनी द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पूरक के रूप में काम करेगा।
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश ATS और STF ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए प्रदेश को दहलाने की एक खतरनाक साजिश को नाकाम कर दिया है। ATS ने चार कट्टरपंथी संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो 'मुजाहिदीन आर्मी' नाम का एक नया आतंकी संगठन बनाकर हिंदू धर्मगुरुओं और संतों की टारगेट किलिंग की फिराक में थे। इनका अंतिम मकसद देश में लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर कर शरिया कानून लागू करना था। क्या थी 'जंग-ए-जिहाद' की खतरनाक साजिश? यूपी एटीएस के आईजी पीके गौतम ने खुलासा किया कि यह मॉड्यूल पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से प्रभावित था और सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहा था। मुख्य निशाना: इनके निशाने पर खासतौर पर वे हिंदू संत और धर्मगुरु थे, जो अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। इनकी हत्या कर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे भड़काना इनका मकसद था। नया आतंकी संगठन: इस काम को अंजाम देने के लिए 'मुजाहिदीन आर्मी' नाम का संगठन तैयार किया जा रहा था, जिसमें कट्टरपंथी सोच वाले युवाओं को जोड़ा जा रहा था। प्रोपेगेंडा: ये लोग सोशल मीडिया ग्रुप्स में 'मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है' जैसा प्रोपेगेंडा फैलाकर युवाओं को 'जंग-ए-जिहाद' के लिए भड़का रहे थे। कौन हैं ये 4 गिरफ्तार कट्टरपंथी? ATS ने प्रदेश के चार अलग-अलग जिलों से इन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो इस नेटवर्क को चला रहे थे: अकमल रजा (सुल्तानपुर) सफील सलमानी (सोनभद्र) तौसीफ (कानपुर) कासिम अली (रामपुर) इनके पास से 5 मोबाइल फोन, आधार-पैन कार्ड और जिहादी साहित्य बरामद हुआ है। ATS की पूछताछ में उगले सारे राज आईजी पीके गौतम ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद पहले तो चारों ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन जब ATS ने सबूतों के साथ कड़ाई से पूछताछ की, तो वे टूट गए और उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि वे गुप्त बैठकें कर रहे थे और हथियार खरीदने के लिए फंडिंग भी जुटा रहे थे। ATS अब इस नेटवर्क की और गहरी जड़ों को खंगालने में जुट गई है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।